लक्षद्वीप: आयशा सुल्ताना पर राजद्रोह का केस दर्ज होने पर BJP में बगावत, कई नेताओं का इस्तीफा
तिरुवनंतपुरम, 12 जून। केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप में भाजपा के लिए स्थितियां मुश्किल होती जा रही हैं। लक्षद्वीप की फिल्म निर्देशक आयशा सुल्ताना पर राजद्रोह का मुकदमा लगाए जाने के विरोध में लक्षद्वीप में बीजेपी के कई नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इसमें पार्टी के महासचिव अब्दुल हमीद मल्लीपुझा भी शामिल हैं। इन नेताओं ने फिल्म निर्माता आयशा पर राजद्रोह के केस को गलत और अन्यायपूर्ण बताया है।

आयशा के समर्थन में बागी बने बीजेपी नेता
आयशा सुल्ताना लक्षद्वीप की रहने वाली फिल्म निर्माता है। उनके ऊपर एक टीवी कार्यक्रम में लक्षद्वीप के प्रशासक पर उनकी टिप्पणी को लेकर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज हुआ है। बीजेपी की लक्षद्वीप इकाई के अध्यक्ष अब्दुल खादर की शिकायत के बाद पुलिस ने आयशा सुल्ताना के खिलाफ ये मामला दर्जा किया था। शिकायत में बीजेपी नेता ने आयशा सुल्ताना पर टीवी कार्यक्रम के दौरान केंद्र शासित प्रदेश में कोविड-19 फैलने को लेकर गलत खबर फैलाने का आरोप लगाया गया था। पुलिस केस दर्ज होने के बाद बीजेपी के कई नेताओं ने विरोध दर्ज कराते हुए अपना इस्तीफा दे दिया।
पहले से ही लक्षद्वीप में नए कानूनों को लेकर भाजपा को विरोध का सामना कर रही है। ऐसे में अपनी ही पार्टी के नेताओं का बगावत कर जाने से बीजेपी की मुश्किल बढ़ गई है।
बागी नेताओं ने लक्षद्वीप बीजेपी के अध्यक्ष अब्दुल खादर को लिखे अपने पत्र में कहा है ऐसे समय में लक्षद्वीप में लोग भाजपा कार्यकर्ता और केंद्र शासित क्षेत्र के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल की "अलोकतांत्रिक कार्रवाई" का विरोध कर रहे हैं आपने सुल्ताना के खिलाफ एक "झूठी और अनुचित शिकायत" दर्ज कर उसके परिवार और उनके भविष्य को बर्बाद किया है।
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आयशा के विरोध के अधिकार का समर्थन
पत्र में आगे कहा गया है कि पटेल द्वारा की गई कार्रवाई "जन विरोधी, लोकतंत्र विरोधी और लोगों के बीच अत्यधिक पीड़ा पैदा करने वाली" थी।
पत्र में बागी नेताओं ने आगे कहा "आप यह भी जानते हैं कि लक्षद्वीप के कई बीजेपी नेताओं ने पहले ही प्रशासक और जिला कलेक्टर के गलत कार्यों के खिलाफ आवाज उठाई है। ठीक उसी तरह चेटियाथ निवासी आयशा सुल्ताना ने भी मीडिया में अपनी राय साझा की थी।"
लक्षद्वीप में उठे विवाद के बीच यह दूसरी बार है जब पार्टी नेताओं ने बड़ी संख्या में इस्तीफा दिया है। इसके पहले 8 बीजेपी नेताओं ने मई में प्रशासक प्रफुल पटेल की कार्रवाई के विरोध में पार्टी छोड़ दी थी।

आयशा सुल्ताना पर क्या है आरोप?
फिल्म निर्माता, एक्ट्रेस, प्रमोशनल मॉडल आयशा सुल्ताना लक्षद्वीप का जाना पहचाना नाम हैं। वह केंद्र सरकार की तरफ से भेजे गए प्रशासक प्रफुल पटेल के कामों की आलोचना भी खुलकर करती हैं। उन्होंने मलयालम टीवी चैनल पर एक बहस में प्रफुल पटेल को कथित तौर पर जैविक हथियार कह दिया था। उन्होंने लक्षद्वीप में कोरोना वायरस के संक्रमण के लिए केंद्रीय प्रशासक को जिम्मेदार ठहराते हुए ये टिप्पणी की थी। आयशा ने कहा था 'लक्षद्वीप में कोविड-19 के शून्य केस थे। अब रोजाना 100 केस सामने आ रहे हैं। क्या केंद्र ने बायो-वेपन तैनात किया है। मैं स्पष्ट रूप से कह सकती हूं कि केंद्र सरकार ने बायो-वेपन (जैव-हथियार) तैनात किया है।'
उनकी इसी टिप्पणी के खिलाफ बीजेपी की लक्षद्वीप इकाई के अध्यक्ष अब्दुल खादर हाजी ने आयशा के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायत दर्ज होने के बाद आयशा सुल्ताना ने अपने फेसबुक पेज पर न झुकने का संकेत देते हुए लिखा था डर वो चीज है जो मेरे पास नहीं है। आयशा पर मुकदमा कहां जाएगा यह तो नहीं पता लेकिन फिलहाल लक्षद्वीप में चल रहा विवाद कम होने की बजाय बढ़ता ही जा रहा है और साथ ही भाजप के लिए खतरा भी।












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