मध्यप्रदेश: मालवा-निमाड़ में बढ़ी लोकसभा चुनाव की गर्मी

भोपाल। मध्यप्रदेश के सबसे गर्म इलाकों में माने जाने वाले निमाड़ और उससे सटे मालवा में गर्मी के साथ ही चुनावी माहौल भी गर्म होता जा रहा है। महाराष्ट्र की सीमा से सटे खंडवा-बुरहानपुर लोकसभा सीट में भारतीय जनता पार्टी को आंतरिक गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। यहां से भाजपा ने पूर्व प्रदेशाध्यक्ष और वर्तमान सांसद नंदकुमार सिंह चौहान को टिकट दिया है। जिस कारण पार्टी की कलह खुलकर दिखाई देने लगी है। पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस के विधानसभा चुनाव हारने पर उन्होंने कहा था कि यहां से भाजपा नहीं हारी, बल्कि अपने ही लोगों की गद्दारी जीती है। 4 महीनों से अर्चना चिटनिस और उनके साथी बदला लेने के अंदाज में बयानबाजी कर रहे है। इस इलाके से कांग्रेस ने अभी तक अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है, लेकिन भाजपा के भीतरी विवादों से उसे चुनाव में लाभ मिलने की आशा है। इसी के साथ नंदकुमार सिंह चौहान के समर्थकों को आशा है कि कांग्रेस के टिकट की घोषणा होते ही कांग्रेस में चल रहे मतभेद उभर कर सामने आ जाएंगे और कांग्रेस का एक बड़ा वर्ग नंदकुमार सिंह चौहान के समर्थन में काम करने लगेगा। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों को जितनी आशा अपने कार्यकर्ताओं से है, उससे ज्यादा प्रतिपक्षी उम्मीदवार के साथ भितरीघात करने वालों से है।

खंडवा-बुरहानपुर से भाजपा ने नंदकुमार सिंह चौहान को दिया टिकट

खंडवा-बुरहानपुर से भाजपा ने नंदकुमार सिंह चौहान को दिया टिकट

खंडवा-बुरहानपुर से ही लगा खरगोन-बड़वानी का इलाका है, जिस पर वर्तमान में भाजपा का कब्जा है। शुरू में यह पूरा इलाका कांग्रेस का गढ़ था, लेकिन कांग्रेस के सांसदों द्वारा यहां के विकास के लिए कोई खास प्रयास नहीं किया गया। कांग्रेस ने यहां से 52 साल पहले शशि भूषण वाजपेयी को टिकट दिया था, जो थे तो दिल्ली के और इलाके में रेल लाने के नाम पर चुनाव जीत गए थे। चुनाव जीतने के बाद उन्होंने कभी खरगोन-बड़वानी की तरफ ध्यान नहीं दिया। रेल तो इस इलाके में अब तक नहीं आ पाई। अब यह सीट अजजा के लिए सुरक्षित है और जयस ने यहां के लिए दावेदारी की है।

जयस के प्रमुख नेता हीरालाल अलावा मनावर-कुक्षी के हैं, जो धार-महू संसदीय क्षेत्र में आता है। वर्तमान में यहां से भाजपा की सावित्री ठाकुर प्रतिनिधि हैं। कभी यह इलाका कांग्रेस के गजेन्द्र सिंह कालूखेड़ी के कब्जे में हुआ करता था। सावित्री ठाकुर धार जिले की है और धार संसदीय क्षेत्र में अब इंदौर से हटाकर महू को धार में जोड़ा गया है। महू के लोगों का नाता धार के बजाय इंदौर से ही ज्यादा है और उनकी दिलचस्पी धार सीट की बजाय इंदौर में अधिक होती है। ऐसी स्थिति में यहां के उम्मीदवार को महू के मतदाताओं के बजाय स्थानीय मतदाताओं पर ही ज्यादा निर्भर रहना होगा।

इंदौर संसदीय सीट से कौन?

इंदौर संसदीय सीट से कौन?

इंदौर संसदीय सीट के लिए यह रिपोर्ट लिखी जाने तक उम्मीदवारों का फैसला नहीं हुआ। भाजपा की सुमित्रा महाजन की पुरानी सीट होने के बावजूद उन्हें टिकट मिलने में संशय बताया जाता है। 75 की उम्र पार करने वालों में सुमित्रा महाजन भी हैं। दो महीने पहले उन्हें भाजपा संगठन के लोगों ने टिकट मिलने का इशारा किया था, जिसके बाद वे चुनाव प्रचार में जुट गई थी, लेकिन अभी तक उनके नाम की घोषणा नहीं होने से नए-नए दावे सामने आ रहे है। इंदौर की महापौर मालिनी गौड़ का नाम प्रमुखता से हैं।

इंदौर से लगे देवास-शाजापुर संसदीय क्षेत्र में भी भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को उम्मीदवारों के नाम की घोषणा का इंतजार है। भारतीय जनता पार्टी ने इस बार यहां बड़े नामों से किनारा कर लिया है और अनिल फिरोजिया के नाम की घोषणा कर दी है। इससे न केवल प्रतिपक्षी कांग्रेस में, बल्कि भाजपा में भी विसमय की लहर फैल गई। भाजपा के दिग्गज नेता थावरचंद गेहलोत यहां के प्रतिनिधि रह चुके हैं। जाहिर है कि अब थावरचंद गेहलोत का राजनैतिक जीवन उत्तरार्ध में बचा है।

रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र को लेकर क्या है बीजेपी का प्लान

रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र को लेकर क्या है बीजेपी का प्लान

रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र में इस बार भाजपा कोई खतरा लेना नहीं चाहती। भाजपा के दिलीप सिंह भूरिया यहां से सांसद थे। उनके निधन के बाद भाजपा यह सीट नहीं बचा पाई। अब कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया फिर से चुनाव जीतने की तैयारी कर रहे है। भाजपा के सामने समस्या यह है कि वह किसे अपना उम्मीदवार बनाए। भाजपा की कोशिश है कि कोई नया चेहरा उसे मिल जाए, तो राह आसान हो।

भारतीय जनता पार्टी के लिए मंदसौर सीट को बचाए रखना चुनौतीपूर्ण कार्य होगा, क्योंकि किसानों पर चली गोलियों के कारण लोगों में निराशा है। कांग्रेस इस मुद्दे को पूरे जोर-शोर से उठा रही है और किसानों को याद दिला रही है कि भाजपा की सरकार ने ही निर्दोष आंदोलनकारी किसानों पर गोलियां चलवाई थी। कांग्रेस ने अभी तक यहां से भी उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है, लेकिन यह माना जा रहा है कि पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन ही यहां से कांग्रेस के टिकट पर लड़ेंगी।

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