Lok Sabha Election 2024: कांग्रेस का प्लान तैयार! दक्षिण भारत में बीजेपी को रोकने के लिए कैसे बिछा रही है जाल?
लोकसभा चुनावों से पहले 2023 में विधानसभा चुनावों के जितने भी नतीजे आए, उससे दो बातें एकदम साफ हो गई। केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी उत्तर भारत में और भी मजबूत होकर उभरी है और प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस किसी तरह से दक्षिण भारत में खुद को फिर से खड़ी कर पाने में सफल हुई है।
भारतीय जनता पार्टी कर्नाटक में भले ही सत्ता से बेदखल हुई है, लेकिन लोकसभा चुनावों में वह कर्नाटक समेत सभी दक्षिण भारतीय राज्यों में अपने प्रदर्शन बेहतर करने की उम्मीदों के साथ जुटी हुई है और इसके संकेत भी अभी तक सकारात्मक ही मिल रहे हैं।

'दक्षिणी राज्यों वाले देश' वाले बयान से शुरू हुआ विवाद
इसी दौरान कर्नाटक से कांग्रेस के एकमात्र लोकसभा सांसद डीके सुरेश ने 'दक्षिणी राज्यों वाले देश' की बात करके बहुत बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इसकी वजह से संसद की कार्यवाही तक बाधित हो चुकी है। बीजेपी ने कर्नाटक में भी इसको लेकर कांग्रेस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।
टैक्स हिस्सेदारी के नाम पर दक्षिण राज्यों को गोलबंद करने की कोशिश
ठीक इसी दौरान उत्तर और दक्षिण भारत के बीच टैक्स बंटवारे को लेकर एक विवाद को हवा देने की कोशिश शुरू हो गई है और इसकी अगुवाई एक तरह से कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ही कर रही है। करों में उचित हिस्सेदारी के नाम पर दक्षिणी राज्यों को एक मंच पर लाने का प्रस्ताव सामने आया है।
कर्नाटक कांग्रेस ने 7 फरवरी को दिल्ली में की प्रदर्शन की तैयारी
यह सिर्फ संयोग नहीं है। कांग्रेस पार्टी की कर्नाटक इकाई पहले ही इस मुद्दे पर 7 फरवरी को नई दिल्ली में एक विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर चुकी है। इसी हफ्ते तेलंगाना (कांग्रेस) और केरल (लेफ्ट) में सत्ताधारी दलों की ओर से भी ऐसे ही कार्यक्रम आयोजित किए जाने वाले हैं।
हमें अब अपनी आवाज उठानी होगी- कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और 'अलग देश' जैसे भड़काऊ बयान देने वाले कांग्रेस सांसद के बड़े भाई डीके शिवकुमार ने दक्षिणी राज्यों के प्रस्तावित फोरम के बारे में कहा है, 'हमें अब अपनी आवाज उठानी होगी, क्योंकि विरोध के अलावा हमारे पास कोई विकल्प नहीं है।'
उन्होंने कहा, 'यहां तक कि हम दिल्ली में होने वाले विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए बीजेपी और जेडीएस नेताओं को भी आमंत्रित कर रहे हैं।'
इस तरह के प्रदर्शन में केरल और तेलंगाना राज्यों के शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा, 'अभी तो हम अपने स्तर पर अलग से कर रहे हैं। भविष्य में यह खुद ही रास्ता अख्तियार करेगा।'
'दक्षिणी राज्यों का आर्थिक गठबंधन' बनाने की रणनीति
लेकिन, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के आर्थिक सलाहकार बसवराज रायरेड्डी ने कांग्रेस सरकार के इरादों को और स्पष्ट किया है।
उनके मुताबिक दक्षिणी राज्यों का आर्थिक गठबंधन (इकोनॉमिक अलायंस ऑफ सदर्न स्टेट्स) बनाने का प्रस्ताव समान-विचारधारा वाले दलों के साथ बातचीत के दौर में है, जिसमें मुख्य तौर पर कांग्रेस, डीएमके, वाईएसआरसीपी और लेफ्ट शामिल हैं।
जबकि, मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के राजनीतिक सचिव नसीर अहमद के मुताबिक, 'पड़ोसी राज्यों समेत कई स्टेकहोल्डर्स ने फोरम बनाने की सलाह दी है और रायरेड्डी ने सीएम के साथ चर्चा भी की है। हालांकि, अभी तो दिल्ली के प्रदर्शन और राज्य के बजट पर फोकस है, उसके बाद मुख्यमंत्री कोई फैसला लेंगे।'
अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वालों को धन्यवाद- मुख्यमंत्री सिद्दारमैया
हालांकि, सिद्दारमैया ने एक्स पर केंद्र सरकार के खिलाफ दक्षिण राज्यों के फोरम पर अपने इरादे की भनक पहले ही दे दी है। उन्होंने एक्स पर अपने पोस्ट पर 'माय टैक्स, माय राइट' वाला अभियान चलाने वालों को धन्यवाद दिया है।
सीएम ने लिखा है, 'जिन्होंने (टैक्स) अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई है, उन्हें मैं धन्यवाद देता हूं। मैं आपके साथ हूं। अगर हम एकजुट हैं तो निश्चित रूप से हमारी आवाज दिल्ली पहुंचेगी।'
उत्तर-दक्षिण विवाद पैदा करने से किसको लाभ?
कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के बाद से बेंगलुरु से लेकर चेन्नई तक से विपक्षी दलों के इंडिया ब्लॉक के कई नेताओं की ओर से बार-बार उत्तर-दक्षिण के बीच खाई पैदा करने की कोशिशें देखी गई हैं। कभी हिंदी विरोध के नाम पर तो कभी कथित रूप से टैक्स की हिस्सेदारी में भेदभाव के नाम पर।
कांग्रेस को दक्षिण में ही दिख रही हैं ज्यादा संभावनाएं
केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार ने लोकसभा चुनावों से पहले अयोध्या में राम लला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह से जिस तरह से अपने पक्ष में एक माहौल तैयार किया है, उसने विपक्ष को बहुत ही असहज कर दिया है। उधर कांग्रेस को उत्तर भारत में इंडी अलायंस के सहयोगियों से कोई भाव ही नहीं मिल पा रहा है।
दूसरी तरफ दक्षिण में वह अपने लिए ज्यादा संभावनाएं देख रही है। लेकिन, साथ ही साथ उसे बीजेपी से मिल रही चुनौती का भी अंदाजा है। जानकार मानते हैं कि विधानसभा और लोकसभा चुनावों में वोटिंग का पैटर्न बदल जाता है। कर्नाटक में तो बीजेपी ने जेडीएस के साथ तालमेल बिठाकर कांग्रेस की चुनौती बढ़ा ही रखी है।
दूसरी तरफ केरल से लेकर तमिलनाडु तक में भी बीजेपी अपनी जमीन बढ़ाने में लगी है। तेलंगाना में उसने अपना जनाधार लगातार बढ़ाया है।
ऐसे में कर्नाटक कांग्रेस के नेताओं की अगुवाई में जैसे पहले 'अलग देश' का विवाद खड़ा किया गया और अब दक्षिण भारतीय राज्यों के नाम पर मोर्चेबंदी का माहौल बनाया जा रहा है, उससे यही संकेत निकल रहा है कि पार्टी भाजपा को ऐसे मुद्दे पर उलझाना चाहती है, जिससे निकलना बहुत ही चुनौती वाला काम है।












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