'कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव तब तक निष्पक्ष नहीं हो सकता, जब तक...', अब मनीष तिवारी ने दिखाए बगावती तेवर
पार्टी के नेता और पंजाब की आनंदपुर साहिब लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने चुनाव प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
नई दिल्ली, 31 अगस्त: लंबे इंतजार के बाद आखिरकार कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद के चुनाव की तारीख फाइनल हो गई है और आने वाली 17 अक्टूबर को पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया जाएगा। हालांकि अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले ही कांग्रेस में खींचतान देखने को मिल रही है। दरअसल, पार्टी के नेता और पंजाब की आनंदपुर साहिब लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने चुनाव प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। मनीष तिवारी ने ट्वीट करते हुए कहा है कि जब तक मतदाता सूची सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होती, तब तक निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कैसे हो सकता है?
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मधुसूदन मिस्त्री के बयान पर कांग्रेस को घेरा
मनीष तिवारी ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण के प्रमुख मधुसूदन मिस्त्री के एक बयान को लेकर कई ट्वीट किए और पार्टी की चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए। मनीष तिवारी ने ट्वीट करते हुए कहा, 'मधुसूदन मिस्त्री जी, बहुत सम्मान के साथ मैं पूछना चाहता हूं कि जब तक मतदाता सूची सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होती, तब तक निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कैसे हो सकता है? एक निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव का सार ये है है कि सभी मतदाताओं के नाम और पते कांग्रेस पार्टी की वेबसाइट पर पारदर्शी तरीके से प्रकाशित किए जाने चाहिए।'

क्या था मधुसूदन मिस्त्री का बयान
आपको बता दें कि मधुसूदन मिस्त्री ने 'द हिंदू' अखबार को बयान देते हुए कहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में मतदाताओं की सूची सार्वजनिक नहीं की जाएगी, लेकिन अगर पार्टी का कोई सदस्य इस सूची को चेक करना चाहता है तो वो प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दफ्तर पर जाकर चेक कर सकते हैं। मनीष तिवारी ने मधुसूदन मिस्त्री के इसी बयान को लेकर ट्वीट किए हैं।

'क्लब के चुनाव में भी ऐसा नहीं होता'
अपने ट्वीट मे मनीष तिवारी ने लिखा, 'मैं बहुत सम्मान के साथ बताना चाहता हूं कि किसी क्लब के चुनाव में भी ऐसा नहीं होता है। निष्पक्षता और पारदर्शिता के हित में, मैं स्वयं आपसे मतदाताओं की पूरी सूची कांग्रेस की वेबसाइट पर जारी करने का निवेदन करता हूं। अगर कोई इस चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करना चाहता है, तो नियमों के मुताबिक उसे 10 प्रस्तावकों की जरूरत होगी और अगर उसे मालूम ही नहीं होगा कि मतदाता सूची में कौन-कौन है, तो क्या वो इसके लिए देशभर में प्रदेश कांग्रेस कार्यालयों की दौड़ लगाएगा। और, ऐसी स्थिति में केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण यह कहकर उसका नामांकन निरस्त कर देगा कि प्रस्तावक इस चुनाव के लिए वैध मतदाता नहीं हैं।'

गुलाम नबी के बाद एक और बगावत
आपको बता दें कि मनीष तिवारी का ट्वीट ऐसे समय पर आया है, जब कांग्रेस में अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में गुलाम नबी आजाद ने भी कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर अपना इस्तीफा दिया और राहुल गांधी पर कई गंभीर आरोप लगाए। ऐसे में मनीष तिवारी के इस ताजा हमले को पार्टी में नई बगावत के तौर पर देखा जा रहा है।












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