Lok Sabha Elections 2019: 'देश की अर्थव्यवस्था की बेहतरी के लिए भाजपा की जीत जरूरी'

नई दिल्ली। आगामी लोकसभा चुनाव से पहले रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया लगातार दूसरी बार दरों में बदलाव करने जा रही है। रायटर पोल के अनुसार गुरुवार को आरबीआई की तीन दिन चल नीति को लेकर बैठक खत्म हो रही है, जिसके बाद आरबीआई अपनी दरों में बदलाव की घोषणा करेगी। जिस तरह से पिछले वर्ष शक्तिकांत दास को आरबीआई का नया गवर्नर बनाया गया था, उसके बाद लोगों में यह उम्मीद है कि आरबीआई दरों में कमी कर सकती है।

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चुनाव से पहले कम हो सकती हैं दरें
आईएनजी के एशिया इकॉनमिस्ट प्रकाश सकपाल ने कहा कि हमे पहले से ही पता है कि रिजर्व बैंक काफी दबाव में है। पिछले दो क्वार्टर में हमने दो बैठक की है, अप्रैल और जून में। हमने इस बात पर चर्चा की है कि क्या आरबीआई दरों में यह कमी अप्रैल या जून माह में करेगी। उन्होंने कहा कि यह कल्पना करना मुश्किल है कि क्या आरबीआई चुनाव से ठीक पहले दरों में कमी करके विकास के किसी तरह के जादुई आंकड़े हासिल कर सकती है, जिसका सरकार चुनावी मौसम में प्रचार कर सकती है।

आगे नहीं कम होगी दर
सकपाल की ही तरह अन्य लोगों ने इस पोल में भी हिस्सा लिया और उनका मानना है कि अर्थव्यवस्था को और बेहतर करने के लिए दरों को कम करने की जरूरत है। जिस तरह से चुनाव से ठीक पहले सरकार ने लोकप्रिय कदम उठाए हैं उसके बीच दरों को कम करना सही नहीं है। बता दें कि इस सर्वे में हिस्सा लेने वाले 85 फीसदी यानि 70 इकॉनमिस्ट का मानना है कि आरबीआई 4 अप्रैल को रेपो रेट 6 फीसदी कर सकती है। सभी की राय यह है कि आरबीआई इसके बाद अगले वर्ष तक दरों को बदलने से कतराएगा।

पहुंच सकता है सबसे निचले स्तर पर
आधे अर्थशास्त्री का कहना है कि आरबीआई इस बार की दरों में कमी के बाद एक और बार इसमे कमी करेगा, जिसके बाद रेपो रेट 2010 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच जाएगा। महंगाई की बात करें तो आरबीआई अपनी तय महंगाई दर को 4 फीसदी तक तक रखने में सफल रहा है। लगातार सात महीने तक आऱबीआई महंगाई दर को 4 फीसदी तक सीमित रखने में सफल रहा। मूलभूत महंगाई की बात करें जिसमे पेट्रोल और खाद्य शामिल नहीं है वह 5.5 फीसदी है।

सुधार को आगे बढ़ाने के लिए भाजपा की जीत जरूरी
वहीं अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अगर भाजपा पूर्ण बहुमत हासिल करती है या फिर भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनती है तो यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा होगा। किसी भी अर्थशास्त्री ने यह मानने से इनकार कर दिया है कि अगर कांग्रेस या कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए या फिर तीसरे मोर्चे की सरकार बनती है तो वह देश की अर्थव्यवस्था के लिए लाभदायक होगा। वरिष्ठ अर्थशास्त्री हूगो इर्केन ने कहा कि सुधार को आगे बढ़ाने के लिए भाजपा का जीतना जरूरी है, क्योंकि विपक्ष मुख्य रूप से एनडीए की आलोचना कर रहा है और वह अर्थव्यवस्था के लिए कोई वैकल्पिक एजेंडा सामने नहीं रख रहा है।

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