तेजप्रताप के साथी नेता अब टिकट के लिए मायावती की शरण में!
पटना। लोकसभा टिकट की आस में कई नेता तेजप्रताप यादव के इर्द-गिर्द जमा हैं। राजद के मौजूदा हालात को भांप कर अब ऐसे नेता ठिकाना बदलने की सोच रहे हैं। पूर्व बाहुबली विधायक राजन तिवारी अभी तक तेज प्रताप के साथ नजर आ रहे थे। लेकिन अब चर्चा है कि वे पश्चिम चम्पारण सीट पर चुनाव लड़ने के लिए मायावती की पार्टी में जाने वाले हैं। उत्तर प्रदेश से सटे इलाकों में मायावती का प्रभाव है। बसपा बिहार में सभी 40 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। उसके पास दमदार उम्मीदवारों का टोटा है। राजन तिवारी जैसे दबंग नेता की उसको भी जरूरत है। रालोसपा के उम्मीदवार की घोषणा के बाद राजन तिवारी की महागठबंधन से उम्मीदें खत्म हो गयीं। अब निर्दलीय से बेहतर किसी दल के सिंबल पर लड़ने की सोच रहे हैं।

18 अप्रैल को मायावती की सभा
18 अप्रैल को पश्चिम चम्पारण के रामगढ़वा में मायावती की सभा होने वाली है। कहा जा रहा है कि राजन तिवारी भी इस सभा में शामिल होंगे और बसपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। खबरों के मुताबिक वे 20 अप्रैल को बसपा उम्मीदवार के रूप में पश्चिम चम्पारण से पर्चा दाखिल कर सकते हैं। वे पहले ही संकेत दे चुके हैं कि अगर बिहार के महागठबंधन से उन्हें टिकट नहीं दिया जाता है तो वे उत्तर प्रदेश के गठबंधन का हिस्सा बन कर चुनाव मैदान में उतरेंगे। पश्चिम चम्पारण में ब्राह्मण बिरादरी की भी अच्छी तादात है। अगर बसपा के दलित वोट मिल जाएं तो राजन तिवारी की चुनौती मजबूत हो जाएगी।

राजन तिवारी की बाहुबली छवि
राजन तिवारी आपराधिक मामलों को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं। पहले यूपी के डॉन श्रीप्रकाश शुक्ल से जुड़े रहे। 1996 में इन पर गोरखपुर के रहने वाले वाले पूर्वविधायक वीरेन्द्र प्रताप शाही पर हमले का आरोप लगा था। इस हमले में शाही के गनर की मौत हो गयी थी। 2014 में कोर्ट ने इन्हें इस केस से बरी कर दिया था। फिर राजन तिवारी बिहार में सक्रिय हुए। 1998 में वे बिहार के पूर्व मंत्री ब्रृजबिहारी प्रसाद हत्याकांड में आरोपी बने थे। 2009 में कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनायी थी। लेकिन 2014 में पटना हाईकोर्ट ने उन्हें सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। 2000 में वे पश्चिम चम्पारण के गोविंदगंज से निर्दलीय विधायक चुने गये थे। 2004 में उन्होंने बेतिया से निर्दलीय लोकसभा का चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गये थे। इसके बाद उन्होंने राजनीति में फिर पांव जमाने की कोशिश की लेकिन अभी तक कामयाबी नहीं मिली है।

2016 में मायावती से किया था संपर्क
2016 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी राजन तिवारी ने मायावती से सम्पर्क किया था। इसके बाद वे राजद में आये। उन्हें उम्मीद थी कि 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें राजद का टिकट मिलेगा। राजद के कार्यक्रमों वे बढ़ चढ़ कर हिस्सा भी ले रहे थे। लेकिन महागठबंधन में सीट बंटवारे के उलझे गणित ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। फिर वे तेजप्रताप के साथ हो लिये। उन्हें लगता था कि तेज प्रताप के प्रेसर पोलिटिक्स के बाद शायद कुशवाहा उन्हें अपना उम्मीदवार बना लें। ब्राह्मण प्रत्याशी देने की बात चल भी रही थी। लेकिन आखिर में कुशवाहा ने अपनी पसंद के नेता को टिकट दे दिया। अब उनके बसपा में जाने की चर्चा है।












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