बिहार में 19 सीटों के इस गणित ने बढ़ाई मोदी-शाह की 'टेंशन', बूथ रिपोर्ट भी चौंकाने वाली

भाजपा के एक अंदरूनी आंकलन में सामने आया है कि बिहार में लोकसभा की ऐसी 19 सीटें हैं, जो पार्टी के लिए बड़ी टेंशन बन गई हैं।

नई दिल्ली। 2019 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2019) में एक बार फिर भाजपा का परचम लहराने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ताबड़तोड़ रैलियों के जरिए विपक्षी दलों पर हमले बोल रहे हैं। इन सियासी हमलों के बीच बिहार (Bihar) से पीएम मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के लिए एक परेशान करने वाली खबर आई है। दरअसल भाजपा के एक अंदरूनी आंकलन में सामने आया है कि बिहार में लोकसभा की ऐसी 19 सीटें हैं, जहां भगवा पार्टी के अति पिछड़े वोटों में महागठबंधन (Bihar Mahagathbandhan) सेंधमारी कर सकता है। भाजपा की इस चिंता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों बिहार की मुजफ्फरपुर रैली में पीएम मोदी ने मल्लाह समुदाय के सामने मंच से ऐलान किया कि अगर वो दोबारा सत्ता में आए तो अलग से मत्स्य पालन मंत्रालय का गठन करेंगे।

अंदरूनी आंकलन ने बढ़ाई भाजपा की चिंता

अंदरूनी आंकलन ने बढ़ाई भाजपा की चिंता

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, इस अंदरूनी आंकलन ने भाजपा की चिंताएं बढ़ा दी हैं। 30 अप्रैल को पीएम मोदी जब मुजफ्फरपुर में चुनावी रैली कर रहे थे तो उन्होंने मंच से यह भी कहा कि उनकी सरकार में स्थानीय सहनी जाति (मल्लाह, निषाद और केवट) के नेता भगवान लाल सहनी को नवगठित राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग का पहला अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं, पीएम मोदी से ठीक पहले मंच पर भाषण देने के लिए खड़े हुए बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने भी भगवान लाल को 'मुजफ्फरपुर का लाल' कहकर संबोधित किया। इसे एनडीए की अति पिछड़े वोटों में सेंधमारी रोकने की कोशिश के तौर पर देखा गया।

'वोट ट्रांसफर करने में कामयाब महागठबंधन'

'वोट ट्रांसफर करने में कामयाब महागठबंधन'

भाजपा सूत्रों का कहना है कि बिहार में 19 सीटों, जिनपर चुनाव हो चुका है, के आंतरिक आंकलन में सामने आया है कि महागठबंधन के सहयोगी दल अपनी जाति के वोटों को एक दूसरे को ट्रांसफर करने में कामयाब होते हुए नजर आ रहे हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के अलावा, महागठबंधन में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) के उपेंद्र कुशवाहा, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के जीतन राम मांझी और विकासशील इंसान पार्टी के नेता मुकेश सहनी शामिल हैं, जिनकी अपनी जातियों में मजबूत पकड़ है। इनके अलावा महागठबंधन ने सीपीआई (एम-एल) के साथ भी समझौता किया हुआ है, जो बिहार की आरा सीट से चुनाव लड़ रही है।

'करीबी मुकाबले की बूथ रिपोर्ट'

'करीबी मुकाबले की बूथ रिपोर्ट'

भाजपा के एक नेता ने इस बात को स्वीकार करते हुए बताया, 'हमारी जानकारी में यह बात आई है कि वीआईपी ने खगड़िया में (23 अप्रैल को मतदान), दरभंगा में आरजेडी के अब्दुल बारी सिद्दीकी (23 अप्रैल को मतदान) और समस्तीपुर में कांग्रेस के अशोक राम ने (23 अप्रैल को मतदान) ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। हम कुशवाहा, साहनी और मांझी वोटों के बंटवारे को लेकर काफी सतर्क रहे हैं। उजियारपुर लोकसभा सीट (29 अप्रैल को मतदान) पर, जहां भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय, उपेंद्र कुशवाहा के सामने चुनाव लड़े हैं, उस सीट पर हमारे पास बहुत ही करीबी मुकाबले की बूथ रिपोर्ट है। वहां सुनने में आया है कि अधिकांश कुशवाहा वोटर महागठबंधन के साथ गए हैं।'

'सामाजिक अंकगणित पड़ रहा है भारी'

'सामाजिक अंकगणित पड़ रहा है भारी'

वहीं, एक वरिष्ठ आरजेडी नेता का कहना है, 'हमारा अनुमान है कि बिहार की कम से कम 20 सीटों पर जीत का अंतर 15 हजार से 20 हजार के बीच रह सकता है। यह केवल हमारे सहयोगियों के बीच आपसी वोट हस्तांतरण के कारण ही संभव है। वहीं, जेडीयू के एक नेता ने भी इस बात को माना कि बिहार में 'सामाजिक अंकगणित' एनडीए के 'विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दा' को कड़ी चुनौती देता हुआ नजर आ रहा है। दरअसल, उत्तर बिहार और मिथिलांचल बेल्ट- खासकर मुजफ्फरपुर, वैशाली, झंझारपुर और सुपौल में बड़ी संख्या में मल्लाह हैं। इसी समीकरण को देखते हुए महागठबंधन में विकासशील इंसाफ पार्टी को लोकसभा की तीन सीटें दी गई हैं।

बिहार में 28 फीसदी है अति पिछड़ी आबादी

बिहार में 28 फीसदी है अति पिछड़ी आबादी

माना जा रहा है कि महागठबंधन में शामिल इन पार्टियों में, आरजेडी की मुस्लिम (17 फीसदी) और यादव (14 फीसदी), कांग्रेस की सवर्ण (12 फीसदी) और दलित (16 फीसदी), आरएलएसपी की कुशवाहा जाति (8 फीसदी), जीतनराम मांझी की मुशहर जाति (2.5 फीसदी) और मुकेश सहनी की सहनी जाति (8 फीसदी) पर अच्छी पकड़ है। महागठबंधन को भरोसा है कि जातियों का यह गणित जमीन पर उसके हक में जा सकता है। लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए से अलग हुए उपेंद्र कुशवाहा और जीतनराम मांझी भी अपनी चुनावी रैलियों में भारी भीड़ के जरिए नए सियासी समीकरण बनाते हुए नजर आ रहे हैं। बिहार में अति पिछली आबादी कुल जनसंख्या की 28 फीसदी है। हालांकि बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने इस आबादी को सरकार की अलग-अलग योजनाओं में शामिल भी किया है।

ये भी पढ़ें- बिहार में क्या कहते हैं जीत-हार के सियासी आंकड़े

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+