शिवसेना बोली- सत्ता का रिमोट कंट्रोल हमारे हाथ में, 30 अक्टूबर को हो सकती है उद्धव और शाह में मुलाकात
नई दिल्ली। महाराष्ट्र में शिवसेना और भाजपा के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान जारी है। भाजपा जहां सीएम पद को लेकर किसी समझौते के मूड में नहीं दिख रही है तो वहीं शिवसेना ने साफ कहा है कि साझे में सरकार चलानी है तो ढाई साल के लिए सीएम पद भाजपा और ढाई साल उनके पास रहेगा। रविवार को शिवसेना की ओर से कहा गया है कि इस दफा सत्ता का रिमोट कंट्रोल उनके हाथ में है। ऐसी भी जानकारी सामने आई है कि 30 अक्टूबर को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की मुलाकात हो सकती है ताकि महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर रास्ता निकाला जा सके।

शिवसेना के मुखपत्र में 'सामना' में संजय राउत ने अपने लेख में कहा है कि शिवसेना ने इस बार कम सीटें जीती हैं। 2014 की 63 के मुकाबले 56 सीटें जीती हैं, लेकिन उसके पास सत्ता की चाबी है। सत्ता का रिमोट कंट्रोल अब पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के हाथ में है। इसमें कहा गया है कि बीजेपी नेताओं और अन्य नेताओं ने कहा था कि महाराष्ट्र में विपक्षी दल नहीं बचेंगे और चुनाव के बाद 'पवार पैटर्न' स्थायी रूप से समाप्त हो जाएगा। ग्रामीण महाराष्ट्र के लोग इस भाषा को पसंद नहीं किया और उसने महाराष्ट्र में एक मजबूत विपक्ष खड़ा किया। इसका श्रेय राज्य के लोगों को दिया जाना चाहिए।
शिवसेना ने कहा है कि साझे में सरकार चलानी है तो ढाई साल के लिए सीएम पद भाजपा और ढाई साल उनके पास रहेगा। इसके लिए उन्होंने भाजपा से लिखित आश्वासन मांगा हैं। इस पर कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि शिवसेना अगर कोई ऑफर लेकर आती है तो उस पर विचार करेंगे। शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक ने शनिवार को कहा कि बीजेपी जब तक लिखित में नही देगी तब तक शिवसेना सरकार में शामिल नहीं होगी। 50 -50 फार्मूला के तहत ढाई-ढाई साल दोनों पार्टियों से मुख्यमंत्री होना चाहिए। शिवसेना के विधायक इस बार आदित्य ठाकरे को सीएम देखना चाहते हैं
आदित्य वर्ली सीट से विधायक चुनकर आए हैं। महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों में से भारतीय जनता पार्टी को 105 शिवसेना को 56 कांग्रेस को 44 और एनसीपी को 54 सीटों पर जीत मिली है। बहुमत के लिए यहां 145 सीटों की जरूरत है, ऐसे में साफ है कि कोई एक पार्टी अपने दम पर सरकार नहीं बना सकती है।












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