भाजपा के प्राइम टाइम प्रवक्ता संबित पात्रा का आखिर में क्या हुआ?

पुरी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के फायरब्रांड नेता और प्राइम टाइम पर हर न्यूज चैनल पर पार्टी का पक्ष रखने वाले संबित पात्रा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुनामी लहर में पुरी से अपनी सीट नहीं बचा सके। दिलचस्‍प बात है कि पात्रा जिस सीट से चुनाव हारे हैं, वह उनका ही शहर है। उन्‍हें अपने शहर के लोगों ने ही नकार दिया है। गुरुवार को आए लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Elections 2019) के नतीजों में बीजेपी को प्रचंड बहुमत हासिल हुआ। पार्टी ने अपने ही दम पर करीब 300 सीटें हासिल कर लीं तो गठबंधन को 350 सीटें मिली हैं।

जनता को पिनाकी मिश्रा पर भरोसा

जनता को पिनाकी मिश्रा पर भरोसा

बीजेपी के संबित पात्रा को मुख्‍यमंत्री नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल (बीजेडी) के नेता पिनाकी मिश्रा ने पटखनी दी है। पात्रा को पिनाकी मिश्रा ने 11713 वोटों से मात दी। पिनाकी मिश्रा को कुल 53,8321 वोट मिले तो वहीं पात्रा को 52,6607 वोट मिले। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर दिए गए आंकड़ों के मुताबिक जहां पिनाकी का वोट शेयर 47.4 प्रतिशत रहा जो पात्रा का वोट शेयर 46.37 प्रतिशत था। पुरी सीट पर गुरुवार को कांटे की टक्‍कर जारी थी। लेकिन जनता ने पात्रा की जगह पिनाकी मिश्रा पर भरोसा जताया और उन्‍हें जीत हासिल करने में मदद की।

धुंआधार प्रचार भी हुआ फेल

धुंआधार प्रचार भी हुआ फेल

पात्रा की हार के साथ ही उनके धुंआधार चुनाव प्रचार को जनता ने नकार दिया। पात्रा ने पुरी लोकसभा क्षेत्र में जमकर प्रचार-प्रसार किया और उनके प्रचार-प्रसार पर सबकी नजरें गईं। पात्रा ने चुनाव प्रचार के दौरान कभी एक गरीब परिवार के लोगों को अपने हाथ से भोजन कराया तो कभी धोती-कुर्ता के साथ ओड़िया ‘गमछा' धारण करके और सिर पर चंदन का टीका लगाकर अलग ही अंदाज में नजर आए। सोशल मीडिया पर उनके प्रचार को काफी तालियां मिलीं और उस पर काफी चर्चा हुई लेकिन उन्‍हें इसके बाद भी वोट नहीं मिले।

पिनाकी से शिकायत लेकिन उन्‍हें ही मिले वोट

पिनाकी से शिकायत लेकिन उन्‍हें ही मिले वोट

बीजेपी की नजर ओडिशा में लोकसभा के अलावा विधानसभा चुनाव में भी पुरी के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करने पर थी लेकिन भगवान जगन्नाथ की भूमि से संबित पात्रा को उम्मीदवार बनाने का बीजेपी का यह प्रयोग फेल साबित हुआ। पिनाकी मिश्रा पिछले 10 वर्षों से यहां से सांसद हैं। साल 1996 में पिनाकी यहां पर कांग्रेस के टिकट से जीते थे। बताया जा रहा था कि इस बार पुरी के जनता पिनाकी के काम से खुश नहीं थी। कई लोगों ने उन पर आरोप लगाया था कि वह लोगों से नहीं मिलते हैं। लेकिन सीएम नवीन पटनायक की लोकप्रियता के आगे जनता पिनाकी के साथ अपनी शिकायतों को भूल गई।

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