चीन को मिलकर घेरेंगे जापान और भारत, साइन हुआ बड़ा समझौता MLSA

नई दिल्‍ली। गुरुवार को भारत और जापान के साथ एक बड़ा समझौता हुआ है। इस समझौते को म्‍युचूअल लॉजिस्टिक्‍टस सपोर्ट अरेंजमेंट (MLSA) नाम दिया गया है। इस समझौते के बाद भारत और जापान एक साथ मिलकर चीन की घेराबंदी न सिर्फ हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर कर सकेंगे बल्कि इसके आगे भी दोनों मजबूती से चीन के खिलाफ आ सकते हैं। रक्षा सचिव डॉक्‍टर अजय कुमार और जापान के राजदूत सुजूकी सतोषी ने इस समझौते पर साइन किए हैं। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्‍ता की तरफ से इस बात की जानकारी दी गई है।

एक-दूसरे के मिलिट्री बेस का प्रयोग

एक-दूसरे के मिलिट्री बेस का प्रयोग

जो समझौता जापान और भारत के बीच हुआ है उसके बाद दोनों देशों के बीच मिलिट्री सहयोग बढ़ेगा, दोनों देश एक-दूसरे के सैन्‍य संस्‍थानों का प्रयोग कर सकेंगे। रक्षा प्रवक्‍ता की तरफ से बताया गया, 'इस समझौते के बाद भारत और जापान की सेनाओं के बीच एक आपसी सहयोग का खाका तैयार हो गया है। दोनों देश ट्रेनिंग के अलावा सप्‍लाई और सर्विसेज में भी एक-दूसरे का सहयोग कर सकेंगे।' भारत ने इसी तरह का सहयोग अमेरिका, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर और ऑस्‍ट्रेलिया के साथ भी किया हुआ है। साल 2016 में अमेरिका के साथ हुए समझौते के बाद भारत को जिबूती में अमेरिकी मिलिट्री बेसेज पर रि-फ्यूलिंग की सुविधा मिली। इसके साथ भारत जिबूती के अलावा डिएगो ग्रेसिया, गुआम और स्‍यूबिक बे में अमेरिकी मिलिट्री बेसेज का प्रयोग करने का अधिकारी भी बना।

फ्रांस और ऑस्‍ट्रेलिया के साथ भी

फ्रांस और ऑस्‍ट्रेलिया के साथ भी

फ्रांस के साथ इसी तरह का समझौता साल 2018 में हुआ था। इस समझौते के बाद भारतीय नौसेना की पहुंच साउथ वेस्‍टर्न इंडियन ओशीन रिजन यानी आईओआर में फ्रेंच मिलिट्री बेसेज का प्रयोग कर सकती है। इंडियन नेवी इस समझौते के बाद अब मैडागास्‍कर और जिबूती के करीब रियूनियन द्वीप का प्रयोग कर सकती है। ऑस्‍ट्रेलिया के साथ हुए इसी तरह के समझौते के बाद इंडियन नेवी की वॉरशिप आईओआर के साथ ही पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में भी जा सकती हैं। भारत के लिए ये समझौते काफी सवंदेनशील हैं क्‍योंकि चीन धीरे-धीरे अब जिबूती पर अपनी पकड़ मजबूत करता जा रहा है।

जिबूती में चीन का बेस

जिबूती में चीन का बेस

अगस्‍त 2017 में यहां पर उसका पहला बेस ऑपरेशनल है। जिबूती, हिंद महासागर क्षेत्र में आता है और इस वजह से भारत की चिंताएं बढ़ गई हैं। चीन के पास इस समय पाकिस्‍तान के ग्‍वादर और कराची बंदरगाह का नियंत्रण है। यहां पर उसकी पनडुब्बियों और युद्धपोतों का एक मजबूत ठिकाना है। इसके अलावा चीन अब कंबोडिया, वनुअताउ के साथ कुछ और देशों में भी अपना मिलिट्री बेस बनाने की तैयारी कर रहा है। चीन का मकसद हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिशों में लगा हुआ है।

भारत के करीब 8 चीनी वॉरशिप्‍स

भारत के करीब 8 चीनी वॉरशिप्‍स

भारत के करीब चीन की आठ वॉरशिप्‍स हैं और इन्‍हें आईओआर में किसी भी समय तैनात किया जा सकता है। चीन लगातार अपनी नेवी की ताकत को बढ़ा रहर है। लंबी-दूरी की न्‍यूक्लियर बैलेस्टिक मिसाइलों के अलावा एंटी-शिप क्रूज मिसाइल से लेकर पनडुब्‍बी और एयरक्राफ्ट कैरियर्स तक शामिल किए जा रहे हैं। चीन ने पिछले छह सालों के अंदर 80 से ज्‍यादा वॉरशिप्‍स को शामिल किया है।

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