कई एजेंसियों ने केंद्र सरकार को किया अलर्ट, भारत में आतंकी हमला कर सकता है जैश-ए-मोहम्मद

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      Jaish-E-Mohammed करा सकता है Delhi में आतंकी हमला, RAW and IB का Alert | वनइंडिया हिंदी

      नई दिल्ली। केंद्र सरकार को कई एजेंसियों ने अलर्ट किया है कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद भारत में आतंकी हमले को अंजाम दे सकता है। जहां बीते 10 दिनों से अयोध्या मामले को लेकर सभी राज्य सरकारों से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने को कहा गया है, वहीं दूसरी ओर डार्क वेब से जैश के संभावित हमले के संदेश में मिल रहे हैं।

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      इस बात की जानकारी पहचान ना बताने की शर्त पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी है। अधिकारी ने कहा है कि सबसे जरूरी बात ये है कि कई एजेंसियां जैसे मिलिट्री इंटेलिजेंस, द रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ने सरकार को संभावित हमले को लेकर अलर्ट जारी किया है।

      हर एजेंसी एक ही निष्कर्ष पर पहुंची

      हर एजेंसी एक ही निष्कर्ष पर पहुंची

      अधिकारी ने कहा, 'यह खतरे की गंभीरता को दिखाता है। इनमें से प्रत्येक एजेंसी व्यक्तिगत रूप से एक ही निष्कर्ष पर पहुंची है।' उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिनों से सुरक्षा आदि को लेकर काफी सूचानएं मिल रही थीं, ऐसे में जाहिर था कि फैसला किसी भी वक्त आ सकता है। एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने पहचान ना बताने की शर्त पर कहा कि महत्वपूर्ण रूप से, "डार्क वेब" के माध्यम से बहुत से संचार एन्क्रिप्टेड और "कोडित" होते हैं, जो सुरक्षा एजेंसियों के काम को बहुत मुश्किल बना देता है।

      कहां हो सकता है हमला?

      कहां हो सकता है हमला?

      उन्होंने कहा कि अयोध्या पर आए फैसले के बाद पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन आतंकी हमले को अंजाम दे सकता है। उसका मकसद देश में सांप्रदायिक तौर पर हिंसा फैलाना है। संभावित खतरे का मुकाबला करने के लिए उपाय शुरू कर दिए गए हैं। प्राप्त सूचना का विश्लेषण करने पर पता चला है कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली या फिर हिमाचल प्रदेश को निशाना बनाया जा सकता है। 5 अगस्त के बाद से सभी सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। उस दिन जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटा दिया गया था।

      क्या है अयोध्या फैसला?

      क्या है अयोध्या फैसला?

      सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान के पक्ष में फैसला सुनाया है। निर्मोही अखाड़े के दावे को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान और सुन्नी वक्फ बोर्ड को ही पक्षकार माना है। कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को अतार्किक करार दिया। कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को कहीं और 5 एकड़ की जमीन दी जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वह मंदिर निर्माण के लिए 3 महीने में ट्रस्ट बनाए। इसमें निर्मोही अखाड़े को भी प्रतिनिधित्व देने का आदेश दिया गया है।

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