मध्‍य प्रदेश: बीजेपी से 0.1 प्रतिशत वोट कम मिलने के बाद भी किंग बन गई कांग्रेस

नई दिल्‍ली। मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 का परिणाम कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए दिल थामने वाला रहा। 11 दिसंबर (मंगलवार) को सुबह 8 बजे से जो लुका-छिपी का खेल शुरू हुआ वह घंटों तक चलता रहा। अंत तक सस्‍पेंस बना रहा, आखिरकार स्‍लॉग ओवर्स में जाकर कांग्रेस ने बीजेपी पर 5 सीटों की बढ़त बनाई। कांटे की इस टक्‍कर के बाद भाजपा को 230 विधानसभा सीटों में से 109 सीटों पर जीत प्राप्‍त हुई और कांग्रेस 114 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। बहुजन समाजवादी पार्टी को 2 सीटों पर जीत मिली, जबकि समाजवादी पार्टी को एक और अन्‍य 4 सीटों पर जीतने में सफल रहे। मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव की सबसे ज्‍यादा चौंकाने वाली बात रही कांग्रेस और भाजपा का वोट प्रतिशत। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि एमपी में कांग्रेस को बीजेपी से कम वोट मिले हैं, इसके बावजूद वह बीजेपी को पछाड़ने में सफल रही।

एमपी में वोट प्रतिशत के आंकड़े देखकर हिल गए राजनीति के पंडित

एमपी में वोट प्रतिशत के आंकड़े देखकर हिल गए राजनीति के पंडित

चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जारी आंकड़ों के मुताबिक, मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस को 40.9 और भाजपा को 41.0 प्रतिशत वोट प्राप्‍त हुए। कांग्रेस को भाजपा की तुलना में 0.1 प्रतिशत वोट कम मिले, लेकिन वह भाजपा से 5 सीटें ज्‍यादा जीतने में सफल रही। हालांकि, एमपी में 2013 विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार कांग्रेस का वोट प्रतिशत बढ़ा है। पिछले चुनाव में कांग्रेस को एमपी में 36.38 प्रतिशत वोट मिला था, जो इस बार बढ़कर 40.9 प्रतिशत हो गया, लेकिन भाजपा से तुलना करें तो यह महज 0.1 प्रतिशत ही ज्‍यादा है। मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान और छत्‍तीसगढ़ के वोट प्रतिशत को देखा जाए तो केवल छत्‍तीसगढ़ ही एक ऐसा प्रदेश है, जहां पर कांग्रेस ने भाजपा की तुलना 10 प्रतिशत से ज्‍यादा वोट हासिल किया। राजस्‍थान में भी भाजपा और कांग्रेस के वोट प्रतिशत में ज्‍यादा अंतर नहीं रहा। राजस्‍थान में कांग्रेस को 99 सीटों पर जीत प्राप्‍त हुई, जबकि भाजपा को 73 सीटें मिलीं। यहां के वोट प्रतिशत पर गौर करें तो भाजपा को 38.8 प्रतिशत मत प्राप्‍त हुए, जबकि कांग्रेस को 39.3 प्रतिशत। मतलब कांग्रेस को 1 प्रतिशत से भी कम वोट भाजपा से ज्‍यादा मिला, लेकिन वह 26 सीटें ज्‍यादा जीतने में सफल रही।

मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान में बीजेपी की हार

मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान में बीजेपी की हार

कांग्रेस ने मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान में इस बार जिस प्रकार से जीत हासिल की है, दरअसल वह उसकी सबसे बड़ी कमजोरी रही है। कांग्रेस के साथ लंबे समय से यह समस्‍या रही कि वह वोट प्रतिशत को सीटों में परिवर्तित नहीं कर पाती है। मध्‍य प्रदेश की बात करें तो 2008 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 38 फीसदी वोट शेयर के साथ 143 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं, कांग्रेस 32 प्रतिशत वोट प्राप्‍त करने के बाद भी सिर्फ 71 सीटें ही पाई। इसी प्रकार से 2013 में मध्‍य प्रदेश में बीजेपी ने 45 फीसदी वोट शेयर के साथ 165 सीटों पर कब्जा किया तो कांग्रेस 36 प्रतिशत वोटों के साथ सिर्फ 58 सीटें जीत सकी। अब 2014 लोकसभा चुनाव में राजस्‍थान के नतीजों पर भी गौर लीजिए। 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 55.6 प्रतिशत वोट शेयर के साथ राजस्थान की सभी 25 लोकसभा सीटों भगवा फहरा दिया, जबकि कांग्रेस पार्टी 30.7 प्रतिशत वोट पाने के बाद भी एक सीट पर भी जीत दर्ज नहीं कर पाई थी। मध्‍य प्रदेश की बात करें तो 2008 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 38 फीसदी वोट शेयर के साथ 143 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं, कांग्रेस 32 प्रतिशत वोट प्राप्‍त करने के बाद भी सिर्फ 71 सीटें ही पाई। इसी प्रकार से 2013 में बीजेपी ने 45 फीसदी वोट शेयर के साथ 165 सीटों पर कब्जा किया तो कांग्रेस 36 प्रतिशत वोटों के साथ सिर्फ 58 सीटें जीत सकी।

राजस्‍थान में भी कांग्रेस ने पाई पुरानी कमजोरी पर जीत

राजस्‍थान में भी कांग्रेस ने पाई पुरानी कमजोरी पर जीत

अब 2014 लोकसभा चुनाव में राजस्‍थान के नतीजों पर भी गौर लीजिए।
2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 55.6 प्रतिशत वोट शेयर के साथ राजस्थान की सभी 25 लोकसभा सीटों भगवा फहरा दिया, जबकि कांग्रेस पार्टी 30.7 प्रतिशत वोट पाने के बाद भी एक सीट पर भी जीत दर्ज नहीं कर पाई थी, लेकिन 2018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने महज 0.5 प्रतिशत वोट ज्‍यादा पाकर भाजपा से 26 सीटें ज्‍यादा जीत लीं।

2014 लोकसभा चुनाव के आंकड़े देखकर समझ जाएंगे, कितनी गंभीर थी कांग्रेस के साथ समस्‍या

2014 लोकसभा चुनाव के आंकड़े देखकर समझ जाएंगे, कितनी गंभीर थी कांग्रेस के साथ समस्‍या

पुराने आंकड़ों पर गौर करने से पता चलता है कि कांग्रेस को खराब स्‍ट्राइक रेट की वजह से कितना नुकसान उठाना पड़ रहा था। 2014 लोकसभा चुनाव का ही उदाहरण लेते हैं। इस चुनाव में कांग्रेस को 19.3 प्रतिशत वोट शेयर के साथ सिर्फ 44 सीटों पर जीत प्राप्‍त हुई। अब 2009 में बीजेपी के प्रदर्शन पर नजर डालते हैं। 2009 लोकसभा चुनाव बीजेपी ने लालकृष्‍ण आडवाणी के नेतृत्‍व में लड़ा था और पार्टी को कांग्रेस के हाथों सत्‍ता गंवानी पड़ी थी, लेकिन तब भी बीजेपी का स्‍ट्राइक रेट काफी बेहतर था। बीजेपी को 2009 में 18.5 प्रतिशत वोट मिले थे और वह 116 सीटें में सफल रही थी। मतलब 2014 में कांग्रेस को बीजेपी की तुलना में वोट ज्‍यादा पर सीटें 72 कम प्राप्‍त हुईं। अब मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान कांग्रेस ने जिस प्रकार से वोट प्रतिशत की तुलना में ज्‍यादा सीटें हासिल की हैं, उससे साफ है कि 2019 में भाजपा के लिए मुश्किल बढ़ने वाली है।

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