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Kuwait Fire: भारतीय श्रमि‍कों को लुभा रहा कुवैत, मौत के 'कुएं' में यूं धकेल रहे कबूतरबाज! आंकड़ों में समझें

​​Kuwait Fire Tragedy: दुन‍िया के 7 खाड़ी देशों में से एक कुवैत भारतीय श्रम‍िकों के लि‍ए मौत का गढ़ बनता नजर आ रहा है। 12 जून को अल-मंगफ क्षेत्र स्‍थि‍त 6 मंज‍िला भारतीय श्रमिक आवासीय इमारत में आग लगने से करीब 41 से ज्‍यादा लोगों की मौत गई। मरने वालों में ज्‍यादातर भारतीय बताए गए हैं। यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है।

आपको बता दें क‍ि कुवैत कच्चे तेल के सबसे बड़े उत्‍पादक देशों में से एक है। इसल‍िए, भारतीय कामगारों/श्रम‍िकों के लिए कुवैत एक बड़ा आय का जर‍िया माना जाता है। यही वजह है क‍ि हर साल लाखों की संख्‍या में भारतीय मजदूर कुवैत जाते हैं। कुवैत में भारतीय मजदूरों की बढ़ती मांग की वजह से कबूतरबाज(एजेंट) भी सक्रिय रहते हैं।

Kuwait Fire Tragedy

भारतीय कामगारों को अच्‍छी पगार का लालच दिखाकर 70 से 80 हजार रुपए लेकर विदेश खपने के ल‍िए भेज द‍िया जाता है। अगर चार साल 2019 से 2022 के आंकड़ों को देखें तो, साफ नजर आता है क‍ि कुवैत में प्रत्‍येक साल भारतीय श्रम‍िकों की संख्‍या बढ़ी है। ऐसे में सभी के जहन में यह सवाल उठना लाजमी है क‍ि विदेशों में क‍ितने भारतीय श्रमि‍क कार्यरत हैं? श्रमि‍कों क‍िन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है? ज‍िंदगी आम तौर पर कैसी होती है? आइए इस खबर के जर‍िए सबकुछ जानते हैं....

खाड़ी देशों में क‍ितने भारतीय श्रमि‍क (अनुमानित संख्या)?

  1. बहरीन- 308662
  2. कुवैत- 924687
  3. ओमान- 653500
  4. कतर- 844499
  5. सऊदी अरब-2465464
  6. संयुक्त अरब अमीरात-3554274
  7. कुल-8751086

नोट- व‍िदेश मंत्रालय के 2022 के आंकड़ों के मुताबि‍क

Kuwait Fire Tragedy

कुवैत सबसे बड़ा अपराधी?
सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में विदेश मंत्रालय से प्राप्त जानकारी से पता चलता है कि खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) देशों में भारतीय प्रवासी श्रमिक कठिन परिस्थिति में हैं और उन्हें विभिन्न श्रम एवं मानवाधिकार उल्लंघनों का सामना करना पड़ रहा है।

2019 से 30 जून 2023 तक बहरीन, ओमान, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावासों को भारतीय प्रवासी श्रमिकों से कुल मिलाकर 48,095 श्रम शिकायतें प्राप्त हुईं। कुवैत 23,020 शिकायतों के साथ सूची में सबसे ऊपर है, उसके बाद सऊदी अरब 9,346 शिकायतों के साथ दूसरे स्थान पर है। ओमान 7,666 शिकायतों के साथ तीसरे स्थान पर है, यूएई 3,652 शिकायतों के साथ चौथे स्थान पर है, बहरीन 2,702 शिकायतों के साथ पांचवें स्थान पर है, और कतर 1,709 शिकायतों के साथ छठे स्थान पर है।

व‍िदेशों में भारतीय श्रमिक इन क्षेत्रों पर कार्यरत

  • कंस्‍ट्रक्‍शन एर‍िया: खासकर दुन‍िया के मध्य पूर्व (अल्जीरिया, बहरीन, मिस्र, ईरान, इराक, इज़राइल, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, लीबिया, मोरक्को, ओमान, फिलिस्तीन, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, ट्यूनीशिया, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात और यमन) में बड़ी संख्या में भारतीय मजदूर निर्माण कार्यों में लगे होते हैं।
  • डोमेस्‍ट‍िक वर्क : भारतीय महिलाएं और पुरुष घरेलू सहायक के रूप में काम करते हैं।
  • सव‍िर्स एर‍िया: होटल, रेस्तरां, और अन्य सव‍िर्स एर‍िया ऐसे हैं, ज‍िसमें भारतीय कामगारों की मध्य पूर्व में भूम‍िका नजर आती है।
  • टेक्‍नीकल एर‍िया: उच्च कौशल वाले भारतीय पेशेवर आईटी, स्वास्थ्य सेवा, इंजीनियरिंग और अन्य क्षेत्रों में कार्यरत पाए जाते हैं।
Kuwait Fire Tragedy

श्रमिकों को झेलनी पड़ती हैं ये चुनौतियां

  • शोषण और दुर्व्यवहार: खासकर लो स्‍कील वर्कर्स यानी निम्न कुशल श्रमिकों को अक्सर अनुबंध की शर्तों के विपरीत कम सैलरी, लंबे वर्कीं हावर्स, और असुरक्षित कार्य परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
  • कानूनी और सामाजिक सुरक्षा: कई मजदूरों को उनके कार्यस्थल पर कानूनी सुरक्षा और सामाजिक लाभ नहीं मिलते।
  • भाषा और सांस्कृतिक संबंधी: विदेशी देशों में भाषा और संस्कृति में अंतर होने के कारण उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
  • स्वास्थ्य संबंधी: असुरक्षित कार्य परिस्थितियों के कारण कई मजदूरों को स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
  • लंबे कार्य घंटे: श्रमि‍कों से दिन में 12-16 घंटे काम करवाया जाता है, बिना उचित आराम या अवकाश के।
  • आवास और भोजन: कई बार ठेकेदारों द्वारा दिए गए आवास और भोजन की स्थिति अक्सर बहुत खराब होती है। कई मजदूर अत्यधिक भीड़भाड़ वाले और अस्वस्थ आवासों में रहते हैं।
  • दस्तावेज जब्त करना: ठेकेदार मजदूरों के पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज जब्त कर ल‍िए जाते हैं, जिससे वे बंधक बनकर रह जाते हैं और वापस भारत लौटना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
  • मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न: कई मजदूरों को मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, जिसमें दुर्व्यवहार और धमकियां शामिल हैं।
  • सामाजिक अलगाव: विदेशी स्थानों पर, श्रम‍िक अपने परिवार और समुदाय से दूर होते हैं, जिससे उन्हें सामाजिक अलगाव का सामना करना पड़ता है।
  • आर्थिक तंगी: कम वेतन और अनियमित भुगतान के कारण श्रम‍िक अक्सर आर्थिक तंगी में रहते हैं और अपने परिवार को पर्याप्त धन नहीं भेज पाते।

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