Kolkata Doctor Case: प्रिंसिपल संदीप घोष पर इतनी मेहरबान क्यों रही ममता सरकार?

Kolkata Doctor Rape Murder Case: कोलकाता की ट्रेनी डॉक्टर से रेप और जघन्य हत्या के मामले में पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार भी सवालों के घेरे में है। जिस आरजी कर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल संदीप घोष पर तमाम आरोप हैं, उनके इस्तीफे के बाद उन्हें महज चार घंटे में ही दूसरे मेडिकल कॉलेज की जिम्मेदारी सौंपने की आखिर क्या जल्दबाजी थी।

जबकि, इस मामले में मंगलवार को सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाई कोर्ट ने भी डॉक्टर संदीप घोष के बारे में कहा है कि वे अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकते और उन्हें भी आरोपी के तौर पर शामिल किया जाना चाहिए।

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कार्रवाई के बदले नई जिम्मेदारी क्यों दी गई?
संदीप घोष पर कार्रवाई की मांग डॉक्टरों की ओर से शुरू से ही हो रही है, लेकिन ममता सरकार ने उन्हें इस्तीफा देने के तुरंत बाद ही कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज (CNMC) का प्रिंसिपल नियुक्त कर दिया। हालांकि, वहां के आंदोलनकारी डॉक्टर उन्हें किसी भी सूरत में अस्पताल में नहीं घुसने देने की ठान चुके हैं।

डॉक्टर संदीप घोष पर क्या हैं आरोप?
31 साल की ट्रेनी डॉक्टर की आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुए रेप और हत्या के मामले डॉक्टर संदीप घोष पर आंदोलकारी डॉक्टर सबूतों से छेड़छाड़ करने और गलत जानकारी देने के लिए आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग कर रहे हैं।

किसके इशारे पर मामले को रफा-दफा करना चाह रहा था अस्पताल प्रशासन?
इसकी वजह ये है कि पहले अस्पताल प्रशासन की ओर से इस क्रूर रेप और हत्या के मामले को खुदकुशी बताने की कोशिश की गई। आरोप है कि घटनास्थल पर पुलिस और फोरेंसिक एक्सपर्ट के पहुंचने से पहले कई लोगों को वहां जाने दिया गया। यह तक साबित करने का प्रयास हुआ कि पीड़िता मनोवैज्ञानिक समस्या से जूझ रही थी।

पश्चिम बंगाल आईएमए के डॉक्टर अभीक घोष ने सोमवार को सवाल उठाते हुए पूछा था, 'सीसीटीवी फुटेज और पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट क्यों नहीं साझा की जा रही है? क्या किसी को बचाने के लिए कुछ दबाने की कोशिश चल रही है।'

प्रिंसिपल संदीप घोष पर इतनी मेहरबान क्यों रही ममता सरकार?
लेकिन, जिस प्रिंसिपल पर इतने गंभीर आरोप लग रहे हैं, उन्होंने घटना के तीन दिनों बाद भारी दबाव के बीच सोमवार को आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के प्रिंसिपल पद से इस्तीफा जरूर दिया, लेकिन चार घंटे बाद ही स्वास्थ्य विभाग ने उनकी नियुक्ति सीएनएमसी में बतौर प्रिंसिपल कर दी। जबकि, आंदोलनकारी डॉक्टर न सिर्फ उन्हें हटाने की मांग कर रहे थे, बल्कि उन्हें नई जिम्मेदारी नहीं दिए जाने की भी मांग कर रहे थे।

जहां तक आरोपी प्रिंसिपल की बात है तो वह पहले से भी विवादों में रहे हैं। उन्हें 2021 के मध्य में आरजी कर की जिम्मेदारी मिली थी, लेकिन उससे पहले दो बार यहां से उन्हें चलता किया जा चुका था। लेकिन, उनकी सत्ता में शायद रसूख ऐसी है कि पहली बार सिर्फ 48 घंटे में ही उनकी वापसी हो गई थी और दूसरी बार में भी उन्हें इसके लिए एक महीने से भी कम ही इंतजार करना पड़ा था।

संदीप घोष का गॉडफादर कौन?
टीओआई ने स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के हवाले से बताया है कि संदीप घोष अपने पद पर बने रहें, इसके लिए 'अंतिम वक्त तक कोशिशें' चलती रहीं और उन्हें दूसरी जगह भेजने का फैसला भी सर्वसम्मति से नहीं हुआ। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि टीएमसी सरकार में डॉक्टर संदीप घोष का गॉडफादर कौन है?

जैसे ही कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज तक उनकी बतौर प्रिंसिपल नियुक्ति की रिपोर्ट पहुंची, वहां पहले से ही गरम माहौल और भी बिगड़ गया। एक आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टर ने कहा, 'घोष के साथ हमारा अनुभव बहुत ही कड़वा है, जब वे हमारे मेडिकल सुप्रिटेंडेंट कम वाइस प्रिंसिपल थे और आर जी कर कैंपस में क्रूर बलात्कार और हत्या के बाद, हम उन्हें सीएनएमसी में अपने प्रिंसिपल के तौर पर नहीं चाहते हैं। हम उन्हें कैंपस में नहीं घुसने देने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।'

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