Lok Sabha Election 2024: आज अगर चुनाव हुए तो BJP से क्यों पिछड़ जाएगा INDIA ब्लॉक? 5 वजहें जान लें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार के पिछले 10 वर्षों के कार्यकाल में बीजेपी एक तरह से पैन-इंडिया पार्टी के रूप में स्थापित हुई है। इसने उत्तर, पश्चिम और मध्य से लेकर पूर्वोत्तर तक में अपने किले स्थापित किए हैं। एक समय असंभव लगने जाने वाले दक्षिण भारत तक में भी अपनी पैठ बनाई है।
चुनाव-दर-चुनाव प्रधानमंत्री की लोकप्रियता चरम से चरमोत्कर्ष की ओर बढ़ रही है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर तक में अप्रत्याशित लोकप्रियता हासिल की है। भाजपा नेताओं का मानना है कि उनके चेहरे ने एंटी-इंकंबेंसी को प्रो-इंकंबेंसी में बदलना बार-बार संभव कर दिखाया है।

- ब्रांड मोदी भाजपा का सबसे बड़ा हथियार, विपक्ष नेता तय नहीं कर पाया।
- मूल वादे पूरे करके बीजेपी ने अपने मूल-जनाधार को किया और मजबूत।
- मोदी सरकार की योजनाओं ने लाभार्थियों का एक बड़ा वोट बैंक तैयार किया है।
- पीएम मोदी के विकास थीम के प्रति युवाओं का आकर्षण बढ़ा।
- सोशल इंजीनियरिंग के लिए जमीन पर काम करने में जुटी है बीजेपी।
2024 के चुनाव के लिए भाजपा का अभियान पहले ही शुरू हो चुका है। एजेंडा मूल रूप से पिछले 10 वर्षों में मोदी सरकारी की सफलताओं के इर्द गिर्द ही रहने वाला है। बीजेपी के सामने 28 विपक्षी दलों का इंडिया ब्लॉक है, जो बहुत ही धीमी गति से आगे बढ़ रहा है।
बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए में सहयोगी के साथ सीटों के बंटवारे को सिर्फ फाइनल टच देने का काम बाकी है। जबकि, इंडिया ब्लॉक में न तो अभी तक एजेंडा स्पष्ट है न तो सीटों के बंटवारे पर उनकी स्थिति साफ हो पा रही है। इस तरह से 2024 के लोकसभा चुनाव में फिलहाल बीजेपी आगे दिख रही है। इसकी 5 मुख्य वजहों की हम यहां चर्चा कर रहे हैं-
1) पीएम मोदी या ब्रांड मोदी
2024 का चुनाव बीजेपी 'मोदी की गारंटी' और 'फिर आएगा मोदी' के नारे पर लड़ेगी। एक और नया नारा गढ़ा है-'तीसरी बार मोदी सरकार, अबकी बार 400 पार'। इससे पहले 2014 में 'अबकी बार मोदी सरकार' और 2019 में 'मोदी है तो मुमकिन है' और 'एक बार फिर मोदी सरकार' पार्टी की जीत की गारंटी बन चुका है।
अगर बीजेपी के नजरिए से देखें तो 'ब्रांड मोदी' ने पार्टी को दो आम चुनाव और अनेकों विधानसभा चुनाव जिताकर दिए हैं। पीएम मोदी ने चुनावों की जिम्मेदारी ली है और अपने नाम और चेहरे पर वोट मांगा है। वह अपनी सरकार की योजनाओं के माध्यम से पार्टी के जनसंपर्क अभियानों के केंद्र बिंदु रहे हैं।
समाज का ऐसा कोई भी वर्ग नहीं है, जहां मोदी का प्रभाव न हो। भाजपा और एनडीए ही नहीं, विपक्ष भी 2024 के लोकसभा चुनावों को 'मोदी का चुनाव' बना चुका है।
नरेंद्र मोदी के नाम की विश्वसनीयता इतनी है कि बीजेपी ने एक नारा दिया है, 'सपना नहीं हकीकत बुनते हैं, तभी तो हम मोदी को चुनते हैं'। विपक्ष भी न चाहते हुए भी इस वास्तविकता से परिचित है। इसलिए, मोदी के मुकाबले किसी चेहरा को आगे करने में हिचकिचा रहा है।
बीजेपी महासचिव तरुण चुग ने ईटी से कहा है, 'जब पीएम मोदी कहते हैं कि यह 'मोदी की गारंटी' है', तो इससे लोगों में एक अलग तरह का विश्वास पैदा होता है। डिलिवरी का उनका एक ट्रैक रिकॉर्ड है और जिससे लोग इसको लेकर आश्वस्त होते हैं कि जब वह कोई वादा करते हैं तो उसे पूरा भी करते हैं।'
2) मूल जनाधार का विस्तार
भाजपा शुरू से एक विचारधारा पर चलने वाली कैडर-आधारित पार्टी रही है। लेकिन, पिछले 10 वर्षों में इसने अपने मूल जनाधार का अप्रत्याशित रूप से विस्तार करने में सफलता पाई है।
2014 में पार्टी को 31% वोट और 282 सीटें मिली थीं। 2019 में इसका वोट शेयर 37% हो गया और यह 303 सीटों तक पहुंच गई। 2024 के लिए पार्टी ने करीब 50% वोट शेयर का लक्ष्य रखा है। इसकी वजह ये है कि विचारधारा-आधारित वोटरों का इसके साथ अटूट नाता है। नए वोटर जुड़े हैं और पार्टी ने अपनी योजनाओं के माध्यम से एक नया मतदाता-वर्ग तैयार करने में सफलता प्राप्त की है।
बीजेपी के मूल-मतदाताओं में विस्तार की वजह ये है कि यह अपने मूल-एजेंडे को भी आगे बढ़ाने में सफलता प्राप्त की है और उसे हासिल करके दिखाए हैं। अयोध्या में भगवान राम की जन्मभूमि पर ही भव्य राम मंदिर बनने का सपना साकार होने जा रहा है।
वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर और उज्जैन में भगवान महाकालेश्वर मंदिर का कायापलट किया जा चुका है। कश्मीर में अनुच्छेद 370 अब इतिहास बना दिया गया है और यूनिफॉर्म सिविल कोड भी दस्तक देने को तैयार है।
भगवान राम लला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह ने तो पार्टी कार्यकर्ताओं में अलग ही जान फूंक दी है। वीएचपी-आरएसएस की कलश यात्रा और पूजित अक्षत कार्यक्रमों ने अलग हौसला बढ़ा दिया है। ऊपर से देशभर के लगभग 17 करोड़ परिवारों को 22 जनवरी के बाद अयोध्या आने का निमंत्रण पत्र भेजा जा रहा है।
संघ और उसके संगठन अयोध्या में तीर्थ यात्रा के लिए लोगों को देशभर से लाने में बीजेपी के प्रयासों में सहयोग देने में व्यस्त है। यह राम मंदिर का उत्साह तब तक बनाए रखना है, जब तक कि चुनाव आयोग लोकसभा चुनाव की तारीखों का एलान न कर दे। इस मुद्दे पर विपक्ष को जिस उलझन में उलझाया है, उससे उबरने में अभी उन्हें काफी समय लगने वाला है।
3) विकास की रफ्तार
विकास शहरी वोटरों और ग्रामीण युवाओं तक पहुंच बनाने का बीजेपी का एजेंडा रहा है। पीएम मोदी इसी वोटर-बेस को बढ़ाने के लिए देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन इकोनॉमी तक पहुंचाने की बात करते हैं। विकसित भारत का सपना युवाओं का आकर्षण है।
शहरी वोटरों के लिए बीजेपी कम से कम दो दशकों से पहली पसंद बनी हुई है। मोदी चाहे 'रिफॉर्म,परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म' की बात करें या फिर 'मेक इन इंडिया' का, नैरेटिव युवा वोटरों को टारगेट करने का रहता है। 50% वोट शेयर के लक्ष्य में बीजेपी को इन युवा वोटरों से काफी उम्मीदें हैं।
'विकसित भारत संकल्प यात्रा' या 'विश्वकर्मा योजना' भी उसी विकास के एजेंडे पर आधारित है, जिसके आधार पर भाजपा अपना गोल सेट कर चुकी है। जिसकी काट के लिए इंडिया ब्लॉक अभी तक जातिगत जनगणना जैसे विषयों में उलझा हुआ है।
4) लाभार्थियों से लाभ
यह तथ्य है कि 2019 में बीजेपी रिकॉर्ड बहुमत से सत्ता पर काबिज हुई ही थी तो उसमें मोदी सरकार के विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों ने उसकी बहुत ज्यादा मदद की थी। यह पार्टी के लिए वह कोर-वोटर बन गए, जिन्होंने राज्यों और जातियों की सीमाएं तोड़कर पीएम मोदी के नाम पर वोट डाला।
2024 के चुनावों में मोदी सरकार की विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों की संख्या 80 करोड़ हो चुकी है। यह जाति, धर्म, भाषा, राज्य से ऊपर उठकर बीजेपी का एक बड़ा वोट बैंक बनकर उभरा है। इस चुनाव के लिए पार्टी ने जिलास्तर पर अपने करीब 300 दफ्तरों में कॉल सेंटर स्थापित किए हैं, जिसके माध्यम से वह इनसे सीधा संवाद कर रही है।
5) सोशल इंजीनियरिंग
2014 में मोदी लहर के दम पर सत्ता में आने के बाद जब अमित शाह बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने तो पार्टी विभिन्न राज्यों में अलग तरह की सोशल इंजीनियरिंग पर काम करना शुरू कर दिया।
पार्टी ने उन जातियों और वर्गों पर फोकस किया, जो प्रभावशाली जातियों के सामने खुद को पीछे छूटती हुई देख रही थीं। पार्टी ने जाति-आधारित छोटे-छोटे दलों के साथ गठबंधन करना शुरू कर दिया। इससे बीजेपी को अपना जनाधार बढ़ाने में काफी मदद मिली है।
जैसे हरियाणा में पार्टी ने गैर-जाट ओबीसी जातियों और शहरी मतदाताओं पर फोकस किया तो यूपी में गैर-यादव ओबीसी, गैर-जाटव दलित और अन्य पिछड़े वर्ग पर काम किया और पार्टी को चुनावों में लगातार इसका फायदा मिला है।
पिछले पांच साल में पार्टी ने आदिवासी वोटरों के बीच भी बहुत काम किया है, उन्हें नेतृत्व देकर आगे बढ़ाया है। यूपी से लेकर बंगाल, गुजरात, एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बीजेपी का आदिवासियों के बीच जनाधार व्यापक रूप से बढ़ा है।
इस तरह की सोशल इंजीनियरिंग की वजह से ही पार्टी जातिगत जनगणना वाले विपक्ष के कार्ड को अबतक नाकाम करने में सफल रही है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान का चुनाव परिणाम है।
2024 के लोकसभा चुनावों के लिए भी पार्टी के कार्यकर्ता और नेता इस तरह की सोशल इंजीनियरिंग को मजबूत करने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं। पार्टी जातियों के प्रभावशाली नेताओं को पार्टी में शामिल करने के लिए भी प्रेरित कर रही है।
इस तरह से जिस योजनाबद्ध तरीके से बीजेपी चुनाव अभियान का आगाज कर चुकी है, उसमें विपक्ष फिलहाल काफी पिछड़ा हुआ दिख रहा है। ऐसे में अगर अभी चुनाव हो जाएं तो इंडिया ब्लॉक को सत्ताधारी दल का सामना करना मुश्किल हो सकता है।
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