मायावती ने कहा मुलायम को भेजो आगरा के पागलखाने
लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती बुधवार को मुलायम सिंह यादव की उन पर की गई टिप्पणी से खासी नाराज हैं। मायावती ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि मुलायम सिंह यादव को इलाज की जरूरत है और बेहतर होगा कि अगर उन्हें आगरा स्थित पागलखाने में भर्ती करा दिया जाए।
बुधवार को मुलायम सिंह यादव ने फैजाबाद जिले में हुई एक चुनावी रैली के दौरान कहा था, 'मैं उसे कुंवारी कहूं, श्रीमती कहूं या बहन कहूं।' मुलायम की ओर से यह बयान मायावती की वैवाहिक स्थिति पर तंज के तौर पर दिया गया था।
मायावती ने गुरुवार को इसी बयान पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कही। मायावती के मुताबिक मुलायम सिंह यादव लोकसभा चुनावों में मिलने वाली हार की वजह से अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। ऐसे में मैं उनके परिवार के सदस्यों से उन्हें आगरा के पागलखाने भेज देना चाहिए ताकि उनका इलाज हो सके।
इसके साथ ही मायावती ने चुनाव आयोग से भी मुलायम सिंह यादव के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। मायावती ने चुनाव आयोग से सिफारिश की है कि वह मुलायम सिंह यादव के चुनाव प्रचार करने पर रोक लगाए।
आगे की स्लाइड में देखिए कि कब-कब यह दोनों दुश्मन आमने-सामने आए हैं और इनकी ओर से किस तरह की बयानबाजी हुई।

राजनीति में पुराने दुश्मन
मायावती और मुलायम सिंह यादव दोनों के बीच ही पुराने राजनीतिक विरोधी हैं और दोनों ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में दबदबा रखते हैं। वर्ष 2012 में राज्य में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान समाजवादी पार्टी ने बहुमत से सत्ता हासिल की और सत्ताधारी बसपा को सत्ता से बेदखल कर दिया था।

मायावती ने साधा था मुलायम पर निशाना
वर्ष 2007 में जब मायावती को उत्तर प्रदेश की सत्ता वापस मिली थी तो उन्होंने मुलायम के लिए जो बयान दिया था, वह खासा लोकप्रिय हुआ था। मायावती ने उस समय मुलायम सिंह यादव के लिए कहा था, 'मरे हुए को क्या मारोगे।'

मायावती ने कहा लोग मुझे याद करेंगे
वर्ष 2012 में जब मुलायम सिंह यादव के बेटे अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की सत्ता संभाली तो मायावती ने कहा कि मुलायम या उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश के लिए बेहतर नहीं है। आज भले ही जनता ने समाजवादी पार्टी को पूर्ण बहुमत दे दिया हो लेकिन एक दिन राज्य की जनता मुझे और मेरे शासनकाल को याद करेगी।

मुलायम और माया, बस एक सीट का अंतर
इसके अलावा लोकसभा चुनावों में दोनों पाटियों के बीच सिर्फ एक सीट का ही अंतर है। जहां सपा ने वर्ष 2009 के चुनावों में उत्तर प्रदेश की 22 सीटें जीतीं तो वहीं बसपा को इन चुनावों में 21 सीटें हासिल हुई थीं।

सपा, बसपा के लिए खास हैं ये लोकसभा चुनाव
इस बार के लोकसभा चुनावों में भी दोनों ही पार्टियां उत्तर प्रदेश में बीजेपी और नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के बीच अपनी अस्तित्व बचाने के लिए मैदान में जोर-शोर से लगी हुई हैं। उत्तर प्रदेश सपा और बसपा के साथ ही बाकी पार्टियों के लिए काफी अहम है क्योंकि इस राज्य की 80 सीटें केंद्र में सरकार की भूमिका तय करेंगी।












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