जानिए कौन हैं रानी कमलापति जिनके नाम पर बदला गया भोपाल के हबीबगंज स्टेशन का नाम?

भोपाल, 13 नवंबर: मध्य प्रदेश में राजधानी भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम रानी कमलापति हो गया है। शिवराज सरकार के प्रस्ताव को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में नए हबीबगंज रेलवे स्टेशन का उद्घाटन करेंगे। हबीबगंज स्टेशन का नाम रानी कमलापति के नाम पर रखने का फैसला उनकी वीरता और पराक्रम को देखते हुए लिया गया है। जिन रानी कमलापति के नाम पर अब हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नामकरण किया गया है, उनका इतिहास काफी दिलचस्प रहा है।

रानी कमलापति 18वीं शताब्दी की गोंड रानी थीं

रानी कमलापति 18वीं शताब्दी की गोंड रानी थीं

रानी कमलापति 18वीं शताब्दी की गोंड रानी थीं। रानी कमलापति का विवाह गिन्नौरगढ़ के मुखिया और गोंड राजा सूरत सिंह के बेटे निजाम शाह से हुआ था। खूबसूरत और बहादुर रानी कमलापति राजा को सबसे ज्यादा प्रिय थीं। निजाम शाह की हत्या के लिए उनका भतीजा आलम शाह लगातार षड्यंत्र रचना रहता था। एक बार मौका पाकर उसने राजा के खाने में जहर मिलवा कर उसकी हत्या कर दी। उससे रानी और उनके बेटे को भी खतरा पैदा हो गया।

ऐसे लिया पति की हत्या का बदला

ऐसे लिया पति की हत्या का बदला

खुद को बचाने के लिए रानी कमलापति अपने बेटे नवल शाह के साथ गिन्नौरगढ़ से भोपाल के रानी कमलापति महल में आ गई थीं। आज का भोपाल उस समय का एक छोटा सा गांव हुआ करता था जिस पर निजाम शाह की हुकूमत थी। रानी कमलापति अपने पति की मौत का बदला लेना चाहती थीं, लेकिन दिक्कत ये थी कि उनके पास न तो फौज थी और न ही पैसे थे। रानी कमलापति ने दोस्त मोहम्मद खान से मदद मांगी। वह मदद को तैयार तो हो गया, लेकिन इसके एवज में उसने रानी से एक लाख रुपये की मांग कर दी।

पैसे ना होने पर दे दिया भोपाल

पैसे ना होने पर दे दिया भोपाल

दोस्त मोहम्मद ने राजा आलम शाह पर हमला कर उसकी हत्या कर दी। हालांकि करार के मुताबिक, रानी के पास दोस्त मोहम्मद को देने के लिए एक लाख रुपये नहीं थे। ऐसे में रानी ने भोपाल का एक हिस्सा उसे दे दिया, लेकिन रानी कमलापति के बेटे नवल शाह अपनी मां के इस फैसले से सहमत नहीं थे। ऐसे में नवल शाह और दोस्त मोहम्मद के बीच लड़ाई हो गई। बताया जाता है कि दोस्त मोहम्मद ने नवल शाह को धोखे से जहर देकर मार दिया।

रानी कमलापति अंतिम हिंदू साम्राज्ञी थीं

रानी कमलापति अंतिम हिंदू साम्राज्ञी थीं

रानी कमलापति अंतिम हिंदू साम्राज्ञी थीं। जिनके सम्मान में शिवराज सरकार ने अब हबीबगंज स्टेशन का नाम बदलकर रानी कमलापति कर दिया है। उनके पिता का नाम कृपाराम चंदन गोंड था। कहते हैं कि रानी इतनी खूबसूरत थी कि जब वह पान खातीं तो पान की पीक गले में दिखाई देती थी।

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