केरल तट के पास डूबा मालवाहक जहाज MSC एल्सा 3, सभी 24 क्रू सदस्य सुरक्षित, पर्यावरण संकट की आशंका
Liberian-Flagged cargo ship: केरल के तट से सटे समुद्री क्षेत्र में एक बड़ा समुद्री हादसा सामने आया है। लाइबेरिया फ्लैग्ड कार्गो शिप MSC Elsa 3 शुक्रवार, 24 मई को विझिंजम बंदरगाह से रवाना होकर कोच्चि की ओर जा रहा था। तभी वह समुद्र में अचानक 26 डिग्री झुक गया और उसके कंटेनर पानी में गिरने लगे।
इसके बाद जहाज धीरे-धीरे पानी भरने से समुद्र में डूब गया, जिससे पर्यावरणीय क्षति की गहरी आशंका जताई जा रही है। जहाज के झुकने के बाद 21 विदेशी क्रू सदस्यों को पहले ही तटरक्षक बल ने बचा लिया था। इनमें एक रूसी, 20 फिलीपीनी, दो यूक्रेनी और एक जॉर्जियन नागरिक शामिल हैं।

हालांकि जहाज की स्थिति बिगड़ने के बावजूद, कंपनी के निर्देशानुसार तीन क्रू सदस्य, जिनमें कप्तान और मुख्य अभियंता भी शामिल थे, शनिवार देर रात तक जहाज पर ही डटे रहे। रविवार सुबह, भारतीय नौसेना के पोत INS सुजाता ने बेहद खतरनाक परिस्थितियों में इन तीनों को सुरक्षित बाहर निकाला।
MSC एल्सा 3 डूबा, समुद्र में गिरा जहरीला माल
जहाज के मालिकान ने शुक्रवार शाम को ही भारतीय अधिकारियों को सूचित किया था कि MSC एल्सा 3 26 डिग्री झुक चुका है और मदद की सख्त आवश्यकता है। यह जहाज विझिंजम पोर्ट से कोच्चि के लिए रवाना हुआ था। हादसे के समय जहाज में 640 कंटेनर थे, जिनमें से 13 कंटेनरों में खतरनाक रसायन भरे थे। विशेष रूप से 12 कंटेनरों में कैल्शियम कार्बाइड था, जो पानी के संपर्क में आने पर ज्वलनशील गैस छोड़ता है। इसके अलावा जहाज में 84.44 मीट्रिक टन डीज़ल भी भरा हुआ था।
INS सुजाता और कोस्ट गार्ड की सक्रियता से टला हादसा
भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के पोत मौके पर तैनात हैं, जो स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। रक्षा सूत्रों ने बताया कि जहाज डूब चुका है, लेकिन फिलहाल और अधिक झुकाव नहीं हो रहा है। हालांकि रविवार तड़के जहाज के और अधिक डूबने के संकेत मिले हैं। INS सुजाता, डूबते जहाज के पास लगातार तैनात है, जबकि जहाज की मालिक कंपनी का एक और जहाज मदद के लिए घटनास्थल पर पहुंच चुका है
शिप में था खतरनाक रसायन और डीजल
MSC Elsa 3 पर कुल 640 कंटेनर लदे थे, जिनमें 13 कंटेनर खतरनाक रसायन से भरे थे। इनमें से 12 कंटेनर में कैल्शियम कार्बाइड था, जो पानी के संपर्क में आने पर अत्यधिक ज्वलनशील गैस (एसिटिलीन) पैदा करता है। इसके अलावा जहाज के टैंकों में 84.44 मीट्रिक टन डीजल भी था, जो समुद्र में फैलने की स्थिति में गंभीर तेल प्रदूषण का कारण बन सकता है।
भारतीय तटरक्षक बल ने एक बयान में बताया कि अभी तक कोई तेल रिसाव दर्ज नहीं हुआ है, लेकिन उन्होंने तेल फैलाव की संभावित स्थिति से निपटने के लिए विशेष विमान तैनात किए हैं, जो उन्नत तेल फैलाव मैपिंग तकनीक से लैस हैं। तटरक्षक बल ने बताया कि केरल का तट संवेदनशील जैवविविधता का क्षेत्र है और एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी है, इसलिए वे राज्य प्रशासन के साथ मिलकर सभी संभावित हालात के लिए तैयार हैं।
तटीय लोगों के लिए चेतावनी जारी
केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (KSDMA) ने तटीय क्षेत्रों में रह रहे लोगों को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि कोई कंटेनर, कार्गो या तेल का रिसाव तट पर दिखाई दे, तो उसे न छुएं और तुरंत पुलिस को सूचित करें। उन्होंने कहा कि कैल्शियम कार्बाइड जैसे रसायनों के संपर्क में आना जानलेवा हो सकता है, और तट पर तेल की पतली परतें दिखाई दे सकती हैं।
विदेशी जहाज से मदद और संभावित टोइंग ऑपरेशन
घटना के बाद MSC Elsa 3 की मूल कंपनी का एक अन्य जहाज सहायता के लिए घटनास्थल पर पहुंच चुका है। इस बीच, रक्षा प्रवक्ता ने जानकारी दी है कि INS सुजाता फिलहाल डूबे हुए जहाज के पास तैनात है और यह जांच की जा रही है कि क्या जहाज को टो यानी खींच करके हटाया जा सकता है।
इस दुर्घटना ने न केवल समुद्री यातायात को खतरे में डाला है, बल्कि केरल के पर्यावरण और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी एक गंभीर चुनौती पेश की है। तटरक्षक बल और राज्य प्रशासन सतर्कता के साथ स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।
स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आम नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की गई है। भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचाव के लिए मालवाहक जहाजों की निगरानी और सुरक्षा मानकों को और कड़ा करने की आवश्यकता है।












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