लोकसभा चुनाव 2019: क्या है अमेठी के नाम राहुल का पैगाम

नई दिल्ली। मतदान से तीन दिन पहले राहुल गांधी ने अमेठी की जनता के नाम खत लिखा है। किसी भाषण, रैली, रोड शो के बजाए राहुल गांधी ने मीडिया के जरिए इस चिट्ठी को माध्यम बनाकर संवाद किया है। ट्विटर और सोशल मीडिया भी उनकी चिट्ठी को मतदाताओं तक पहुंचा रहा है और एक ख़बर के तौर पर भी यह चिट्ठी चर्चा में है। सवाल ये है कि राहुल को चिट्ठी लिखने की जरूरत क्यों पड़ी? वे चिट्ठी के जरिए क्या कहना चाहते हैं?

लोकसभा चुनाव 2019: क्या है अमेठी के नाम राहुल का पैगाम

राहुल गांधी पर सबसे बड़ा आरोप यही है कि वे अमेठी के मतदाताओं को समय नहीं देते हैं। दूसरा बड़ा आरोप है कि लम्बे समय से सांसद रहने पर भी वे अमेठी का विकास नहीं कर पाए हैं। राहुल के ख़िलाफ़ यह बात भी जाती है जब उनके राजनीतिक विरोधी और चुनाव मैदान में बीजेपी उम्मीदवार स्मृति ईरानी कैबिनेट मंत्री बनकर अमेठी में होती हैं। केंद्र की सरकार से अमेठी को अधिक से अधिक फायदा दिलाने का भरोसा लेकर वह क्षेत्र में मौजूद होती हैं।

कांग्रेस सरकार आएगी अमेठी में विकास लाएगी!

कांग्रेस सरकार आएगी अमेठी में विकास लाएगी!

राहुल गांधी ने चिट्ठी के जरिए वास्तव में अमेठी की जनता में एक उम्मीद जगाने की कोशिश की है। राहुल ने लिखा है, "अमेठी की जनता से मेरा वचन है कि केंद्र में कांग्रेस सरकार बनते ही भाजपा द्वारा अमेठी के लिए रोके गये सारे काम तेज गति से शुरू होंगे। 6 मई को भारी संख्या में वोट देकर अपने इस परिवार के सदस्य को एक बार फिर मजबूती दीजिए।" राहुल ने यह जताने की कोशिश की है कि अमेठी में विकास का कार्य रुका पड़ा है और इसके लिए वर्तमान मोदी सरकार जिम्मेदार है। वे यह भी दावा करते दिख रहे हैं कि केंद्र में अगली सरकार कांग्रेस की ही आने वाली है। इसके साथ ही वे उन सारे कामों को तेज गति से पूरा करने का दावा करते हैं जो मोदी सरकार के कारण अटके पड़े हैं। एक तरह से वही दांव राहुल ने चला है जो स्मृति ईरानी चल रही हैं। केंद्र सरकार पास होने का दांव। अमेठी की जनता के पास चुनौती ये है कि वे राहुल के दावे पर यकीन करें या स्मृति ईरानी के, क्योंकि दोनों ही अपनी-अपनी सरकार बनने और उसका फायदा अमेठी की जनता को दिलाने की बात कह रहे हैं।

राहुल का भावनात्मक दांव

राहुल का भावनात्मक दांव

राहुल ने अमेठी की जनता के सामने भावनात्मक दांव भी खेला है। वे खुद को अमेठी परिवार का सदस्य बताते हैं, उनसे भावनात्मक रूप से जुड़े होने का भरोसा दिलाते हैं और कहते हैं कि पूरे देश को उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक जोड़ने का जो वे काम कर रहे हैं उसके पीछे अमेठी परिवार की ताकत है। राहुल गांधी लम्बे समय से अमेठी से जुड़े रहे हैं मगर उनकी भावनात्मक अपील क्या मतदाताओँ को स्मृति ईरानी के आकर्षण से रोक पाएगी, यह जानने की उत्सुकता सबमें रहेगी।

अमेठी पर सबकी नज़र इसलिए भी है क्योंकि राहुल गांधी ने अमेठी के साथ-साथ केरल की वायनाड की सीट से भी चुनाव लड़ा है। इसे स्मृति ईरानी ने ‘अमेठी छोड़कर भागना' बताया है। इस पर भी राहुल और कांग्रेस को सफाई देनी पड़ी है। मगर, इसके लिए राहुल गांधी ने वायनाड का ज़िक्र नहीं किया है। बल्कि वे अमेठी परिवार का खुद को सदस्य बताते हुए उसका अटूट हिस्सा बता रहे हैं और स्मृति के आरोपों का अलग तरीके से जवाब दे रहे हैं।

रूठे मतदाताओं को मनाने की आखिरी कोशिश

बीते दिनों चुनाव प्रचार के दौरान स्मृति ईरानी पर प्रियंका गांधी ने मतदाताओं के बीच जूते-चप्पल बांटने का आरोप लगाया था। प्रियंका ने कहा था कि अमेठी के लोग स्वाभिमानी होते हैं और वे इस तरह से वोट खरीदने की कोशिश का विरोध करते हैं। बीजेपी पर धनबल के इस्तेमाल का भी उन्होंने आरोप लगाया था। इन सब के बावजूद राहुल गांधी अमेठी के लिए बहुत ज्यादा वक्त नहीं निकाल पाए। यह सबसे बड़ी वजह हो सकती है कि उन्हें अमेठी की जनता के नाम पर खत लिखना पड़ा। राहुल गांधी ने अमेठी की जनता के नाम पर जो खुला खत लिखा है उसमें यह सफाई भी दी है कि अमेठी की जनता के लिए समय नहीं दे पाना उनकी देश और समाज के लिए व्यस्तता की वजह से है। देश को जोड़ने अमेमेंठी की जनता का बड़ा योगदान भी उन्होंने बताया है। किन्तु, वास्तव में चिट्ठी लिखने की वजह क्या रही? मतदान से पहले राहुल की यह आखिरी अपील कही जा सकती है। अपनी ओर से मतदाताओं को समझाने-बुझाने या रिझाने के लिए उनका आखिरी दांव कहा जा सकता है।

पढ़ें, अमेठी लोकसभा सीट का पूरा प्रोफाइल

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