Manmohan Singh: मनरेगा से लेकर RTI तक, मनमोहन सिंह के कार्यकाल के 5 ऐतिहासिक बिल, जिन्हें हमेशा याद रखेगा देश
Manmohan Singh News: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का 26 दिसंबर की रात को 92 साल की उम्र में निधन हो गया। मनमोहन सिंह ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) दिल्ली में आखिरी सांस ली। मनमोहन सिंह 2004 से 2014 तक देश के प्रधानमंत्री रहे। अपने 10 साल के कार्यकाल में मनमोहन सिंह ने कई अहम फैसले लिए, जिसके लिए देश उन्हें हमेशा याद रखेगा।
दिल्ली यूनिवर्सिटी में इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर से लेकर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर, फिर देश के वित्त मंत्री और 10 सालों तक प्रधानमंत्री रहे, उनका सफरनामा शानदार रहा। 2004 से 2014 के बीच प्रधानमंत्री रहते हुए मनमोहन सिंह ने अपने कार्याकल में मनरेगा से लेकर आरटीआई जैसे कई अहम बिल लाए, जिसकी चर्चा अब उनके निधन के बाद एक बार फिर से हो रही है। आइए जानें इन 5 ऐतिहासिक बिल के बार में?

🔴 1. सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (आरटीआई) को 15 जून 2005 को भारत के राष्ट्रपति ने स्वीकृति दी थी। इसे 12 अक्टूबर 2005 से लागू किया गया था। आरटीआई के तहत कोई भी नागरिक किसी भी सरकारी विभाग की जानकारी अब मांग सकता है। उसके बाद सरकार तथ्यों के आधार पर ये जानकारी देती है।
🔴 2. शिक्षा का अधिकार RTE (Right TO Education) 2009
शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 आरटीई बिल भारत की संसद में 4 अगस्त 2009 को पारित किया गया था। यह अधिनियम 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ था। ये अधिनियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21ए के तहत बना है। इसके तहत 6 से 14 साल के बच्चों के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार दिया गया है।
🔴 3. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) MNREGA
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को 5 सितंबर 2005 को लागू किया गया था। मनरेगा रोजगार गारंटी योजना है। इसके तहत हर वित्तीय वर्ष में, ग्रामीण इलाकों के उन परिवारों के वयस्क सदस्यों को 100 दिन का रोजगार दिया जाता है, जो हर दिन 220 रुपये की न्यूनतम मजदूरी करना चाहते हैं।
🔴 4. प्रत्यक्ष लाभ भुगतान (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) DBT
डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की भारत सरकार ने 1 जनवरी 2013 को की थी। इस योजना के तहत सरकार लाभों को सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर करती है। यह बहुत त्वरित भी है और इसमें बिचौलियों द्वारा भ्रष्टाचार की संभावना भी कम हो जाती है।













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