BRS की तेलंगाना से पहले महाराष्ट्र में बड़ी जीत, जानें कैसे बदल गया राज्य का पूरा चुनावी समीकरण
भारत राष्ट्र समिति (BRS) तेलंगाना विधानसभा चुनावों में अपनी सत्ता बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। लेकिन, प्रदेश में मतदान से कुछ हफ्ते पहले महाराष्ट्र ग्राम पंचायत चुनावों के नतीजों ने इसके नेताओं का मन गुलाबी-गुलाबी कर दिया है।
इस चुनाव से पहले महाराष्ट्र में बीआरएस का कोई चुनावी वजूद नहीं नजर आता था। लेकिन, रविवार को हुए ग्राम चुनावों के नतीजों ने पार्टी समर्थित उम्मीदवारों को कम से कम 57 ग्राम पंचायतों में जीत दिलाई है। इस चुनाव में बीआरएस समर्थित उम्मीदवार करीब 300 ग्राम पंचायत सीटों पर चुनाव लड़ रहे थे। पार्टी का दावा है कि पूरे नतीजे आने के बाद उसके आंकड़े और बढ़ने तय हैं।

महाराष्ट्र पंचायत चुनाव में बीआरएस की पहली बड़ी जीत
पार्टी सूत्रों के मुताबिक बीआरएस को सबसे बड़ी सफलता नागपुर डिविजन के भंडारा जिले में मिली है। इसी तरह सोलापुर और जलगांव में भी इसने अपनी धमक दिखाई है। नागपुर डिविजन के 6 जिलों में पार्टी का दावा है कि वह कई ग्राम पंचायतों में दूसरे नंबर पर रही है। यह स्थिति राज्य के बड़े हिस्से में नजर आ रही है।
बीआरएस के महाराष्ट्र किसान सेल के अध्यक्ष माणिक कदम ने टीओआई से कहा है कि इस जीत से पता चलता है कि महाराष्ट्र के लोग खासकर खेतिहर समुदाय को तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के नेतृत्व में भरोसा है, जिन्होंने 'अबकी बार किसान सरकार' के नारे से प्रभावित होकर मतदान किया है।
बीआरएस नेताओं का बढ़ गया है उत्साह
महाराष्ट्र में बीआरएस के नेताओं का कहना है कि तथ्य यह है कि जब उनकी पार्टी ने राज्य में उम्मीदवारों का समर्थन का फैसला किया, तब न वह सरकार में थी और न ही विपक्ष में उसकी गिनती होती थी। लेकिन, एक तरह से पहले चुनाव और मतदाताओं के मन में इसकी परफॉर्मेंस के प्रति संदेह के बावजूद ऐसे नतीजे आए हैं। वह भविष्य में और भी ज्यादा मेहनत की बात कर रहे हैं।
राज्य के लोग केसीआर के काम से प्रभावित- महाराष्ट्र के बीआरएस नेता
राज्य में पार्टी की स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य ध्यानेश वाकुडकर का कहना है कि इतने कम समय में इतने अच्छे परिणाम की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा, 'प्रदेश के लोग तेलंगाना में केसीआर के काम करने के तरीके से प्रभावित हैं और चाहते हैं कि वहां जैसी योजनाएं यहां भी लागू हों। लाखों किसानों को हम मुफ्त बिजली और पानी दे रहे हैं। केसीआर के विजन को पूरे देश में सराहना हो रही है। जनता राष्ट्रीय पार्टियों की जाति, पंथ और धर्म की राजनीति से परेशान हो चुके हैं।' गौरतलब है कि इसी साल तेलंगाना के सीएम सोलापुर जिले के पवित्र शहर पंढरपुर की भी यात्रा कर चुके हैं।
महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने पर भी बीआरएस में विचार
जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र पंचायत चुनाव के परिणाम से बीआरएस इतनी उत्साहित है कि अगले साल लोकसभा चुनावों और विधानसभा चुनावों में सभी 288 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना पर विचार शुरू कर चुकी है।
महाराष्ट्र पंचायत चुनाव में सत्ताधारी गठबंधन के दबदबे का दावा
महाराष्ट्र में रविवार को 2,359 ग्राम पंचायतों के लिए मतदान हुआ था, जिसमें बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी अजित पवार गुट के महायुती गठबंधन समर्थित उम्मीदवारों का दबदबा दिख रहा है। गठबंधन समर्थित ज्यादातर उम्मीदवारों को ग्राम पंचायतों में सफलता मिली है। जानकारी के मुताबिक इसमें भी भाजपा का शेयर सबसे ज्यादा हैं और फिर अजित पवार गुट के एनसीपी का स्थान है। तीसरे नंबर पर सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना रही है।
राज्य बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता केशव उपाध्याय के दावे के मुताबिक उनकी पार्टी 778 , शिवसेना 301 और अजित पवार वाली एनसीपी 407 ग्राम पंचायतों में जीती है। इस तरह से महायुती का कुल आकड़ा 1,486 ग्राम पंचायत बताया गया है।
वहीं उन्होंने कांग्रेस के 287, एनसीपी (शरद पवार) गुट के 144 और शिवसेना (उद्धव बाल ठाकरे) गुट के 144 उम्मीदवारों के ग्राम पंचायतों में जीत का दावा किया है। हालांकि, कांग्रेस को इन दावों पर आपत्ति है और कहा है कि यह चुनाव पार्टी के निशान पर नहीं हुए हैं और यह भी की एमवीए को 1,312 सीटों पर सफलता मिली है।
लेकिन, जिस तरह से राज्य में सत्ताधारी महायुती गठबंधन और विपक्षी महा विकास अघाड़ी गठबंधन के बीच बीआरएस तीसरी शक्ति बनकर उभरी है, उससे राज्य का चुनावी समीकरण तेजी से बदलता नजर आ रहा है। ऐसे में अगर तेलंगाना में बीआरएस ने तीसरी बार भी जीत दर्ज की तो आने वाले 2024 में लोकसभा और महाराष्ट्र विधानसभा दोनों चुनावों में वोटों का गणित बिगड़ सकता है। हालांकि, यह किसे फायदा पहुंचाएगा और किसकी लुटिया डुबोएगा यह बड़ा सवाल है।












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