एनडीए से अलग हुई एलजेपी, जेडीयू के साथ नहीं लड़ेगी चुनाव लेकिन बीजेपी से बना रहेगा याराना

नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे पर दबाव बना रही लोजपा (LJP) सफल नहीं हो पाई। आखिरकार पार्टी ने एनडीए से अलग होने का ऐलान कर दिया। दिल्ली में लोक जनशक्ति पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक में इस पर फैसला लिया गया है। पार्टी की बैठक में सभी की इस बात पर सहमति बनी है कि इस बार विधानसभा चुनाव नीतीश के नेतृत्व में नहीं लड़ा जाएगा।

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    नीतीश की जेडीयू के साथ नहीं लड़ेगी चुनाव

    नीतीश की जेडीयू के साथ नहीं लड़ेगी चुनाव

    पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अब्दुल खालिद ने बताया कि वैचारिक मतभेदों के चलते लोजपा आगामी विधानसभा चुनाव में जेडीयू के साथ नहीं लड़ेगी। रविवार को पार्टी की दिल्ली में संसदीय बोर्ड की लम्बी बैठक चली। बैठक की अध्यक्षता पार्टी अध्यक्ष चिराग पासवान ने की। हालांकि बीजेपी के साथ लोक जनशक्ति पार्टी का केंद्र में गठबंधन जारी रहेगा। बता दें कि पार्टी नेता राम विलास पासवान केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री हैं।

    पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद पार्टी ने बयान जारी कर कहा कि राष्ट्रीय स्तर व लोकसभा चुनाव में भाजपा, लोक जनशक्ति पार्टी का मजबूत गठबंधन है। राजकीय स्तर पर व विधानसभा चुनाव में गठबंधन में मौजूद जनता दल (यूनाइटेड) से वैचारिक मतभेदों के कारण बिहार में लोक जनशक्ति पार्टी ने गठबंधन से अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया है।

    प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ

    प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ

    दिल्ली में हुई पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक में सभी सदस्य मौजूद रहे। इस बैठक में सभी सदस्यों ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया। इस दौरान बीजेपी-एलजेपी सरकार का प्रस्ताव पास किया गया। इसके तहत पार्टी के सभी विधायक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मजबूत करते हुए राज्य में भाजपा-लोजपा सरकार बनाएंगे। चुनाव में पार्टी 'बिहार फर्स्ट-बिहारी फर्स्ट' के नारे के साथ मैदान में उतरेगी।

    बता दें कि लोजपा प्रमुख चिराग पासवान पहले भी नीतीश कुमार के खिलाफ अपनी नाराजगी जता चुके थे। वहीं भाजपा से उनकी बातचीत जारी थी। पिछले महीने बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ चिराग ने छह बार मुलाकात की थी। इस दौरान एक बार भाजपा नेता और गृह मंत्री अमित शाह से भी बात हुई। नाराजगी की शुरुआत तब हुई थी जब पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी एनडीए में शामिल हुए। कहा गया कि नीतीश की पहल पर मांझी आए हैं। इस दौरान चिराग ने बयान दिया कि वह एनडीए का हिस्सा हैं लेकिन उनका गठबंधन बीजेपी के साथ है। चिराग ने कहा कि जेडीयू और मांझी कि हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के साथ उनका कोई गठबंधन नहीं है। वहीं जेडीयू नेता भी कह रहे थे कि उनका एलजेपी के साथ कोई गठबंधन नहीं है। बीजेपी अपने हिस्से में एलजेपी के साथ सीट शेयर करे

    बीजेपी-एलजेपी सरकार के क्या हैं मायने ?

    बीजेपी-एलजेपी सरकार के क्या हैं मायने ?

    रविवार को एलजेपी की संसदीय दल की बैठक में फैसला हुआ है कि पार्टी बिहार में बीजेपी-एलजेपी की सरकार बनाने के लिए काम करेगी। इसके बाद एलजेपी की रणनीति को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है। इसका मतलब निकाला जा रहा है कि लोजपा जेडीयू के उम्मीदवारों के खिलाफ अपने प्रत्याशी उतारेगी। वहीं उन सीटों पर जो गठबंधन में बीजेपी के हिस्से में आई है वहां लोजपा अपने प्रत्याशी नहीं उतारेगी। बता दें कि चिराग पहले ही 143 सीटों पर प्रत्याशी उतारने की बात कर चुके हैं। हालांकि कुछ सीटों पर बीजेपी और लोजपा में दोस्ताना मुकाबला हो सकता है। ये भी कहा जा रहा है कि चुनाव बाद एलजेपी सरकार का हिस्सा हो सकती है। एक संभावना ये भी जताई जा रही है कि चुनाव के बाद एलजेपी और बीजेपी सरकार बनाने की स्थिति में हुए तो मिलकर सरकार बना सकते हैं।

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