'हेनरी' कुत्ते का क्या है मामला? जिसके लिए महुआ मोइत्रा पहुंची हाईकोर्ट
Mahua Moitra pet custody case: तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने अपने पालतू कुत्ते रॉटवीलर हेनरी की कस्टडी के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। कोर्ट ने प्रतिवादी अधिवक्ता जय अनंत देहाद्रई को नोटिस जारी किया है। जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने देहाद्रई से मोइत्रा की याचिका पर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को है।
दरअसल, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने साकेत कोर्ट के 10 नवंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें हेनरी की हर महीने 10 दिन की कस्टडी नहीं मिली थी। देहाद्रई ने कोर्ट से याचिका को शुरुआती चरण में ही खारिज करने का आग्रह किया।

लंबे समय से चल रही ये विवाद
हेनरी की कस्टडी का विवाद लंबा है। पिछले साल सितंबर में भी, दिल्ली हाई कोर्ट ने देहाद्रई की अपील पर मोइत्रा को नोटिस दिया था। वह अपील निचली अदालत के उस आदेश के विरुद्ध थी, जिसने देहाद्रई को मामला सार्वजनिक करने से रोका था। यह मूल कस्टडी मामला साकेत कोर्ट में है।
माेइत्रा के बाहर जाने पर कुत्ते की देखभाल करता था जय अनंत
ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए अपनी याचिका में, महुआ मोइत्रा ने तर्क दिया कि निचली अदालत का फैसला त्रुटिपूर्ण था। उनके अनुसार, कोर्ट इस तथ्य पर विचार करने में विफल रहा कि हेनरी उन्हें "प्यार और देखभाल" के लिए पालतू जानवर के तौर पर दिया गया था और वह हमेशा उन्हीं के घर रहता था। और देहाद्रई के पास तभी देखभाल के लिए जाता था जब वे आधिकारिक कामों के लिए दिल्ली से बाहर जाती थीं।
कौन है कुत्ते का असली मालिक?
याचिका में कोर्ट के आदेश में "डिफेंडेंट/रिस्पॉन्डेंट" (जय अनंत देहाद्राई) को कुत्ते का मालिक नहीं बताया गया। मोइत्रा ने तर्क दिया कि निचली अदालत ने गलत तरीके से माना कि केवल भुगतान ही मालिकाना हक का प्रमाण है, जबकि शिकायत के साथ विशिष्ट सबूत दाखिल हुए हैं। यह भी स्पष्ट है कि प्रतिवादी ने याचिकाकर्ता की ओर से ही पालतू जानवर के लिए भुगतान किया था।
नगदी के बदले सवाल का मोइत्रा पर अनंत ने लगाया था आरोप
जय अनंत देहाद्राई और महुआ मोइत्रा के बीच पिछले कुछ वर्षों से कई कानूनी विवाद चल रहे हैं। इनमें से एक प्रमुख मामला "नगदी के बदले सवाल" का था, जिसमें देहाद्राई ने आरोप लगाया कि मोइत्रा ने संसद में प्रश्न पूछने के लिए व्यवसायी दर्शन हीरानंदानी से रिश्वत ली थी।
भाजपा की शिकायत पर महुआ मोइत्रा को सदन से किया था निष्काषित
इन आरोपों के बाद, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद निशिकांत दुबे ने भी लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। लोकसभा आचार समिति ने उन्हें निचले सदन से निष्कासित करने की सिफारिश की, जिसके बाद उन्हें 8 दिसंबर, 2023 को लोकसभा से हटा दिया गया।
हालांकि, महुआ मोइत्रा ने इन सभी आरोपों का खंडन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि दर्शन हीरानंदानी उनके मित्र हैं और उनके बीच कोई लेन-देन नहीं हुआ था। साथ ही, उन्होंने इन आरोपों को "राजनीतिक बदले की भावना" का हिस्सा बताया।
महुआ मोइत्रा पर क्या था आरोप?
हालांकि जय अनंत देहाद्राई और निशिकांत दुबे ने दावा किया कि महुआ मोइत्रा ने अपने ऑनलाइन लोकसभा खाते की पूरी पहुंच हीरानंदानी को दी। आरोप था कि हीरानंदानी ने इसका उपयोग अपनी पसंद के संसदीय प्रश्न पोस्ट करने के लिए किया। यह भी दावा किया गया कि मोइत्रा द्वारा संसद में पूछे गए कुल 61 सवालों में से 50 हीरानंदानी के सुझाव पर आधारित थे।
मोइत्रा ने अनंत और निशिकांत दूबे के खिलाफ दर्ज किए मानहानि केस
इसके जवाब में, महुआ मोइत्रा ने जय अनंत देहाद्राई और निशिकांत दुबे के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया। हालांकि, मार्च 2024 में दिल्ली हाईकोर्ट ने टीएमसी नेता की अंतरिम रोक की अर्जी नामंजूर कर दी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि दर्शन हीरानंदानी के साथ संसदीय लॉगिन क्रेडेंशियल साझा करने और उपहार लेने के मोइत्रा पर लगे आरोप "पूरी तरह गलत" नहीं थे। यह व्यापक मामला अभी भी अदालत में लंबित है।












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