मिसाल: हिंसा के बीच मुस्लिम विधवा मां की हिंदू पड़ोसियों ने की मदद, करवाई बेटी की शादी

मुस्‍लिम विधवा मां की बेटी की शादी में हिंदू पड़ोसियों ने की मदद

कोलकाता, 14 जून: भाजपा पूर्व प्रवक्‍ता नूपुर शर्मा के द्वारा पैंगबर पर की गई कथित विवादित टिप्‍पणी के बाद पूरे देश में हिंसक विरोध देखा गया। भाजपा नेताओं द्वारा अभद्र भाषा के मुद्दे पर बड़े पैमाने पर मचे बवाल के बीच कोलकाता में हिंदू समाज के लोगों ने एक पड़ोसी विधवा महिला की मदद करके एक बार फिर साबित कर दिया है अभी भी सबसे बड़ा धर्म इंसानियत ही है।

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दरअसल, तीन बेटियों और एक बेटे की मां इडेनेसा मलिक एनएच-6 के पास एक छोटे से घर में रहती हैं, जहां प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर दिया और उसी दिन उसकी बेटी की शादी थी। उसकी बेटी की शादी कैसे होगी ये सोचकर वो परेशान थी तभी उसके पड़ोस में रहने वाले हिंदू परिवारों ने उसकी मदद की।

हिंदू पड़ोसी रविवार को उस मुस्लिम विधवा के साथ खड़े थे, जिनकी बेटी की शादी अशांति के कारण स्थगित की जा सकती थी। दुल्हन की ससुराल तक सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए पड़ोसियों ने दूल्हे और अन्य मेहमानों के स्वागत से लेकर हर चीज का ध्यान रखा।

तीन बेटियों और एक बेटे की मां इडेनेसा मलिक ने बताया हमारे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। जब प्रशासन ने धारा 144 लागू कर दी तो मैं चिंतित थी। मेरे पास अपनी बेटी पाकीजा की शादी को स्थगित करने के अलावा कोई रास्ता नहीं था, जो रविवार को होने वाली थी। लेकिन मेरे हिंदू पड़ोसी आगे आए और मुझे आश्वासन दिया कि वे सब कुछ संभाल लेंगे।

इद्देनेसा के पड़ोसी तापस कोडाली ने बताया मैंने लखीकांत कयाल और उत्तम डोलुई ने शादी की सारी जिम्मेदारी ली। उन्‍होंने कहा हम एक ही गांव में एक साथ पले-बढ़े। हम हमेशा एक दूसरे के साथ खड़े रहे। जब पाकीज़ा की मां चिंतित थी, तो हमने उसकी मदद करने का फैसला किया,

सीआरपीसी की धारा 144 लागू होने के कारण तीनों ने थाने जाकर शादी के अवसर पर बैठक की अनुमति ली। इडेनेसा ने आठ साल पहले अपने पति को खो दिया था। कायल ने बताया मां और उसके बच्चे स्थानीय क्लब द्वारा आयोजित सभी कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। एक नागरिक के रूप में यह हमारा कर्तव्य था कि हम उसके साथ खड़े हों।

इद्देनेसा ने बताया कि उसने अपनी बेटी की शादी में करीब 300 मेहमानों को आमंत्रित किया था। लेकिन केवल 150 ही आए। मेरे हिंदू पड़ोसियों ने उनका स्वागत किया और भोजन और अन्य सुख-सुविधाओं का ध्यान रखा। उन्होंने मुझे एक कार किराए पर लेने में भी मदद की ताकि पाकीजा अपने ससुराल सुरक्षित जा सके। मैं जीवन भर उनका आभारी रहूंगा।

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