हेमा मालिनी ने कभी गेहूं काटा था, अब प्रियंका गांधी ने झाड़ू लगाई
नई दिल्ली, 06 अक्टूबर। राजनीति हाथी के दांत की तरह है। खाने के लिए और, दिखाने के लिए और। अपनी राजनीतिक ब्रांड वैल्यू को बढ़ाने के लिए नेता तरह-तरह के स्वांग रचते हैं। जनता के दिल में जगह बनाने के लिए वे वैसा ढोंग करते हैं जिसका उनकी वास्तविक जिंदगी से कुछ लेना देना नहीं होता।

अब प्रियंका गांधी और हेमा मालिनी की ही बात ले ले लीजिए। 500 करोड़ सम्पत्ति की मालकिन प्रियंका गांधी 85 करोड़ के बंगले में रहती है। उनके पति रॉबर्ट वाड्रा के पास भी करीब 500 करोड़ की सम्पत्ति है। इसके बावजूद उन्होंने नजरबंदी के दौरान अपने कमरे में झाड़ू लगायी। इसी तरह लोकसभा चुनाव (2019) के दौरान हेमा मालिनी हवाई जहाज से मथुरा आयीं। अचानक खेत में पहुंच कर गेंहूं काटने लगीं। वे भारत की सबसे सफल अभिनेत्रियों में एक हैं। करीब 500 करोड़ सम्पत्ति की मालकिन हैं। न प्रियंका अपने घर में झाड़ू लगाती होंगी न हेमा मालिनी कभी खेत में फसल काटने गयी होंगी। लेकिन राजनीति चमकाने के लिए उन्होंने ऐसा किया।

फोटो की राजनीति और दिखावा
कुछ नेता मानते हैं कि राजनीति में करने से अधिक करते हुए दिखना जरूरी है। कभी ये टोटका कामयाब हो जाता है और कभी नाकामयाब। हेमा मालिनी ने फसल काटने का स्वांग भर के तो चुनाव जीत लिया लेकिन प्रियंका अभी तक सफल नहीं हुई हैं। उन्होंने अभी तक खुद तो चुनाव नहीं लड़ा है लेकिन कांग्रेस महासचिव होने के नाते उन पर पार्टी को जिताने की बहुत बड़ी जिम्मेवारी है। चार महीना पहले प्रियंका चुनाव प्रचार करने के लिए असम गयीं थीं। चाय बागान मजदूरों को प्रभावित करने के लिए उन्होंने सिर पर टोकरी बांध कर खुद चाय की पत्तियां तोड़ी। तस्वीर की खूब चर्चा भी हुई। लेकिन जब नतीजे निकले तो कांग्रेस चुनाव हार गयी। प्रियंका गांधी पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में पांव जमाने के लिए राजनीति टोटकों पर कुछ ज्यादा ही ध्यान दे रही हैं। फरवरी 2021 में प्रियंका की दो तस्वीरों की जबर्दस्त चर्चा हुई। 11 फरवरी को वे अपनी पुत्री मिराया के साथ प्रयागराज गयीं थीं। आनंद भवन में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक के बाद वे संगमतट पर चली गयीं।

कभी नाव चलायी, कभी कार का शीशा पोछा
उन्होंने अपनी पुत्री के साथ पूजा अर्चना की। फिर संगम में पतवार संभाल कर नाव चलाने लगीं। जिसने भी देखा, भौंचक्का रह गया। इसी तरह प्रियंका 4 फरवरी 2021 को रामपुर जा रहीं थीं। 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर रैली के दौरान रामपुर के नवप्रीत सिंह की मौत हो गयी थी। प्रियंका नवप्रीत सिंह के परिजनों से मिलने रामपुर जा रही थीं। रास्ते में कोहरा था। विंडस्क्रीन पर पानी की बूंदें जमा हो जाने से ड्राइवर को गाड़ी चलाने में दिक्कत हो रही थी। प्रियंका ने बीच रास्ते में गाड़ी रुकवायी। नीचे उतरीं और खुद ही कपड़े से विंडस्क्रीन साफ करने लगीं। उनके साथ उत्तर प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू भी थे। यह देख कर वे भी कार का शीशा पोछने लगे। इस मौके पर एक फोटो सेशन भी हुआ। इसकी तस्वीर सोशल मीडिया, न्यूज चैनल और अखबारों में छा गयी। कहां तो प्रियंका मातमपुर्सी के लिए जा रहीं थीं और कहां उन्होंने इस यात्रा को पोलिटिकल इवेंट में बदल दिया। सब राजनीति की माया है।

हेमा मालिनी का स्वांग
हेमा मालिनी मथुरा से भाजपा की सांसद हैं। सफल फिल्म अभिनेत्री रही हैं। अभिनयकला की विरासत से उन्होंने राजनीति को नये सांचे में ढाला है। 2014 में वे मथुरा से सांसद चुनी गयीं थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में माना जा रहा था कि मुकबला बहुत कठिन है। जाट बहुल इस क्षेत्र में हेमा मालिनी के सामने सीट बचाने की चुनौती थी। उन्होंने ग्रामीण वोटरों और किसानों को लुभान के लिए अपने चुनावी प्रचार में अभिनय का रंग भर दिया। आमतौर पर कोई किसान काला चश्मा लगा कर ट्रैक्टर नहीं चलाता। लेकिन हेमा मालिनी फिल्म स्टार रह चुकी थीं। उन्होंने ग्लैमर के तड़के के साथ ट्रेक्टर की सवारी की। खेत जोतने का दिखावा किया। काला चश्मा और चमचमाती साड़ी में वे स्टीयरिंग व्हील पकड़ कर बैठी रहीं। फोट खींचा गया। देखने वालों की भीड़ लग गयी। जनता गदगद हो गयी। एक दिन चुनाव प्रचार के दौरान उनका काफिला खेतों के किनारे से गुजर रहा था। उस समय गेहूं की कटाई चल रही थी। हेमा मालिनी ने एक जगह गाड़ी रोकने के संकेत दिया। वे कार से उतरीं और फसल काट रहे किसानों के बीच चली गयीं। एक महिला से हसिया लिया। किसी तरह एक एक मुट्ठी गेंहू के डंठलों को पकड़ा। जैसे तैसे हसिया चलाया। गेंहू काट लेने के बाद हवा में हाथ लहरा दिये। जैसे मैदान मार लिया। विरोधियों ने इसे पॉलिटिकल स्टंट कहा। लेकिन जब नतीजे निकले तो हेमा मालिनी करीब तीन लाख वोटों से चुनाव जीत गयीं। राजनीति में छवि बनाने के लिए अक्सर प्रतीकों का सहारा लिया जाता है। हेमा मालिनी और प्रियंका गांधी जैसे नेता इन प्रतीकों का इसलिए सहारा लेते हैं क्यों कि यह एक रास्ता बहुत आसान है।












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