Madras Eye क्या है ? तमिलनाडु में तेजी से फैल रहा है संक्रमण
Madras Eye infections in Tamil Nadu: तमिलनाडु में बड़ी तादाद में लोग इस समय 'मद्रास आई' की चपेट में हैं। यह आंखों का एक संक्रामक रोग है, जो बरसात के मौसम में बहुत ही तेजी से फैल रहा है। इस बार लौटते मानसून की वजह से प्रदेश में भारी बारिश हुई है और मद्रास आई के संक्रमण फैलने का यह बहुत बड़ा कारण माना जा रहा है। अब तक डेढ़ लाख से ज्यादा लोग इसका उपचार करवा चुके हैं। सबसे अधिक बच्चे इससे पीड़त हो रहे हैं। डॉक्टरों ने इससे बचाव के उपाय बताए हैं और उसका पालन करने पर इस परेशान कर देने वाले रोग से सुरक्षा मिल सकती है।

मद्रास आई क्या है ?
तमिलनाडु के स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को कंजंक्टिवाइटिस (आंख आना) के बढ़ते मामलों को लेकर चेतावनी दी है। यह आंखों का बहुत ही ज्यादा तेजी से फैलने वाला संक्रामक रोग है, जिसे 'मद्रास आई' के नाम से जाना जा रहा है। इस इंफेक्शन में आंखों की कंजंक्टिवा टिशू सूज जाती है। यह टिशू आंखों के सफेद हिस्से और पलकों के अंदर की रेखा पर होते हैं। राज्य भर में इस समय इसके रोजाना 4,000 से 4,500 मामले सामने आ रहे हैं।

लौटते मानसून की वजह से ज्यादा संक्रमण- एक्सपर्ट
तमिलनाडु सरकार के मुताबिक सिर्फ राजधानी चेन्नई के 10 सरकारी नेत्र केंद्रों में ही हर दिन कम से कम 80 से लेकर 100 लोगों में 'मद्रास आई' के संक्रमण का पता चल रहा है। जबकि, सलेम और धर्मापुरी जिलों में केस लोड इससे कहीं ज्यादा है। इस समय तमिलनाडु में उत्तरपूर्वी मानसून की वजह से काफी बारिश हो रही है और चेन्नई में तापमान 22 डिग्री सेल्सियस तक गिर जा रहा है। चेन्नई के डॉक्टर अग्रवाल नेत्र चिकित्सालय के वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डॉक्टर श्रीनिवासन जी राव ने कहा, 'इस साल लंबे समय तक हुई बारिश के चलते शहर में केस लोड और बढ़ गया है। सभी कंजंक्टिवाइटिस के करीब 90% मामले एडेनोवारस की वजह से होते हैं।'

मद्रास आई के लक्षण क्या हैं ?
मद्रास आई के प्रमुख लक्षणों में आंखों में खुजली, लाली, आंसू आना और तरल पदार्थ निकलने जैसी समस्याएं शामिल हैं। डॉक्टर राव ने भी बताया है, 'प्रभावित आंखें लाल, उसमें खुजली, चिड़चिड़ी और किरकिरी होती है और आंसू के समान पानी जैसा स्राव निकलता है। कुछ लोगों में यह तुरंत ही दूसरी आंखों में भी पकड़ लेता है। खासकर बच्चों में यह बहुत ही तेजी से फैल रहा है।'

मद्रास आई संक्रमण कैसे फैलता है और बचाव क्या है ?
यह आम तौर पर एक वायरल इंफेक्शन है, जो एक-दूसरे से फैलता है। यह संक्रमण शारीरिक संपर्क, संक्रमण वाली चीजों और सतहों के संपर्क में आने से होता है। संक्रमित व्यक्ति के आंखों से निकले तरल पदार्थ के संपर्क में आने से भी यह रोग होता है। इसलिए जरूरी है कि हाथों को लगातार धोते रहें। हाथों से आंखों को छूने से बचें। संक्रमित व्यक्तियों को अलग रखें। तौलिए और बिस्तर साझा ना करें। डॉक्टर राव ने कहा है कि वह रोजाना ऐसे 500 मरीजों को देख रहे हैं। उनके मुताबिक, 'हर साल मानसून के मौसम में कंजंक्टिवाइटिस के मामलों में हल्की बढ़ोतरी देखी जाती है।'

1.5 लाख से ज्यादा लोगों का इलाज हो चुका है
तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री एम सुब्रमण्यम ने लोगों से अपील की है कि यदि वह संक्रमित होते हैं तो तत्काल खुद को अलग कर लें और किसी के संपर्क में ना आएं। स्वास्थ्य मंत्री ने सोमवार को बताया था कि 'जबसे उत्तरपूर्वी मानसून शुरू हुआ है, तमिलनाडु में करीब 1.5 लाख लोगों के कंजंक्टिवाइटिस का इलाज हो चुका है।' डॉक्टर राव ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी आंखें छूता है तो वह वायरस या बैक्टीरिया को दूसरे लोगों तक पहुंचा सकता है।












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