काले कुर्ते और साड़ियों में संसद पहुंचे विपक्षी सांसद, कहा- सरकार हमारी आवाज को दबा रही
नई दिल्ली, 10 अगस्त: संसद के मौजूदा मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच काफी तनातनी देखने को मिल रही है। पेगासस मामले पर सरकार के विपक्ष की बहस और जांच की मांग नहीं मानने के चलते संसद में लगातार हंगामा हो रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार को विपक्षी दलों के सांसद काले कुर्ते पहनकर संसद पहुंचे। महिला सांसद काली साड़ी पहने हुए थीं। वहीं कई विपक्षी सांसद जो काले कुर्ते नहीं पहने थे, उन्होंने बांह पर काली पट्टी बांधकर अपना विरोध जताया।

विपक्षी सांसदों का कहना है कि सरकार संसदीय परंपरा का अपमान करते हुए तानाशाही रवैया अपना रही है। विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है, बिना बहस के बिल पास किए जा रहे हैं। ऐसे में अपना विरोध जताने के लिए हमने ये काली पट्टियां बांधी हैं। शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा है कि राज्यसभा में पेगासस मामले से संबंधित उनके सवालों को अनुमति ही नहीं दी गई।
पेगासस मामले को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। विपक्षी दलों की मांग है कि इस मुद्दे पर सदन के अंदर चर्चा कराई जाए और गृहमंत्री इस पर जवाब दें। वहीं सरकार इस पर बहस को राजी नहीं है। ऐसे में सदन में कामकाज नहीं हो पा रहा है। विपक्ष का कहना है कि ये बहुत गंभीर मुद्दा है और वो इस पर पीछे नहीं हट सकता है। सरकार को इस पर जवाब देना ही होगा।
क्या है पेगासस का मामला
दुनिया के कई बड़े मीडिया ग्रुप ने एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें दावा किया गया है कि इजराइली कंपनी के जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस को फोन में भेजकर कई देशों में हजारों लोगों की जासूसी हुई। इसमें भारत का भी नाम है। भारत में दो मंत्रियों, कई विपक्ष के नेताओं, पत्रकारों, जज, कारोबारी और एक्टिविस्ट के नाम सामने आए हैं। इसी को लेकर विपक्षी नेता और कई संगठन जांच चाहते हैं।
सरकार विपक्ष को बता रही जिम्मेदार
संसद में हंगामे को लेकर सरकार विपक्ष को जिम्मेदार बता रही है। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आज कहा, मानसून सत्र की शुरुआत से ही भारत सरकार कह रही है कि हम कृषि से संबंधित किसी भी विषय पर विस्तृत चर्चा करने के लिए तैयार हैं। राज्यसभा में आज कृषि पर चर्चा शुरू ही हुई थी लेकिन कांग्रेस, टीएमसी, आप का रवैया अलोकतांत्रिक रहा। राज्यसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस और टीएमसी के रवैये ने लोकतंत्र को एक बड़ा झटका दिया है और यह साबित करता है कि नए कृषि कानूनों में कुछ भी काला नहीं है। काला केवल विपक्षी नेताओं के कपड़ों में देखा जा सकता है।












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