MP News: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हलाली डेम में लुप्तप्राय प्रजाति के 5 गिद्धों को किया मुक्त
मध्य प्रदेश ने पांच लुप्तप्राय गिद्धों - चार भारतीय गिद्ध और एक सिनेरियस गिद्ध - को GPS-GSM ट्रांसमीटर के साथ जारी करके वन्यजीव संरक्षण में प्रगति की है। राज्य, WWF-India और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी द्वारा समर्थित, टेलीमेट्री डेटा के माध्यम से गिद्ध निगरानी और वेंटिलेशन में अग्रणी है ताकि दीर्घकालिक संरक्षण का मार्गदर्शन किया जा सके।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को हलाली डेम जल क्षेत्र में लुप्तप्राय प्रजाति के 5 गिद्धों को उनके प्राकृतिक आवास में मुक्त किया। इनमें चार भारतीय गिद्ध (जिप्स इंडिकस) और एक सिनेरियस गिद्ध (एजिपीयस मोनाकस) शामिल हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पारिस्थितिकी तंत्र में सहयोगी पशु-पक्षियों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश बाघ, तेंदुआ और अन्य वन्य प्राणियों की सर्वाधिक संख्या वाला राज्य होने के साथ-साथ गिद्ध संरक्षण में भी देश में अग्रणी है। प्रदेश में अन्य राज्यों की तुलना में अधिक संख्या में गिद्ध पाए जाते हैं, जिनमें प्रवासी गिद्ध भी शामिल हैं। गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण अंग हैं और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। मुख्यमंत्री ने वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को संरक्षण प्रयासों के लिए बधाई दी।
कार्यक्रम में बताया गया कि उच्च परिशुद्धता वाले जीपीएस-जीएसएम उपग्रह ट्रांसमीटर से सुसज्जित इन पांच दुर्लभ गिद्धों को भोपाल स्थित गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र में अनुकूलन और अवलोकन अवधि के बाद मुक्त किया गया। टैगिंग प्रक्रिया संबंधित संस्थाओं और वन विभाग के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में वाइल्डलाइफ एसओएस के वन्यजीव चिकित्सकों की देखरेख में संपन्न हुई। यह पहल मध्य भारत के विकसित हो रहे ‘गिद्ध परिदृश्य’ को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय गिद्ध सामान्यतः सीमित क्षेत्र में रहते हैं, जबकि सिनेरियस गिद्ध मध्य एशियाई फ्लाई-वे के अंतर्गत लंबी दूरी का प्रवास करते हैं, जो 30 से अधिक देशों तक फैला एक प्रमुख प्रवासी पक्षी गलियारा है।
गिद्ध संरक्षण के लिए टेलीमेट्री कार्यक्रम
मध्यप्रदेश वन विभाग ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के सहयोग से गिद्धों की निगरानी के लिए उपग्रह टेलीमेट्री कार्यक्रम शुरू किया है। टेलीमेट्री से प्राप्त आंकड़ों के माध्यम से गिद्धों के आवागमन, भू-दृश्य उपयोग और मानवजनित दबावों के प्रति उनकी प्रतिक्रिया का अध्ययन किया जा रहा है।
इससे प्रमुख पड़ाव स्थलों और भोजन क्षेत्रों की पहचान, संरक्षित एवं मानव-प्रधान क्षेत्रों में उनकी पारिस्थितिकी को समझने तथा बिजली के झटके, विषाक्तता और आवास क्षरण जैसे जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करने में सहायता मिल रही है। वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर प्रभावी संरक्षण रणनीतियां तैयार की जा रही हैं, जिससे लुप्तप्राय प्रजातियों का दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
मध्यप्रदेश गिद्धों का प्रमुख आवास
मध्यप्रदेश लंबे समय से देश में गिद्धों की समृद्ध आबादी का केंद्र रहा है। प्रदेश में भारतीय गिद्ध, सिनेरियस गिद्ध, मिस्र गिद्ध और हिमालयन ग्रिफॉन जैसी प्रजातियां पाई जाती हैं। हाल ही में वल्चर एस्टिमेशन-2026 के पहले दिन दक्षिण पन्ना वन प्रभाग में एक हजार से अधिक गिद्धों का अवलोकन किया गया, जो हाल के वर्षों में सर्वाधिक संख्या मानी जा रही है।
भारतीय परंपरा में गिद्धों को शक्ति और सम्मान का प्रतीक माना गया है। रामायण में जटायु और सम्पाती की कथा इसका उदाहरण है। पर्यावरण में गिद्ध प्रकृति के सफाईकर्मी के रूप में कार्य करते हैं और बीमारियों के प्रसार को रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राज्य सरकार के संरक्षण प्रयासों से गिद्धों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है, जो पर्यावरणीय स्वास्थ्य के लिए सकारात्मक संकेत है।












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