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Lok Sabha Elections 2019: चुनाव में खड़े उम्मीदवार ही प्रभावित नहीं होंगे मालवा-निमाड़ के नतीजों से

By डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी
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नई दिल्‍ली। 19 मई को होने वाले मतदान में मालवा-निमाड़ की 8 सीटों पर मतदान होना है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ने ही मालवा और निमाड़ को अपना केन्द्र बना रखा है। नरेन्द्र मोदी मतदान के दो दिन पहले 17 मई को खरगोन में आम सभा करेंगे। इसके पहले वे इंदौर खंडवा और रतलाम में सभाएं कर चुके है। चुनाव का अंतिम चरण होने से प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चुनाव तक इन्हीं क्षेत्रों में सक्रिय रहने वाले है।

Lok Sabha Elections 2019: चुनाव में खड़े उम्मीदवार ही प्रभावित नहीं होंगे मालवा-निमाड़ के नतीजों से

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी मालवा निमाड़ का दौरा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ भी सरकारी कामकाज से अलग मालवा-निमाड़ की सीटों पर जोर आजमाइश कर रहे है। कांग्रेस ने मालवा में भाजपा को हराने के लिए अपने कई मंत्रियों को तैनात कर रखा है। मालवा-निमाड़ की आठ में से सात सीटें फिलहाल भाजपा के पास है। 2014 में भाजपा ने इन सभी सीटों पर जीत हासिल की थी। झाबुआ में उपचुनाव के बाद कांग्रेस का कब्जा हुआ। अब कमलनाथ ने अपने आठ मंत्रियों को मालवा-निमाड़ की आठों सीटों पर तैनात कर रखा है। ये मंत्री हैं जीतू पटवारी, सज्जन सिंह वर्मा, तुलसी सिलावट, सुरेन्द्र सिंह बघेल, उमंग सिंघार, बाला बच्चन, सचिन यादव और विजय लक्ष्मी साधौ। इन्हीं मंत्रियों ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के चुनावी दौरों के समय कमान संभाली थी।

मुख्यमंत्री कमलनाथ अभी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। संभावना है कि लोकसभा चुनाव के बाद वे प्रदेश कांग्रेस पद से इस्तीफा दे देंगे। कमलनाथ फिलहाल विधानसभा के सदस्य नहीं है। इसलिए वे छिंदवाड़ा विधानसभा उपचुनाव से भी चुनाव में खड़े हुए है। वहां मतदान हो चुका है और नतीजा 23 मई को ही आएगा। कमलनाथ की जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन यह जीत कोई बहुत अधिक मार्जिन से होने की संभावना नहीं बताई जा रही। उपचुनाव जीतने के बाद कमलनाथ विधायक बन पाएंगे। उनका बेटा नकुल लोकसभा चुनाव लड़ रहा है और जीतने पर वह सांसद होगा।

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कांग्रेस ने अपनी संगठन का पुर्नगठन लोकसभा चुनाव तक रोक दिया था, ताकि किसी तरह का मतभेद सामने न आए। अब प्रदेश कांग्रेस को नया अध्यक्ष भी मिलेगा और नए पदाधिकारी भी। मध्यप्रदेश यात्रा के दौरान राहुल गांधी इस बात का इशारा कर चुके हैं कि प्रदेश कांग्रेस के संगठन में युवाओं को भरपूर अवसर दिए जाएंगे और कांग्रेस ब्लॉक स्तर पर अपने संगठन को मजबूत बनाएगी। कई नेताओं को कांग्रेस अपने वरिष्ठ मंडल में शामिल करेगी, ताकि उनके अनुभव का लाभ लिया जा सके।

भाजपा संगठन के पदाधिकारी भी 19 मई का इंतजार कर रहे हैं। 23 मई को नतीजे आने के बाद भाजपा संगठन में भी हेर-फेर होगा। विधानसभा चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत न मिलने पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह ने इस्तीफा दे दिया था, जिसे स्वीकार नहीं किया गया। उनसे कहा गया था कि लोकसभा चुनाव तक वे अपने दायित्व को संभालते रहे। इस्तीफे पर फैसला बाद में होगा। राकेश सिंह भले ही प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बने रहे, लेकिन विधानसभा चुनाव के नतीजों के कारण भाजपा आलाकमान ने सहसंगठन मंत्री अतुल राय को पद से हटा दिया। इसके साथ ही भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत के अधिकार भी सीमित कर दिए। सुहास भगत को आशा है कि वे फिर कोई नई जिम्मेदारी पा जाएंगे।

जब प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान का दायित्व राकेश सिंह को सौंपा गया था। तब राकेश सिंह ने चौहान की टीम के किसी भी पदाधिकारी को नहीं हटाया। लोकसभा चुनाव के पहले कुछ जिलों के भाजपा अध्यक्ष जरूर बदले गए। राकेश सिंह को आशा है कि ने जबलपुर से फिर चुने जाएंगे और अगर भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनी, तो उन्हें केन्द्र में मंत्री पद मिल सकता है। ऐसे में उनका प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद जाना तय है।

लोकसभा चुनाव केवल उन नेताओं के ही भाग्य तय नहीं करेंगे, जो चुनाव में खड़े हुए है। मध्यप्रदेश के कई दिग्गज नेता भी चुनाव के नतीजों से प्रभावित होंगे। 2014 में 29 में से 27 सीटें भाजपा को मिली थी। इस बार कांग्रेस को आशा है कि उसकी सीटें बढ़ जाएंगी। दावा तो कांग्रेस 20 सीटें जीतने का कर रही है, लेकिन अगर इसकी आधी सीटें भी वह जीत जाए, तो वह निर्णायक घड़ी होगी।

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English summary
Lok Sabha Elections 2019: Candidates standing in the election will not be affected by Malwa-Nimad results.
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