जानिये क्यों महात्मा गांधी ने 15 अगस्त 1947 को तिरंगा नहीं फहराया
14 अगस्त 1947 की रात को जब संविधान सभा की बैठक राष्ट्रपिता का नाम लेकर शुरु हुई उस वक्त सभा के बाहर महात्मा गांधी की जय के नारे लगाये जा रहे थे, लेकिन इन सब के बीच महात्मा गांधी वहां मौजूद नहीं थे।
जिस रात देश की आजादी की घोषणा हो रही थी उस वक्त महात्मा गांधी कलकत्ता में थे और उन्होंने किसी भी कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया और ना ही तिरंगा फहराया। लेकिन इसके पीछे की वजह काफी अहम है।
बापू ने 15 अगस्त को रखा था 24 घंटे का उपवास भारत का विभाजन एक ऐसी घटना हुई जिसने हजारों लोगों के खून की बलि ली थी। 16 अगस्त 1946 को कलकत्ता में हिंदू मुस्लिम दंगे शुरु हो गये थे जोकि पूरे बंगाल में धीरे-धीरे फैल गये थे।
देशभर में मचे कत्लेआम के खिलाफ 15 अगस्त के दिन महात्मा गांधी ने 24 घंटे का उपवास रखा था। महात्मा गांधी का कहना था कि जिस आजादी के लिए उन्होने इतना संघर्ष किया उसकी कीमत भारत का विभाजन के रूप में चुकानी पड़ी।
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क्या आप कत्लेआम के बीच उत्सव मनाना चाहते हैं 14 अगस्त की शाम को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने बापू से मुलाकात की और उनसे 15 अगस्त को होने वाले कार्यक्रमों में हिस्सा लेने का आग्रह किया। उस वक्त बापू ने कहा कि हर तरफ लोग भूख से मर रहे हैं, क्या आप इन सबके बीच में उत्सव मनाना चाहते हैं।
भूल जाइये कि मुझे अंग्रेजी आती है
उस वक्त बापू से एक वरिष्ठ पत्रकार ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर संदेश देने को कहा तो बापू के शब्द थे हमारे यहां अकाल है। वहीं बीबीसी ने जब बापू से संदेश लेने की कोशिश की तो गांधी जी ने बीबीसी से जवाहरलाल नेहरू से बात करने को कहा था।
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लेकिन बीबीसी ने एक बार फिर बापू से कहा कि आपका संदेश काफी अहम है क्योंकि यह कई देशों में कई भाषाओं में अनुवाद करके सुनाया जाएगा। लेकिन व्यथित बापू ने यह कहकर इनकार कर दिया कि आप भूल जाइये कि मुझे अंग्रेजी आती है।













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