लोकसभा चुनाव 2019: बिहार में कांग्रेस कार्यकर्ता क्यों कह रहे- पार्टी नेता चोर हैं?
पटना। राहुल गांधी देश भर में कहते फिर रहे हैं कि चौकीदार चोर है, लेकिन बिहार में उनके कार्यकर्ता कह रहे हैं कि कांग्रेस नेता चोर हैं। गुरुवार को पटना में कांग्रेस नेताओं पर टिकट बेचने का आरोप लगा। कांग्रेस नेताओं को चोर कहा गया। नारेबाजी हुई, धक्कामुक्की हुई। ये सब कुछ हुआ वरिष्ठ नेताओं के सामने। सांसद अखिलेश सिंह के बेटे को टिकट मिलने के बाद बिहार कांग्रेस में गदर शुरू है। चुनावी जंग में उतरने से पहले, हारने की नौबत आ गयी है। राहुल गांधी एक तरफ नारा गढ़ रहे हैं कि 'हम निभाएंगे’ दूसरी तरफ बिहार के कांग्रेसी कह रहे हैं कि हम टकराएंगे। यहां तक कि दिल्ली से पावर लेकर पटना आये शक्ति सिंह गोहिल की भी मिट्टीपलीद हो गयी है।
गोहिल और अखिलेश पर टिकट बेचने का आरोप
गुरुवार को कांग्रेस के दफ्तर सदाकत आश्रम में चुनाव अभियान समिति की पहली बैठक के पहले ही संग्राम छिड़ गया। बेटिकट हुए निखिल कुमार के समर्थक इस बात से उग्र थे कि अखिलेश सिंह के बेटे को कैसे टिकट मिला। शक्ति सिंह गोहिल और अखिलेश सिंह पर टिकट बेचने का आरोप लगाने के साथ हंगामा शुरू हो गया। मारपीट और धक्कामुक्की होने लगी। शक्ति सिंह गोहिल ने मामला संभालने की कोशिश की तो उनके साथ ठेलमठेल हुई। मुश्किल से गोहिल को बचाया गया। फिर हंगामा कर रहे लोग नारा लगाने लगे, अखिलेश सिंह चोर है। गोहिल को मुंह पर कहा गया कि उन्होंने टिकट बेच दी। हक्काबक्का गोहिल सब कुछ देखते रहे। पिछले कुछ सालों से गुटबाजी और अनुशासनहीनता कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या रही है। गाड़ी को पटरी पर लाने के लिए बार बार अध्यक्ष बदले जाते हैं। राज्य प्रभारी बदले जाते हैं। लेकिन हालात नहीं बदलते। पिछले साल ही गुजरात के गोहिल को बिहार का प्रभारी बनाया गया था। उन्होंने कांग्रेस को बुलंदी पर पहुंचाने के लिए बड़े-बड़े दावे किये थे। लेकिन जब वक्त आया तो उनको सांप सूंघ गया। गुटबाजी में ऐसा उबाल आया कि मारपीट तक हो गयी। गोहिल ने कांग्रेस में जान फूंकने के लिए क्या किया, ये वही जानें।

बाहरी को अहमियत मिलने से सीनियर लीडर नाराज
राजद से कांग्रेस में आये अखिलेश सिंह को अहमियत दिये जाने से पार्टी के वरिष्ठ नेता बेहद नाराज हैं। पहले उनको सांसद बनाया गया। फिर चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बना दिया गया। अब उनके बेटे को रालोसपा से लोकसभा का टिकट भी मिल गया। गुरुवार को 24 विधायकों और प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा ने अपनी नाराजगी दिखा दी। चुनाव अभियान समिति की पहली ही बैठक से ये नदारत रहे। ऐन चुनाव के पहले ये स्थिति खतरे की घंटी है। सदानंद सिंह कांग्रेस के दिग्गज नेता हैं। वे नौ बार से विधायक चुने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाहरी लोगों को तरजीह दिये जाने से पार्टी में संकट खड़ा हो गया है। पार्टी को समर्पित नेताओं और कार्यकर्ताओं पर भरोसा करना चाहिए। कांग्रेस को राजद ने पहले ही मटियामेट कर दिया है। अगर उसके बड़े नेता भी खिलाफ में खड़ा होंगे तो राहुल गांधी के सपने का क्या होगा। कांग्रेस की पक्की मानी जाने वाली सीटें भी अब खतरे में है। सुपौल से रंजीत रंजन के खिलाफ एक राजद नेता ने नॉमिनेशन कर दिया है। साराराम में मीरा कुमार और किशनगंज में डॉ. जावेद की स्थिति भी कोई मजबूत नहीं है। अगर पार्टी में इस तरह सिरफुटौव्वल होती रही तो कांग्रेस चुनाव से पहले ही मुकाबले से बाहर हो जाएगी।

अब माफी मांग रहे शक्ति सिंह गोहिल
शक्ति सिंह गोहिल जैसे बड़े नेता पर टिकट बेचने का आरोप लगा तो खलबली मच गयी। इस मामले में गोहिल को सफाई देनी पड़ी। उन्होंने इस बात को माना कि उम्मीदवारों के चयन में गलती हुई है। अगर किसी के साथ अन्याय हुआ है तो इसके लिए वे माफी मांगते हैं। लेकिन मैंने टिकट नहीं बेचा। कांग्रेस मेरी मां है, मैं कभी सौदा नहीं कर सकता। आरोप से आहत गोहिल ने सफाई क्या दी बिहार कांग्रेस की हकीकत सामने रख दी। उन्होंने माना कि निखिल कुमार को औरंगाबाद से टिकट नहीं दिया जाना एक गलती है। ये गलती क्यों हुई? अखिलेश सिंह को लेकर पार्टी में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। दिल्ली में राहुल गांधी के सामने बिहार के कांग्रेसी एकजुटता की ढोंग करते हैं। पटना पहुंचते ही असलियत पर उतर जाते हैं।












Click it and Unblock the Notifications