Maharashtra MLAs Disqualification : डिप्टी स्पीकर नरहरी पर नजरें, जानिए शिवसेना के कानूनी विकल्प
महाराष्ट्र में विधायकों पर अयोग्य करार (maharashtra mlas disqualification) दिए जाने का खतरा मंडरा रहा है। जानिए महाराष्ट्र के सियासी संकट (Maharashtra Political Crisis) के बीच कानूनी विकल्प।
नई दिल्ली, 25 जून : महाराष्ट्र की राजनीतिक अस्थिरता (Maharashtra Political Crisis) के बीच विधायकों की अयोग्यता (Maharashtra MLAs disqualification) का मामला भी सुर्खियों में है। माना जा रहा है कि अगर एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) की अगुवाई में बगावत करने वाले विधायकों की संख्या उद्धव ठाकरे के पक्ष में खड़े विधायकों की संख्या से कम होगी तो इन विधायकों को अयोग्य करार दिया जा सकता है। ऐसे में उन लोगों को विधानसभा में जाने के लिए दोबारा निर्वाचित होना पड़ेगा। जितने विधायकों को अयोग्य करार दिया जाएगा उन सीटों पर विधानसभा उपचुनाव कराए जाएंगे। हालांकि, तमाम उथल-पुथल के बीच नजरें महाराष्ट्र विधानसभा के डिप्टी स्पीकर नरहरी जिरवाल (Dy Speaker Narhari Zirwal) पर हैं। जानिए, जिन विधायकों पर निलंबन की तलवार लटक रही है, उनके सामने क्या कानूनी विकल्प हैं।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद अंतिम फैसला
विधायकों की अयोग्यता पर महाराष्ट्र के पूर्व महाधिवक्ता और संवैधानिक मामलों के जानकार श्रीहरि एनी (Shrihari Aney) ने बताया कि विधायकों की अयोग्यता का फैसला दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर होगा। डिप्टी स्पीकर को बागी विधायकों को अपना पक्ष रखने की लिए समय देना होगा। शिवसेना को भी बागी विधायकों को उनका पक्ष रखने का समय देना होगा। इसके बाद ही उनके अयोग्यता पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
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एकनाथ शिंदे गुट कोर्ट जा सकता है !
बता दें कि गुवाहाटी के होटल में ठहरे हुए बागी विधायकों ने कथित तौर पर पत्र लिखा है। ऐसी खबरें हैं कि डिप्टी स्पीकर को संबोधित पत्र में शिंदे गुट के इन विधायकों ने एकनाथ शिंदे को विधायक दल का नेता चुनने की सूचना दी है। इस पर संवैधानिक मामलों के जानकार एडवोकेट श्रीहरि एनी ने कहा, महाराष्ट्र विधानसभा में शक्ति परीक्षण होना बाकी है। ऐसे में केवल विधायिका तक ही यह मामला सीमित नहीं रहेगा। इस मामले में विधायकों के पास कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का भी विकल्प है।

उद्धव सरकार पर संकट, राज्यपाल की भूमिका
उन्होंने बताया कि अगर किसी राज्य में संवैधानिक मशीनरी फेल होती है ऐसी स्थिति में राज्यपाल को हस्तक्षेप करना होगा। फिलहाल महाराष्ट्र में संवैधानिक व्यवस्था ध्वस्त होने जैसी स्थिति नहीं है। संवैधानिक मामलों के जानकार श्रीहरि एनी ने बताया कि विधानसभा का डिप्टी स्पीकर एक अदालत की तरह काम करता है। अपील के नेचर के आधार पर उन्हें फैसला लेना होता है। इस मामले में देखना होगा कि डिप्टी स्पीकर को दोनों पक्षों से जो पत्र मिले हैं उसमें क्या लिखा है।

महाराष्ट्र में अदालत की भूमिका
बकौल श्रीहरि एनी (Shrihari Aney), जन प्रतिनिधियों की अयोग्यता के मामले विशेष परिस्थितियों में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में पहले भी जा चुके हैं। पूर्व महाधिवक्ता श्रीहरि एनी ने बताया कि पीड़ित पक्ष ऐसे मामलों में न्यायिक समीक्षा की मांग करता रहा है। ऐसे में महाराष्ट्र में अगर विधायकों को अयोग्य ठहराया जाता है तो उनके पास भी कोर्ट में अपील करने का विकल्प खुला रहेगा।

शिवसेना ने कहा, 12 विधायकों को अयोग्य करार दें
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में कह रहे थे राजनीतिक संकट में उसमें नाटकीय मोड़ आ गया था जब शिवसेना ने बागी विधायकों को निलंबित करने की मांग की। उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना ने डिप्टी स्पीकर नरहरी जिरवाल को पत्र लिखा है। इसमें एकनाथ शिंदे समेत 12 बागी विधायकों को विधायक दल की बैठक से नदारद रहने के आरोप में अयोग्य करार देने की मांग की गई है। शिवसेना सांसद अरविंद सावंत ने इस संबंध में कहा कि मीटिंग से पहले एक नोटिस जारी किया गया था। इसमें स्पष्ट कहा गया था कि अगर विधायक मीटिंग से नदारद रहते हैं तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसी आधार पर डिप्टी स्पीकर के पास याचिका दायर की गई है।

डिप्टी स्पीकर जिरवाल NCP के करीब !
विधानसभा से विधायकों के निलंबन / अयोग्य करार दिए जाने पर महाराष्ट्र असेंबली में डिप्टी स्पीकर नरहरी जिरवाल क्या फैसला लेते हैं, ये भविष्य के गर्भ में है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने विधायकों की अयोग्यता के मामले में दूसरे राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष पर अंतिम फैसला छोड़ने के फैसले सुनाए हैं। ऐसे में विधानसभा स्पीकर की भूमिका अहम है। महाराष्ट्र विधानसभा में अभी कोई स्पीकर नहीं है ऐसे में डिप्टी स्पीकर सबसे महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। न्यूज रिपोर्ट में नरहरी जिरवाल को एनसीपी का करीबी बताया गया है।

महाराष्ट्र में संकट, निर्दलीय महिला सांसद ने शाह से की अपील
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में गहराते राजनीतिक संकट के बीच कई जगहों से तोड़फोड़, पोस्टर पर कालिख पोतने, पुलता दहन और शिवसेना कार्यकर्ताओं में आक्रोश की खबरों के बीच अमरावती लोकसभा सीट से निर्वाचित निर्दलीय महिला सांसद नवनीत राणा ने गृह मंत्री शाह से हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने उद्धव ठाकरे के कार्यकाल में गुंडागर्दी होने की बात कही है।

शिदें ने ठोकी ताल, कहा- बालासाहेब के फॉलोअर हैं
अयोग्य करार देने की पहल के बीच बागी विधायक एकनाथ शिंदे ने ट्विटर पर लिखा था, वे शिवसेना संस्थापक का बालासाहेब ठाकरे के फॉलोअर हैं। 12 विधायकों को डिसक्वालीफाई करने का नोटिस देकर डराने का प्रयास नहीं कर सकते। शिंदे ने लिखा कि आप अपने रास्ते जानते हैं और कानून का रास्ता भी है। बकौल शिंदे, संविधान के 10वें शेड्यूल के मुताबिक व्हिप विधानसभा की कार्यवाही के लिए जारी किया जाता है। पार्टी की बैठकों के लिए नहीं। तमाम घटनाक्रमों के बीच अब देखना दिलचस्प होगा कि महाराष्ट्र सरकार का भविष्य क्या होगा।












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