Tamil Nadu: एआईएडीएमके सांसद ओपी रवींद्रनाथ का निर्वाचन रद्द, इस वजह से मद्रास हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला

मद्रास हाई कोर्ट ने एआईएडीएमके सांसद ओपी रवींद्रनाथ के 2019 के लोकसभा चुनाव को रद्द घोषित कर दिया है। ओपी रवींद्रनाथ तमिलनाडु के पूर्व उपमुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम के बेटे हैं। उनके खिलाफ एक वोटर ने नामांकन पत्र में अहम जानकारियां छिपाने का आरोप लगाया था।

ओपी रवींद्रनाथ ने पिछला लोकसभा चुनाव तमिलनाडु की थेनी लोकसभा क्षेत्र से लड़ा था और जीत दर्ज की थी। लेकिन, उनके निर्वाचन को उसी लोकसभा क्षेत्र के एक वोटर ने अदालत में चुनौती दी थी, जिसपर मद्रास हाई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है।

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नामांकन पत्र में संपत्ति की जानकारी छिपाने का आरोप
याचिकाकर्ता के वकील वी अरुण ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया है कि 'चुनाव संबंधी यह याचिका थेनी चुनाव क्षेत्र के एक वोटर ने दायर की थी.....कानूनी प्रावधानों के तहत जो भी उम्मीदवार होता है, उसे अपनी संपत्ति का पूरा ब्योरा देना होता है.....'

मद्रास हाई कोर्ट ने रद्द किया चुनाव
उनके मुताबिक पनीरसेल्वम के बेटे 'रवींद्रनाथ ने अपनी चल और अचल संपत्ति की जानकारी छुपाई......।' मद्रास हाई कोर्ट के जज जस्टिस एसएस सुंदर की अदालत ने इसी आधार पर वह चुनाव रद्द कर दिया है।

रिटर्निंग ऑफसिर ने शिकायतों की जांच नहीं की-वकील
वकील के मुताबिक रवींद्रनाथ ने करीब 45 लाख रुपए की सैलरी और लोन की बात छिपा ली थी। उनके मुताबिक नामांकन पत्रों की जांच के दौरान भी उनके नामांकन में गड़बड़ी को लेकर आपत्ति दर्ज की गई थी। लेकिन, रिटर्निंग ऑफिसर ने उसकी जांच नहीं करवाई।

फैसले पर अमल में एक महीने की रोक
जबकि, नियमों के तहत रिटर्निंग ऑफिसर के लिए ऐसा करना अनिवार्य था। इस वजह से अदालत ने पाया कि नामांकन का स्वीकार करना ही गलत था। इसी आधार पर उस चुनाव को ही अमान्य कर दिया गया है। हालांकि रवींद्रनाथ के वकील की गुजारिश पर अदालत ने फैसले पर अमल करने के लिए एक महीने तक के लिए रोक लगा दी है। इस दौरान, रवींद्रनाथ फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं।

वैसे अभी ईके पलानीस्वामी एआईएडीएमके के प्रमुख हैं। उन्होंने पिछले साल पार्टी के अंतरिम महासचिव बनने के बाद पनीरसेल्वम, रवींद्रनाथ और इनके समर्थक नेताओं को पार्टी से बाहर कर दिया था। अदालत ऐसे फैसले के बाद चुनाव क्षेत्र रिक्त हो जाती है। जहां संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक चुनाव आयोग को 6 महीने के भीतर उपचुनाव करवाना होता है। लेकिन, अभी इसपर अमल अदालत की ओर से रोकी गई है।

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