Kolkata Doctor Case: क्यों निर्भया कांड से भी भयावह होता जा रहा है, कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामला?
Kolkata Doctor Case news: कोलकाता के मशहूर आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक महिला ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुई शारीरिक दरिंदगी और उसकी जघन्य हत्या के बाद मामले को दबाने के लिए हुई कथित लीपापोती ने देश की सर्वोच्च अदालत को भी झकझोर कर रख दिया है।
31 वर्षीय ट्रेनी डॉक्टर से रेप और उसकी हत्या के मामले की जांच पर उठ रहे सवालों के बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है। गुरुवार (22 अगस्त, 2024) को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर बंगाल सरकार की एजेंसियों पर जितनी सख्त टिप्पणियां की हैं, उससे इस मामले की भयानकता पर सर्वोच्च अदालत की भी चिंता जाहिर हुई है।

कोलकाता कांड पर बंगाल प्रशासन के रवैए पर सुप्रीम कोर्ट भी चिंतित
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है:-
'30 साल में पुलिस की ऐसी लापरवाही नहीं देखी'- जस्टिस जेबी पारदीवाला।
'पश्चिम बंगाल पुलिस का रवैया शर्मनाक है'
'अप्राकृतिक मौत दर्ज करने से पहले पोस्टमॉर्टम कैसे?'
'पोस्टमॉर्टम के बाद क्राइम सीन की घेराबंदी की गई'
'अस्पताल प्रशासन आंखें मूंदे रहा'
'ये चौंकाने वाला केस है'
'लगता है मैजिस्ट्रेट रिपोर्ट में बाद में पन्ने जोड़े गए'
कोलकाता कांड की जांच पर घिर रही है बंगाल सरकार
सुप्रीम कोर्ट की इन टिप्पणियों से यह जाहिर है कि इस वारदात में शुरू से पश्चिम बंगाल सरकार पर जो आरोप लग रहे हैं, वह बेवजह नहीं हैं। सीबीआई ने भी गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी स्टेटस रिपोर्ट में पुलिस और अस्पताल प्रशासन पर बहुत ही संगीन आरोप लगाए हैं।
पूरे केस में लीपापोती की कोशिश हुई- सीबीआई
सीबीआई ने साफ तौर पर कहा है कि 'क्राइम सीन से छेड़छाड़ की गई'। 'पूरे केस में लीपापोती की कोशिश हुई'। 'पीड़िता का अंतिम संस्कार करवाए जाने के बाद एफआईआर दर्ज हुई'। 'प्रोटोकॉल पता होते हुए भी क्राइम सीन सील नहीं किया गया।'
आरजी कर कांड को लेकर बंगाल से लेकर देशभर में हो रहे हैं प्रदर्शन
9 अगस्त को जब से आरजी कर मेडिकल कॉलेज के सेमिनार हॉल में महिला डॉक्टर का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला है, तब से उसे न्याय दिलाने के लिए देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं।
डॉक्टरों ने काम-काज छोड़कर उसके लिए आंदोलन किया है। आम जनता सड़कों पर उतर रही है। कैंडल मार्च हो रहे हैं। महिलाएं रातों में सड़कों पर मशाल जुलूस निकालने को मजबूर हैं। सब न्याय की मांग कर रहे हैं।
लीपापोती उजागर होने के बाद पीड़िता को न्याय मिल पाने को लेकर संदेह!
पीड़िता के माता-पिता से लेकर आम जनता तक किसी को यकीन नहीं है कि ट्रेनी डॉक्टर के साथ इतनी बर्बरता किसी एक अपराधी की करतूत हो सकती है।
लेकिन, जिस तरह से मामले में शुरू में ही लीपापोती के तथ्य सामने आ रहे हैं, उससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या वाकई उस पीड़िता को कभी न्याय मिल पाएगा?
निर्भया कांड से क्यों भयानक है कोलकाता कांड?
कुछ लोग कोलकाता कांड की तुलना 2012 में दिल्ली में हुए निर्भया कांड से कर रहे हैं। गैंगरेप और हत्या के मामले में यह केस देश में बर्बरता और बहशीपन का भयानक उदाहरण बन चुका है। लेकिन, तथ्य यह है कि उस मामले में न तो आरोपियों को पकड़ने में कोई देरी हुई और न तो सरकार और प्रशासन पर कभी दोषियों को बचाने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ के आरोप लगे।
दिल्ली में चलती बस में हुआ था गैंगरेप
16 दिसंबर, 2012 को 23 वर्षीय युवती के साथ दिल्ली में चलती बस में गैंगरेप हुआ था। वह पीड़िता भी फिजियोथेरेपी इंटर्न थी। गैंगरेप में कुल 6 लोग शामिल थे। बस में गुनहगारों के अलावा युवती और उसका एक पुरष साथी ही था। सभी गुनगगार बस के ही स्टाफ थे। पहले उन लोगों ने दोनों के साथ मारपीट की।
निर्भया के साथ हुई थी भयानक बर्बरता
फिर युवती को बस की पिछली सीट पर ले जाकर बारी-बारी से रेप किया गया। 6 गुनहगारों में से एक तब नाबालिग था। उसने पीड़िता के साथ बर्बरता की इंतेहा कर दी थी। गैंगरेप के बाद उसने पीड़िता के प्राइवेट पार्ट में बस में औजार की तरह इस्तेमाल होने वाला लोहे की रॉड डाल दी, जिससे उसकी अंतड़ियां निकल आईं।
निर्भया कांड के विरोध में भी पूरे देश में विरोध-प्रदर्शन हुए थे
इस घटना के विरोध में मानो पूरा देश शहरों की सड़कों पर उतर आया। सभी गुनहगार तो फौरन पुलिस गिरफ्त में आ गए, लेकिन जनता तत्काल न्याय की मांग कर रही थी। इस घटना ने पूरे भारत को स्तब्ध कर दिया था। पीड़िता को बेहतर इलाज के लिए सरकार ने सिंगापुर भी भेजा, लेकिन 29 दिसंबर, 2012 को वह मौत से लड़ते-लड़ते जिंदगी की जंग हार गई।
पीड़िता के साथी और और खुद पीड़िता ने जो दर्द बयां किया था, उससे पता चलता है कि उसने 6-6 गुनहगारों से कैसे निर्भयता के साथ अपनी लड़ाई लड़ने की कोशिश की थी। इस घटना ने महिलाओं के खिलाफ और भी सख्त कानून बनाने का रास्ता साफ किया। उसकी 'फाइटर' वाले अंदाज ने ही कुछ मीडिया हाउस को उसका नाम 'निर्भया' रखने के लिए प्रेरित किया।
चार आरोपियों को हुई फांसी, एक ने की खुदकुशी
इस घटना के मुख्य आरोपी राम सिंह ने ट्रायल के दौरान 2013 में ही दिल्ली की तिहाड़ जेल में खुदकुशी कर ली थी। अन्य चार आरोपियों मुकेश, अक्षय, पवन और विनय को लंबी मुकदमेबाजी और कानूनी तिकड़बाजी के बावजूद 20 मार्च, 2020 को तिहाड़ जेल में ही फांसी दे दी गई।
नाबालिक दोषी तीन साल की सजा काटकर हुआ रिहा
छठा नाबालिग आरोपी, जिसे इस वारदात में सबसे बड़ा वहशी और बर्बर बताया जाता रहा है, जुवेनाइल होम में मात्र तीन साल की सजा काटकर रिहा हो गया और आज भी गुमनाम जिंदगी जी रहा है।












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