Budget 2024: क्या हैं देश के ऐतिहासिक 'मिलनेयम', 'रोलबैक' और ‘युगांतकारी बजट’, क्यों हुए फेमस?

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद के संयुक्त सत्र में अंतरिम बजट पेश किया। इस बार भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अंतरिम बजट में कई योजनाओं की घोषणा की है। बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि, उनके लिए देश में महिला,गरीब, युवा और किसान जैसी 4 जातियां है और यह बजट उन पर ही फोकस करता है।

देश के इतिहास में कई ऐसे बजट सामने आए हैं। जिनकी खूबियों और खामियों की वजह से उनकी आज भी खासा चर्चा होती है। आज ऐसे ही कुछ चर्चित बजट के बारे में जानेंगे। ऐसा ही एक बजट कुछ साल पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साल 2021 में पेश किया था। जिसे 100 सालों में एक बार आने वाला बजट कहा गया है। इसमें निजीकरण, टैक्स प्रावधानों, इंफ्रास्ट्रकचर और स्वास्थ्य आदि को लेकर कई अहम ऐलान किए गए थे।

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मिलेनियम बजट
ऐसा ही एक मशहूर बजट है मिलनेयम बजट। जो 21वीं सदी का पहला बजट था और इसे तत्कालीन अटल बिहारी की सरकार में वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने पेश किया था। साल 2000 के इस बजट को मिलेनियम बजट नाम से जाना गया। इसमें आईटी सेक्टर को टैक्स में छूट दी गई। कंप्यूटर सहित 21 तरह के आईटी उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी घटाई गई। जिसका परिणाम यह हुआ कि देश के आईटी सेक्टर में काफी बूस्ट देखा गया।

इसके साथ ही यशवंत सिन्हा ने बजट को शाम के पांच बजे पेश करने वाली अंग्रेजों से जुड़ी सालों पुरानी परंपरा को भी तोड़ा और सुबह 11 बजे बजट पेश किया गया।

रोलबैक बजट

मिलेनियम बजट के कुछ समय बाद साल 2002 में यशवंत सिन्हा ऐसा बजट लाए। जिसे रोलबैक बजट के रूप में जाना जाता है। इस बजट में रसोई गैस की कीमत बढ़ाने, नए टैक्स प्रावधान जैसे फैसलों का जनता और खुद उनकी पार्टी ने कड़ा विरोध किया। जिसका नतीजा यह हुआ कि, सिन्हा ने बजट के कई ऐलानों को रोलबैक किया यानि की वापस लि। जिसके चलते इसे रोलबैक बजट कहा गया।

युगांतकारी बजट
इनके अलावा ऐसा ही एक और दिलचस्प बजट है- युगांतकारी बजट। दरअसल, साल 1991 में भारत आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और भारत को आर्थिक तंगी से उबारने के लिए पीवी नरसिम्हा राव की सरकार 'युगांतकारी बजट' लेकर आई। जिसको आकार तत्कालीन वित्त मंत्री और देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने दिया था। इस ऐतिहासिक बजट ने लाइसेंस राज को समाप्त किया और भारतीय अर्थव्यवस्था को दुनिया के लिए खोल दिया गया।

जिसका नतीजा यह हुआ कि, भारत में विदेशी पूंजी को रास्ता मिला और देश के विकास को काफी बल मिला। कहा जाता है कि इस बजट ने भारत की किस्मत बदल दी। इसलिए इसे एपोकल यानी युगांतकारी कहा गया।

'कैरेट एंड स्टिक' बजट

इन सभी बजट के साथ ही कैरट एंड स्टिक बजट भी काफी मशहूर है। दरअसल, 28 फरवरी 1986 को वीपी सिंह ने कांग्रेस सरकार के लिए केंद्रीय बजट पेश किया था। यह बजट लाइसेंस राज को खत्म करने की दिशा में एक ठोस कदम था। इसे 'कैरेट एंड स्टिक' बजट कहा गया। यह एक तरह का मुहावरा है, जिसमें कैरेट यानी गाजर को मिठास या ईनाम के तौर पर माना जाता है। तो वहीं, स्टिक यानी की छड़ी को कड़े निर्णय के तौर पर देखा जाता है।

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