अखिलेश यादव के सामने खुलकर आए शिवपाल, यूपी में लगाए नई पार्टी के पोस्टर
यूपी की राजधानी लखनऊ समेत कई शहरों में शिवपाल यादव के समर्थकों ने समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के फ्लैक्स और पोस्टर लगवा दिए हैं, जिनमें नई पार्टी बनाने पर शिवपाल यादव को बधाई दी गई है।
नई दिल्ली। यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव और चाचा शिवपाल यादव के बीच सुलह की कोशिशें नाकाम होने के बाद अब यह तय माना जा रहा है कि 2019 के संग्राम में समाजवादी पार्टी और समाजवादी सेक्युलर मोर्चा अलग-अलग चुनावी रथों पर हुंकार भरेंगे। शिवपाल यादव ने अब पुख्ता तौर पर इसके संकेत भी देने शुरू कर दिए हैं। यूपी की राजधानी लखनऊ समेत कई शहरों में शिवपाल यादव के समर्थकों ने समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के फ्लैक्स और पोस्टर लगवा दिए हैं, जिनमें नई पार्टी बनाने पर शिवपाल यादव को बधाई दी गई है।

शिवपाल के साथ मुलायम का भी फोटो
गुरुवार को राजधानी लखनऊ समेत कई शहरों में शिवपाल यादव को नई पार्टी 'समाजवादी सेक्युलर मोर्चा' का गठन करने पर बधाई देते हुए फ्लैक्स और पोस्टर लगाए गए। चौंकाने वाली बात ये है कि इन सभी फ्लैक्स और पोस्टर में समाजवादी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव का फोटो भी शामिल किया गया है। शिवपाल यादव को बधाई देते हुए इन फ्लैक्स में लिखा है, 'मा. नेताजी की अध्यक्षता में समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के गठन पर शिवपाल सिंह यादव को हार्दिक बधाई।'

मुलायम ने कराई सुलह की आखिरी कोशिश
आपको बता दें कि इससे पहले बुधवार को लखनऊ में मुलायम सिंह यादव के आवास पर परिवार के लोगों और पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में अखिलेश और शिवपाल यादव के बीच सुलह की कोशिश कराई गई थी। इस बैठक में शिवपाल यादव की एक 'बड़ी शर्त' को लेकर दोनों के बीच बात बनते-बनते फिर से बिगड़ गई। सूत्रों के मुताबिक बैठक के बाद मुलायम सिंह यादव ने शिवपाल से यहां तक कह दिया कि शुक्रवार तक आपका जो भी फैसला हो, हमें बता देना।

इस बात पर नाकाम हुई सुलह की कोशिश
दरअसल, इस बैठक में प्रस्ताव रखा गया था कि शिवपाल यादव को फिर से यूपी के सपा अध्यक्ष का पद दिया जाए, जिसपर अखिलेश यादव ने अपनी सहमति दे दी। लेकिन...शिवपाल ने बैठक में कहा कि इस बात की क्या गारंटी है कि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाने के बाद पहले की तरह फिर से पद से नहीं हटाया जाएगा। इसके बाद शिवपाल ने बैठक में शर्त रखी कि मुलायम सिंह यादव को भी फिर से समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाए। इस बात पर अखिलेश यादव सहमत नहीं हुए और दोनों के बीच सुलह की कोशिश होते-होते बिगड़ गई। बताया जा रहा है कि खुद मुलायम सिंह यादव ने भी फिर से पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से इंकार कर दिया।
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