'किसान विरोधी हैं केंद्र के कृषि विधेयक', शिरोमणि अकाली दल ने राष्ट्रपति से लगाई गुहार
शिरोमणि अकाली दल के नेताओं ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलकर कृषि विधेयकों को किसान विरोधी बताया।
नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कृषि विधेयकों को लेकर शिरोमणि अकाली दल के नेताओं ने सोमवार को दिल्ली में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व में दिल्ली पहुंचे नेताओं ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि वो राज्यसभा में पास हुए कृषि विधेयकों पर हस्ताक्षर ना करें। आपको बता दें कि दो प्रमुख कृषि विधेयकों को भारी हंगामे के बीच रविवार को राज्यसभा में पास किया गया था। ये विधेयक लोकसभा में पहले ही पास किए जा चुके हैं और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ये कानून बन जाएंगे।

'किसान विरोधी हैं केंद्र के कृषि विधेयक'
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद सुखबीर सिंह बादल ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'केंद्र सरकार के कृषि विधेयक पूरी तरह से किसान विरोधी हैं और इन्हें जबरन राज्यसभा में पास कराया गया है। हमारी पार्टी के नेताओं ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात कर निवेदन किया है कि वो इन विधेयकों पर हस्ताक्षर ना करें और इन्हें वापस संसद में भेज दें।' इससे पहले शनिवार को सुखबीर सिंह बादल ने कहा था कि जब तक केंद्र इन विधेयकों को वापस नहीं लेता, तब तक सरकार से कोई बात नहीं की जाएगी।

'लोकतंत्र का अर्थ आम सहमति है, नाकि बहुमत के साथ उत्पीड़न'
गौरतलब है कि दो कृषि विधेयकों को राज्यसभा में रविवार को पास किया गया था। इन विधेयकों के पास होने के बाद सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि आज देश के करोड़ों लोगों और लोकतंत्र के लिए एक दुखद दिन है। इस मुद्दे पर सुखबीर सिंह बादल ने रविवार को ट्वीट करते हुए कहा, 'हम राष्ट्रपति से आग्रह करते हैं कि वो देश के किसानों, मजदूरों, आढ़तियों, मंडी में काम करने वाले गरीब लोगों और दलितों की ओर से इस मामले में हस्तक्षेप करें, अन्यथा ये लोग हमें कभी माफ नहीं करेंगे। लोकतंत्र का अर्थ आम सहमति है, नाकि बहुमत के साथ उत्पीड़न करना।'
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हरसिमरत कौर दे चुकी हैं कैबिनेट से इस्तीफा
आपको बता दें कि केंद्र के कृषि विधेयकों के विरोध में शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर पहले ही केंद्रीय कैबिनेट से इस्तीफा दे चुकी हैं। शिरोमणि अकाली दल के अलावा 12 अन्य विपक्षी पार्टियों ने भी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात के लिए समय मांगा है। वहीं, इन विधेयकों के समर्थन में सरकार का कहना है कि कृषि में सुधार से जुड़े ये बिल किसान को मंडी के अलावा अपनी उपज बाहर भी बेचने की आजादी देंगे और इससे किसानों की आय बढ़ेगी।












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