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पहली सूची: महागठबंधन से दो-दो हाथ कर कमल खिलाएगी कांग्रेस?

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    Lok Sabha Election 2019: Congress Candidates की First List जारी, UP से 11 उम्मीदवार |वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर अपने दम पर चुनाव लड़ने का दम ठोंक दिया है। अमेठी और रायबरेली को छोड़कर जिन 9 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कांग्रेस ने की है उनमें से सिर्फ दो सहारनपुर और कुशीनगर में पार्टी 2014 में दूसरे स्थान पर रही थी। कांग्रेस बदायूं जैसी सीट पर भी उम्मीदवार देने का साहस दिखाया है जहां समाजवादी पार्टी नेता और मुलायम सिंह के भतीजे धर्मेंद्र यादव दो बार से सांसद हैं। सपा की जारी पहली सूची में एक बार फिर यहां से उनके नाम का ऐलान किया गया है। इससे पता चलता है कि कांग्रेस ने महागठबंधन के लिए भी कोई सॉफ्ट कॉर्नर नहीं रखा है।

    पहली सूची: महागठबंधन से दो-दो हाथ कर कमल खिलाएगी कांग्रेस?

    पहली सूची में जिन 9 सीटों पर कांग्रेस महागठबंधन से मुकाबला करने जा रही है उनमें 5 सीटों पर बीएसपी उम्मीदवार खड़े कर रही है। ये सीटें हैं सहारनपुर, धौरहरा, फर्रूखाबाद, अकबरपुर और जालौन। वहीं, बाकी 4 सीटों बदायूं, उन्नाव, फैजाबाद और कुशीनगर में कांग्रेस का मुकाबला एसपी से होगा। एसपी और बीएसपी मिलकर चुनाव लड़ रही हैं।

    वो सीटें जहां महागठबंधन में बीएसपी से भिड़ेगी कांग्रेस

    वो सीटें जहां महागठबंधन में बीएसपी से भिड़ेगी कांग्रेस

    सहारनपुर : 2014 के चुनाव में कांग्रेस सहारनपुर में दूसरे नम्बर पर रही थी। 65 हज़ार से कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद चुनाव हार गये थे। पार्टी ने यहां उन्हें दोबारा चुनाव मैदान में उतारा है। इस सीट पर कांग्रेस का दावा स्वाभाविक रूप से बनता है। इसलिए यहां से बीएसपी उम्मीदवार का खड़ा किया जाना कांग्रेस को बर्दाश्त नहीं हुआ।

    सहारनपुर में 2014 के लोकसभा चुनाव में बीएसपी को 19.7 फीसदी वोट मिले थे और उसने 2 लाख 35 हज़ार वोट हासिल किया था। बीजेपी को करीब 4 लाख 73 हज़ार और कांग्रेस को करीब 4 लाख 8 हज़ार वोट मिले थे। सहारनपुर की 5 विधानसभा सीटों में दो बीजेपी, दो कांग्रेस और एक समाजवादी पार्टी के पास है।

    धौरहरा : यहां कांग्रेस के नेता जितिन प्रसाद 2014 में चौथे स्थान पर रहे थे। बीजेपी ने बीएसपी को करीब सवा लाख वोटों से हराया था। समाजवादी पार्टी तीसरे स्थान पर थी। जाहिर है वोटों के बंटवारे की वजह से बीजेपी की जीत हुई। यह ऐसी लोकसभा सीट है जहां मुस्लिम मतदाता 53 प्रतिशत हैं।

    दूसरे नम्बर पर होने की वजह से बीएसपी का इस सीट पर स्वाभाविक दावा था और पार्टी ने महागठबंधन के उम्मीदवार के तौर पर यहां से अपना प्रत्याशी खड़ा किया है। एसपी और बीएसपी के मिलकर चुनाव लड़ने से धौरहरा में महागठबंधन प्रत्याशी की स्थिति मजबूत दिखती है। मगर, कांग्रेस के जितिन प्रसाद अपने कद्दावर छवि की वजह से चुनाव में गुल खिला सकते हैं, ऐसी उम्मीद कांग्रेस कर रही है।

    फर्रुखाबाद, अकबरपुर और जालौन की स्थिति

    फर्रुखाबाद, अकबरपुर और जालौन की स्थिति

    फर्रुखाबाद : कांग्रेस इस सीट पर 2014 में चौथे स्थान पर रही थी। यहां समाजवादी पार्टी दूसरे और बीएसपी तीसरे नम्बर पर रही थी। सलमान खुर्शीद ने 2009 में यह सीट जीती थी। पार्टी ने उन्हें एक बार फिर चुनाव मैदान में उतारा है। इससे पहले 2004 और 1999 में समाजवादी पार्टी के पास यह सीट रही थी। इसके बावजूद समाजवादी पार्टी ने यह सीट बीएसपी के लिए छोड़कर बड़ा दिल दिखाया है। मगर, कांग्रेस को इस सीट पर अपने नेता सलमान खुर्शीद पर भरोसा है। बीजेपी ने 1996 और 1998 के बाद 2014 में इस सीट पर जीत दर्ज की थी।

    अकबरपुर : कांग्रेस ने 2009 में अकबरपुर सीट जीती थी। मगर, 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट से बीजेपी ने करीब 2 लाख 79 हज़ार वोटों से बीएसपी को हराया था। इस सीट को बीएसपी का गढ़ माना जाता रहा है। 2004 में मायावती यहां से संसद में चुनकर गयी थीं। यहां 75 फीसदी हिन्दू और 23 फीसदी मुस्लिम आबादी है। जाहिर है अकबरपुर पर बीएसपी का भी दावा है और कांग्रेस का भी। कांग्रेस ने यहां से राजाराम पाल को अपना प्रत्याशी घोषित किया है।

    जालौन : यह लोकसभा सीट 2009 में समाजवादी पार्टी के पास थी। 2014 में बीजेपी ने यह सीट एसपी से छीन ली। बीजेपी ने बीएसपी को 2 लाख 87 हज़ार से ज्यादा मतों से हराया। जालौन को भी बीएसपी के लिए समाजवादी पार्टी का त्याग का उदाहरण माना जा सकता है। विगत चुनाव में बीएसपी यहां दूसरे नम्बर पर रही थी। लेकिन तब बीएसपी उम्मीदवार रहे ब्रजलाल खाबरी कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। इसी आधार पर 2014 में चौथे नम्बर रही कांग्रेस इस सीट पर जीत का दावा कर रही है। 2014 में कांग्रेस को यहां 83 हज़ार के करीब वोट मिले थे।

    वो सीटें जहां महागठबंधन में समाजवादी पार्टी का सामना करेगी कांग्रेस

    वो सीटें जहां महागठबंधन में समाजवादी पार्टी का सामना करेगी कांग्रेस

    बदायूं : यह सीट समाजवादी पार्टी के पास है। यहां से धर्मेंद्र यादव ने 48 फीसदी वोट पाकर मोदी लहर में भी बीजेपी को परास्त किया था। बीजेपी को महज 32 फीसदी वोट मिले थे। यहां की 5 विधानसभा सीटों में समाजवादी पार्टी के पास महज एक सीट है। बाकी सीटें बीजेपी के पास हैं। 2009 में भी इस सीट से धर्मेंद्र यादव ने जीत दर्ज की थी। बदायूं समाजवादी पार्टी का गढ़ रहा है। धर्मेंजद्र यादव एक बार फिर इसी सीट से मुकाबला करेंगे।

    कांग्रेस ने सलीम इकबाल शेरवानी को बदायूं से उम्मीदवार बनाकर समाजवादी पार्टी को सीधे चुनौती दी है। कांग्रेस के इस कदम से महागठबंधन के साथ उसके रिश्ते में खटास पड़ सकती है। कांग्रेस उम्मीदवार के उतरने का साफ तौर पर बीजेपी को फायदा मिलेगा। हालांकि कांग्रेस का दावा है कि वह मुस्लिम उम्मीदवार के साथ पूरी गम्भीरता से चुनाव मैदान में उतर रही है।

    उन्नाव : लोकसभा सीट पर कांग्रेस 2014 में चौथे स्थान पर रही थी। दूसरे स्थान पर रही समाजवादी पार्टी भी बीजेपी के साक्षी महाराज से 3 लाख से ज्यादा वोटों से चुनाव हारी थी। बीएसपी को तीसरा स्थान मिला था। बीएसपी ने 2004 में इस सीट से जीत दर्ज की थी। 2009 में कांग्रेस की अन्नू टंडन ने चुनाव जीता था। एक बार फिर कांग्रेस ने यहां से उन्हें उम्मीदवार घोषित किया है।

    फैजाबाद और कुशीनगर का हाल

    फैजाबाद और कुशीनगर का हाल

    फैजाबाद : इस लोकसभा सीट पर बीजेपी ने 2014 में समाजवादी पार्टी को हराया था। 2009 में यह सीट कांग्रेस के पास थी, जबकि 2004 में बीएसपी के पास। इस तरह फैजाबाद ऐसी सीट है जहां सभी प्रमुख दल अपनी-अपनी जीत का दावा कर सकते हैं। एसपी-बीएसपी के साथ आ जाने के बाद एसपी उम्मीदवार की स्थिति निश्चित रूप से यहां मजबूत रहेगी। कांग्रेस ने फैजाबाद से निर्मल खत्री को पार्टी का उम्मीदवार घोषित किया है।

    कुशीनगर : लोकसभा सीट पर कांग्रेस 2014 में दूसरे स्थान पर रही थी। बीजेपी ने यह सीट कांग्रेस के दिग्गज नेता आरपीएन सिंह को 84 हज़ार से अधिक मतों से हरा जीती थी। बीएसपी को तीसरा और समाजवादी पार्टी को चौथा स्थान मिला था। यह ऐसी सीट पर जिस पर कांग्रेस को एसपी-बीएसपी के साझा उम्मीदवार होने की वजह से नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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