Chunavi Kisse: जब जनता से खुद अटल जी ने की थी प्रतिद्वंद्वी को जिताने की अपील, जानिए क्या था वो किस्सा?
Lok Sabha Election Chunavi Kisse: गर्मी के मौसम में लोकसभा चुनाव 2024 की सरगर्मियां ने भी सियासत का पारा बढ़ा दिया है। नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद की हैट्रिक लगाने की दौड़ में हैं। इलेक्शन के इस मौसम में वार-पलटवार का दौर जारी है, लेकिन एक वक्त ऐसा भी था, जब चुनावों में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने जान बूझकर हार को चुना था।
सियासत में एक नेता दूसरे को पटखनी देने के लिए क्या-क्या दाव-पेंच लगाते हैं, इसका तमाम उदाहरण हैं, लेकिन क्या कोई नेता खुद अपने लिए हार चुनेगा। शायद कभी नहीं, लेकिन राजनीति में अटल बिहारी वाजपेयी ऐसे ही एक विरले नेता थे, जिन्होंने जनता से अपने प्रतिद्वंद्वी को जिताने की अपील की थी।

चुनावी किस्से में आज बात उसी घटना की होगी, जिसका जिक्र आज भी किया जाता है। यह किस्सा अटल बिहारी वाजपेयी के पहले लोकसभा चुनाव का है, जब 1957 में उन्होंने तीन सीटों पर चुनाव लड़ा था।
1957 के लोकसभा चुनाव में अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय जनसंघ पार्टी के उम्मीदवार थे। वाजपेयी यूपी की बलरामपुर, लखनऊ और मथुरा लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में थे।
ऐसे में मथुरा सीट पर उनके सामने निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले राजा महेंद्र प्रताप सिंह थे। जो कि एक क्रांतिकारी रहे थे। उनका आजादी की लड़ाई में अहम योगदान था। जो कि वे 'आर्यन पेशवा' के नाम से प्रसिद्ध थे।
'मेरी चिंता मत करो...', जब रैली में बोले अटलजी
चुनावों के बीच मथुरा में जनसभा को संबोधित करने पहुंचे अटल जी ने उसको जिताने की अपील की थी। दरअसल, मथुरा के गांधी पार्क में चल रही अपनी रैली में अटल बिहार वाजपेयी ने जनता को संबोधित करते हुए कहा था कि, "मथुरा वालों जैसा प्यार आप मुझे दे रहे हो, ठीक वैसा ही प्यार मुझे बलरामपुर में भी मिल रहा है। इसलिए मैं चाहता हूं कि मथुरा से आप राजा महेंद्र प्रताप को जिताओ और मेरी चिंता मत करो।"
मथुरा में हो गई थी जमानत जब्त
इसी के साथ अपने भाषण में वाजपेयी ने कहा था कि, "ऊपर वाले ने चाहा तो मैं बलरामपुर से जीत जाऊंगा।" इसके बाद हुआ भी कुछ वैसा ही। अटल बिहारी वाजपेयी बलरामपुर से चुनाव जीत गए और मथुरा में उनकी जमानत तक जब्त हो गई। लेकिन एक क्रांतिकारी को जिताने के लिए उन्होंने चुनाव में हार को खुद चुना था।












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