महात्मा गांधी से लेकर कालिदास तक, फिल्म पद्मावत की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की इनसाइड स्टोरी

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को फिल्म पद्मावत पर 6 राज्यों में लगी रोक को हटाने के लिए करीब 50 मिनट तक सुनवाई चली। इस दौरान फिल्म पद्मावत के निर्माताओं की तरफ से केस लड़ रहे वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे और चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच के बीच जोरदार बहस देखने को मिली जिसमें महात्मा गांधी से लेकर कालिदास के साहित्य तक की चर्चा हुई।

ऊंची आवाज के लिए हरीश साल्वे ने मांगी माफी

ऊंची आवाज के लिए हरीश साल्वे ने मांगी माफी

न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक हरीश साल्वे ने बोलने की आजादी और रचनात्मकता आजादी को आधार बनाते हुए अपनी दलीलें बेंच के सामने रखी। अपनी दलीलें खत्म होने के लगभग 10 मिनट बाद हरीश साल्वे ने अपनी ऊंची आवाज के बेंच से माफी मांगते हुआ कि वे बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए पिछले 40 सालों से लगातार बहस कर रहे हैं इसलिए वे इस मुद्दे पर थोड़े भावुक हो गए थे।

'इतिहास से छेड़छाड़ की भी होनी चाहिए आजादी'

'इतिहास से छेड़छाड़ की भी होनी चाहिए आजादी'

हरीश साल्वे ने सुनवाई के दौरान कहा, 'इस केस में, हम उन सभी बातों पर राजी हुए जो सेंसर बोर्ड और एक्सपर्ट कमेटी ने हमसे कहा लेकिन एक दिन मैं इस बात पर भी बहस करूंगा कि एक कलाकार को इतिहास के साथ भी छेड़छाड़ करने का भी हक होना चाहिए।' हरीश साल्वे की इस बात पर जहां चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि आप बहस को चरम स्थित पर लेकर मत जाइए। वहीं एडिशनल सॉलिसिटर जनरल, तुषार मेहता ने भी ऐतराज जताया। बता दें कि तुषार मेहता, फिल्म पद्मावती पर बैन लगाने वाले राज्यों गुजरात, राजस्थान और हरियाणा की तरफ से केस लड़ रहे थे।

महात्मा गांधी और व्हिस्की

महात्मा गांधी और व्हिस्की

तुषार मेहता ने हरीश साल्वे की दलील पर ऐतराज जताते हुए कहा, 'नहीं, आप इतिहास के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकते। हम किसी शख्स को महात्मा गांधी को व्हिस्की पीते हुए दिखाने की इजाजत नहीं दे सकते।' इस दलील पर हरीश साल्वे ने कहा, 'लेकिन मिस्टर मेहता, यह तो इतिहास के साथ छेड़छाड़ भी नहीं है।' हरीश साल्वे ने कहा कि पश्चिमी देशों में तो 'जीसस क्राइस्ट सुपर स्टार' जैसी फिल्में भी बनती हैं जिसपर तुषार मेहता ने कहा कि हमें पश्चिमी देशों में क्या हो रहा है इसे छोड़कर भारतीय मानकों को ध्यान में रखकर बहस करना चाहिए।

'60 फीसदी भारतीय साहित्य पढ़ने लायक नहीं रह जाएगा'

'60 फीसदी भारतीय साहित्य पढ़ने लायक नहीं रह जाएगा'

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने भी कई भारतीय साहित्य, किताब और नाटकों का हवाला देते हुए कहा कि अगर सभी चीजों को ध्यान में रखकर अध्ययन किया जाए तो '60 प्रतिशत से भी ज्यादा भारतीय साहित्य पढ़ने लायक नहीं रहेगा।' चीफ जस्टिस ने कालिदास की विवादित किताब 'नल दमयंती' का जिक्र करते हुए कहा कि इस किताब में इतनी विवादित चीजें हैं कि कई शिक्षाविदों ने इसका अुनवाद तक करने से इंकार कर दिया। उन्होंने हरीश साल्वे से कहा कि शायद ये बात आपको भी नहीं पता होगी। जिस पर हरीश साल्वे ने कहा कि जी आपने सही कहा।

जब नाथूराम गोडसे के नाटक पर बैन लगाने की उठी थी मांग

जब नाथूराम गोडसे के नाटक पर बैन लगाने की उठी थी मांग

सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने बताया कि कई साल पहले एक मराठी में एक नाटक बना था 'मी नाथूराम गोडसे बोलतो'। इस नाटक पर बैन लगाने की मांग उठी थी लेकिन हाईकोर्ट ने इससे इंकार करते हुए राज्य सरकार को कानून व्यवस्था बरकरार रखने की जिम्मेदारी दी। चीफ जस्टिस दीपक मिश्र ने भी इसके समर्थन में कहा कि जब वे दिल्ली हाईकोर्ट में जज थे उस समय उनके पास फिल्म धोबीघाट को बान करने की मांग करने वाली याचिका आई थी जिस पर उन्होंने याचिका दायर करने वाले पर जुर्माना लगाते हुए रद्द कर दिया था। जस्टिस मिश्रा ने कहा कि कोर्ट संवैधानिक अधिकारों और एक कलाकार की आजादी की रक्षा करता है।

क्या आया फैसला?

क्या आया फैसला?

करीब 50 मिनट तक चली सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म पद्मावत के निर्माताओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सभी राज्यों में फिल्म को सभी राज्यों में रिलीज करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने बैन लगाने वाले सभी राज्यों को आदेश दिया है कि वो फिल्म को रिलीज होने से नहीं रोक सकते। कोर्ट ने कहा कि 'पद्मावत' को सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट मिल चुका है, ऐसे में राज्य इसे बैन नहीं कर सकते। कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा है कि सभी राज्य कानून और व्यवस्था बनाए रखने और पूरे भारत में फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए बाध्य हैं।

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