महाराष्ट्र-झारखंड में किसकी सरकार, आज होगा फैसला किसका पलड़ा भारी
महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजे आज घोषित होंगे। इसके साथ ही 13 राज्यों में 46 विधानसभा औ 2 लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजें भी घोषित किए जाएंगे, जिसपर हर किसी की नजर है। इन चुनावों के बाद एक्जिट पोल ने संकेत दिए हैं कि झारखंड और महाराष्ट्र दोनों ही प्रदेशों में भारतीय जनता पार्टी को बढ़त मिल सकती है।
महाराष्ट्र में विधानसभा की कुल 288 सीटें हैं, ऐसे में किसी भी दल को सरकार बनाने के लिए 145 का जादुई आंकड़ा हासिल करना होगा। जबकि झारखंड में 81 विधानसभा सीटों में से 41 सीटों पर जीत दर्ज करनी होगी। इन चुनावों के नतीजों का सीधा असर आगामी शीतकालीन सत्र में देखने को मिलेगा।

सोमवार से शीतकालीन सत्र की शुरुआ हो रही है, इसमे मोदी सरकार 16 बिल को पास कराने की तैयारी में है। जिसमे वक्फ कानून में संशोधन भी शामिल है, जिसका विपक्ष लगातार विरोध कर रहा है। इसके साथ ही इस बार शीतकालीन सत्र में मणिपुर हिंसा, महंगाई, जाति जनगणना जैसे मुद्दों पर हंगामा होने की उम्मीद है।
इस साल की शुरुआत में हुए लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को विपक्ष की ओर से कड़ी टक्कर देखने को मिली है। हालांकि हरियाणा में जीत के बाद भाजपा के हौसले बुलंद हैं। हरियाणा में तमाम चुनावी विश्लेषक कांग्रेस की जीत का दावा कर रहे थे, लेकिन नतीजे इससे बिल्कुल विपरीत साबित हुए।
हालांकि कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन को जम्मू कश्मीर में जरूर जीत से कुछ हद तक राहत मिली है, यहां 10 वर्ष के बाद चुनाव हुए और नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन की यहां सरकार बनी।
झारखंड विधानसा चुनाव की बात करें तो यहां दो चरण में मतदान हुआ था, पहले चरण का मतदान 13 नवंबर को तो दूसरे चरण का मतदान 20 नवंबर को हुआ था। 20 नवंबर को ही महाराष्ट्र की सभी 288 सीटों पर भी मतदान हुआ था।
झारखंड में चुनावी जंग में भाजपा की ओर से झामुमो-कांग्रेस-राजद सरकार को हटाने के प्रयास किए जा रहे हैं। 2019 के विधानसभा चुनावों में हेमंत सोरेन की झामुमो ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन में बहुमत हासिल किया था।
हालांकि, इस साल भ्रष्टाचार के आरोपों में सोरेन के इस्तीफे और उसके बाद उनकी गिरफ्तारी, उसके बाद पार्टी के अंदरूनी विवादों ने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में जटिलता की एक परत जोड़ दी है। भाजपा ने इन घटनाक्रमों का लाभ उठाया है, क्षेत्र में अवैध अप्रवासियों के कथित बसाव जैसे मुद्दों पर जोर दिया है।












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