लॉकडाउन: दिल्ली से मध्‍यप्रदेश अपने घर पैदल जा रहे युवक की 200 किमी पर हुई मौत

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के चलते देश भर में 21 दिनों का लॉकडाउन हैं। ऐसे में दिल्ली में रोजगार के लिए आए हजारों की संख्‍या में लोग कोई साधन उपलब्ध न होने के कारण वो अपने सैकड़ों किलोमीटर दूर घर पहुंचने के लिए पैदल ही निकल पड़े हैं। इन्‍हीं में से एक युवक जो कि दिल्ली के रेस्‍टरां में काम करता था वो मध्‍यप्रदेश के मुरैना जिले में स्थित अपने घर पहुंचने के लिए पैदल ही निकल पड़ा। अपने घर पहुंचने के लिए दिल्ली से लगभग 200 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद उसकी तबियत बिगड़ने के बाद मौत हो गई।

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बता दें मरने वाला दिल्ली-आगरा राजमार्ग पर शनिवार की शाम पैदल चल कर मरने वाला व्‍यक्ति 39 वर्षीय रणवीर सिंह हैं। केंद्र सरकार द्वारा कोराना वायरस के चलते राष्ट्रीय लॉकडाउन लागू करने के बाद उसने कोई साधन न मिलने के हालात में अपने घर पैदल ही चल कर जाने का फैसला किया और वो दिल्ली से निकल पड़ा। वो दिल्ली के एक निजी रेस्तरां के लिए होम डिलीवरी बॉय के रूप में काम करता था।रणवीरसिंह मध्‍य प्रदेश के मुरैना जिले के दूरदराज किसी गांव का रहने वाला था। जब वो अपने घर से 100 किलोमीटर की दूरी पर था तभी दिल्ली-आगर एक्सप्रेस हाईवे पर उसको अचानक सीने में दर्द हुआ और वो सड़क पर ही गिर पड़ा।

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पुलिस ने बताया कि पीड़ित नेशनल हाईवे -2 के कैलाश मोड़ के पास गिर पड़ा जिसके बाद एक स्थानीय हार्डवेयर स्टोर के मालिक संजय गुप्ता उसके पास पहुंचे। उन्‍होंने उसको एक दरी पर लिटाया और उसे चाय और बिस्किट के लिए पूछा। लेकिन उसने सीने में दर्द की शिकायत की और अपने जीजा अरविंद सिंह को फोन पर उसकी हालते के बारे में बताने का आग्रह किया और उसी के कुछ देर बाद शाम करीब 6.30 बजे, पीड़ित का निधन हो गया और स्थानीय पुलिस को सूचित किया गया। जिसके बाद एचएचओ अरविंद कुमार, पहुंचे।
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पुलिस ने बताया कि उक्त व्‍यक्ति शुक्रवार की सुबह पैदल ही अपने पैतृक गांव के लिए रवाना हुए था। 200 किलोमीटर की पैदल दूरी से थकावट ही उसके सीने में दर्द का कारण बनी। सएचओ ने कहा, "पूरे एनएच -2 पर, यूपी पुलिसकर्मी ऐसे व्यक्तियों के लिए भोजन के पैकेट और पानी के साथ मौजूद हैं, लेकिन रणवीर की मौत दुर्भाग्यपूर्ण है।"पुलिसकर्मियों ने पोस्टमार्टम के लिए मृतक का शव भिजवा दिया। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार उक्त व्‍यक्ति पिछले तीन वर्षों से दिल्ली के तुगलकाबाद में काम कर रहा था उसके तीन बच्‍चे हैं। वह मुरैना के एक गरीब किसान परिवार का बेटा हैं और परिवार के भरण-पोषण के लिए अपना घर छोड़कर दिल्ली में काम कर रहा था।

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