Chunavi Kisse: किस्सा रायबरेली सीट का, जहां से खुद इंदिरा गांधी को भी झेलनी पड़ी थी हार
Lok Sabha Chunavi Kisse: लोकसभा चुनाव 2024 के बीच देश में रायबरेली सीट की जमकर चर्चाएं हो रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपनी अमेठी सीट छोड़कर रायबरेली से चुनाव लड़ने जा रहे हैं। ऐसे में आज चुनावी किस्से में बात उसी रायबरेली सीट की होगी, जिसे कांग्रेस की पारंपरिक सीट के साथ 'अभेद' किला भी कहा जाता है।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने चुनावी राजनीति का आगाज 1967 में रायबरेली से ही किया था। जो क्रम 1980 तक चला, लेकिन इस बीच इंदिरा गांधी को भी यहां से चुनावी हार झेलनी पड़ी थी। क्या था वो घटनाक्रम, आइए जानते हैं?

इमरजेंसी के बाद करारी हार
यह बात उस दौर की है, जब पूरे देश में इमरजेंसी के बाद साल 1977 में पहली बार चुनाव कराए गए थे। आजादी के बाद 1951 से लेकर 1971 तक सत्ता में रहने वाली कांग्रेस लेकिन इस बार सरकार के बेदखल हो गई। 1977 का लोकसभा चुनाव भी उसी दौरान हुआ, जब पूरा देश आपातकाल का सामना करने निकला था।
पहली बार गांधी परिवार के सदस्य की हाल
इमरजेंसी के बाद पूरे देश में कांग्रेस विरोधी भयानक लहर चल रही थी। जिसकी चपेट में आकर इंदिरा गांधी से लेकर उनके बेटे संजय गांधी तक चुनाव हार गए थे। ऐसा पहली दफा था जब गांधी परिवार के सदस्य ने चुनाव में करारी हार झेली थी।
जब रायबरेली से हारी थीं इंदिरा गांधी
लोकसभा चुनाव 1977 में इंदिरा गांधी को उनके गढ़ रायबरेली से जनता पार्टी के उम्मीदवार राजनारायण ने मात दी थी। राजनारायण को कुल 1 लाख 77 हजार 719 वोट मिले थे, जो कि करीब 52 फीसदी था। वहीं इंदिरा गांधी को 1 लाख 22 हजार 517 वोट मिले थे, जो कि कुल वोटों का लगभग 36 फीसदी था।
रायबरेली से ही शुरू हुई थी इमरजेंसी की कहानी
बात 1971 के चुनावों की है। तब इंदिरा गांधी ने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार राजनारायण को रायबरेली से 1 लाख 11 हजार 810 वोटों से हराया था। हालांकि राजनारायण को यकीन था कि वो यह चुनाव जीत जाएंगे, लेकिन नतीजे आए तो उन्होंने ने सरकारी तंत्र के दुरुपयोग और चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए चुनाव नतीजे को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी।
इसके बाद हाई कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए राजनारायण की याचिका पर इंदिरा गांधी के निर्वाचन को अवैध घोषित कर दिया। इसके बाद इंदिरा गांधी सुप्रीम कोर्ट गईं। कहा जाता है कि इसी घटना के बाद देश में इमरजेंसी लागू की गई। हालांकि इमरजेंसी के बाद 1977 में दोनों दिग्गज फिर आमने-सामने आए, जिसमें राजनारायण ने बाजी मारते हुए रायबरेली सीट से जीत हासिल करने वाले पहले गैर कांग्रेसी सांसद बने।












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