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पोस्ट पोल सर्वे: आखिर उत्तर प्रदेश में क्यों हारा महागठबंधन

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा और आरएलडी ने उत्तर प्रदेश में मिलकर चुनाव लड़ा। तीनों पार्टियां अपने कोर वोटर के दम पर यूपी की 80 में से 60 सीटें जीतने का दावा कर रही थीं लेकिन चुनाव में इन्हें करारी हार मिली। सीएसडीएस और लोकनीति के पोस्ट पोल सर्वे के मुताबिक, गठबंधन की हार की वजह ये रही कि तीनों ही पार्टियों को अतिरिक्त वोट तो छोड़ दें, अपना बेस वोट भी पूरी तरह से नहीं मिल सका। सबसे बड़ा झटका रालोद को लगा है, 2014 से पहले बड़ी तादाद में जाट वोट पार्टी को मिलता रहा लेकिन इस चुनाव में 91 प्रतिशत जाटों की पसंद भाजपा रही।

रालोद अब जाटों की पसंद नहीं

रालोद अब जाटों की पसंद नहीं

लोकसभा चुनाव से कुछ समय पहले गोरखपुर, फूलपुर और कैराना में सपा-बसपा-रालोद गठजोड़ ने जीत हासिल की थी। एक-दूसरे को वोट ट्रांसफर कराने में भी तीनों पार्टियां कामयाब रहीं लेकिन लोकसभा चुनाव में ऐसा ना हो सका। राष्ट्रीय लोकदल को सबसे बड़ा झटका लगा। पार्टी तीन सीटों पर चुनाव लड़ी और तीनों पर हारी। अजित सिंह और जयंत चौधरी दोनों चुनाव हार गए। रालोद के भरोसेमंद वोटर माने जाने वाले जाट पूरी तरह भाजपा के साथ दिखे। सर्वे के मुताबिक, 91 प्रतिशत जाटों का वोट भाजपा को गया जो किसी भी दूसरी जाति के मुकाबले सबसे ज्यादा है।

गठबंधन को नहीं मिला गैर यादव पिछड़े, गैर जाटव दलित का साथ

गठबंधन को नहीं मिला गैर यादव पिछड़े, गैर जाटव दलित का साथ

पूर्वी यूपी में गठबंधन की बड़ी ताकत पिछड़ी जातियों के वोट को माना जा रहा था। यादव और दूसरी कई पिछड़ी जातियों को सपा का वोटबैंक माना जाता है लेकिन गठबंधन को इन जातियों का वोट उम्मीद के मुताबिक नहीं मिला। ज्यादातर पिछड़े भाजपा पर भरोसा किए हैं। 80 फीसदी कुर्मी-कोइरी वोट भाजपा को मिला है। गठबंधन के खाते में सिर्फ इस जाति से 14 फीसदी वोट आए हैं। यादवों के अलावा दूसरे ओबीसी से भी भाजपा पर 72 फीसदी वोट है। वहीं गैर जाटव दलित भी गठबंधन को आधे ही मिले। जाटवों के अलावा दूसरे दलितों के 50 फीसदी वोट भाजपा को गए।

 यादव भी छिटके

यादव भी छिटके

जाटों और अन्य पिछड़ी जातियों की पसंद को भाजपा रही ही, यादव और दलित भी गठबंधन से छिटके हैं। गठबंधन को यादवों के 60 फीसदी वोट मिले हैं। 23 फीसदी की पसंद भाजपा रही। वहीं जाटव में 17 फीसदी वोट भाजपा को मिले। गठबंधन को जाटवों का 75 फीसदी वोट मिला। गठबंधन को जाटव सबसे ज्यादा 75 प्रतिशत और मुसलमान 73 फीसदी मिले हैं। आठ प्रतिशत मुस्लिम भाजपा को वोट किए।

भाजपा की बात करें तो सबसे ज्यादा 91 फीसदी जाटों की पसंद भाजपा रही। इसके बाद राजपूत 89, ब्राह्मण 82 फीसदी, वैश्य 70 प्रतिशत और दूसरी अन्य उच्च जातियों में भाजपा को 84 फीसदी वोट मिला है।

 कांग्रेस के पास कोई भी नहीं

कांग्रेस के पास कोई भी नहीं

कांग्रेस पर उत्तर प्रदेश में किसी भी जाति ने भरोसा नहीं दिखाया। कांग्रेस के परंपरागत वोटर कहे जाने वाले ब्राह्मणों का छह फीसदी वोट ही इस चुनाव में मिला। वैश्य 13 फीसदी तो अन्य पिछड़ी जातियों का 5 फीसदी और गैर जाटव दलितों का 7 फीसदी वोट कांग्रेस को मिला है। कांग्रेस को सबसे ज्यादा 14 फीसदी वोट मुसलमानों को मिला है।

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