मध्य प्रदेश में फिर सियासी संकट, बीजेपी ऑपरेशन लोटस की तैयारी में

भोपाल। मध्य प्रदेश में एक बार फिर मुख्यमंत्री कमलनाथ की सरकार खतरे में दिख रही है। इस बार 17 विधायक बागी बताए जा रहे हैं। बागी तेवर अपना रहे सभी विधायक कांग्रेसी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के हैं। खबर है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया बीजेपी के कुछ बड़े नेताओं के संपर्क में हैं। सिंधिया फिलहाल दिल्ली में हैं। उधर 17,18 कांग्रेसी विधायकों के बगावती तेवर अपनाने के बाद बीजेपी ने अपना प्लान तैयार करना शुरू कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक कल बीजेपी ने अपने सभी विधायकों को भोपाल बुला लिया है। वहीं इस बीच, भोपाल में सीएम कमलनाथ और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजिय सिंह की मुलाकात हो रही है। बताया जा रहा है कि इस बैठक में कई कांग्रेसी नेता भी मौजूद हैं।

 कमलनाथ कर रहे अहम बैठक

कमलनाथ कर रहे अहम बैठक

भोपाल में सीएम कमलनाथ और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजिय सिंह की मुलाकात हो रही है। बताया जा रहा है कि इस बैठक में कई कांग्रेसी नेता भी मौजूद हैं। इससे पहले कमलनाथ ने आज दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी। उधर बागी हुए विधायकों में अभी तक राजवर्धन सिंह, बंकिम सिलावत, गिरिराज, रक्षा, जसवंत जाटव, सुरेश धाकड़, जजपाल सिंह, बृजेंद्र यादव और पुरुषोत्तम पराशर बेंगलुरु पहुंचे हैं। इनके अलावा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर भी जा सकते हैं।

ऑपरेशन लोटस की तैयारी में बीजेपी

ऑपरेशन लोटस की तैयारी में बीजेपी

रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी इस मौके का फायदा उठाने को तैयार है। बीजेपी विधानसभा सत्र के पहले दिन अविश्वास प्रस्ताव ला सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कमलनाथ सरकार ऑपरेशन लोटस के शिकार होते दिख रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सिंधिया ने हाल ही में बीजेपी नेताओं के साथ मुलाकात की है। साथ ही उन्हें बीजेपी की ओर से राज्यसभा भेजने की तैयारी की जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सिंधिया इस वक्त तीखे तेवर में हैं और अगर सरकार पर संकट आने की स्थिति में उन्हें सीएम पद की पेशकश की जाती है, तो भी वे मानने वाले नहीं हैं।

दिल्ली पहुंचे सिंधिया

बता दें कि, सिंधिया अपनी ही सरकार के खिलाफ इतने मुखर हो गए थे कि उन्होंने घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा न करने पर सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने की चेतावनी दे डाली थी। उस वक्त कमलनाथ ने भी उन्हें दो टूक जवाब दिया था कि उन्हें उतरना है, तो उतर जाएं। जिसके बाद पार्टी के नेताओं में उनके बयान को लेकर काफी आरोप-प्रत्यारोप लगे थे। पिछले दिनों ज्योतिरादित्य सिंधिया के कट्टर समर्थक और प्रदेश सरकार के श्रम मंत्री ने इस बात के संकेत भी दे दिए थे। उन्होंने कहा था कि अगर सिंधिया का अनादर या उपेक्षा की हुई तो प्रदेश सरकार का असली संकट शुरू होगा। अभी सिंधिया की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है।

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