गुजरात: पतंगबाजी के चलते मारे 5 लोग, कई घायल

अहमदाबाद। मकर संक्रांति के मौके पर पतंगबाजी की जाती है। इस पतंगबाजी में हर साल कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है। गुजरात स्थित मेहसाणा और आणंद जिलों में रविवार को दो अलग-अलग घटनाओं में उनके गले कांच के लेप से बने पतंग की डोर के कारण दो व्यक्ति मारे गए । पुलिस ने बताया कि कल्पेश पटेल (33) मेहसाणा के गोजहरिया गांव में दोपहिया वाहन चला रहे थे, जब पतंग की स्ट्रिंग उनके गले में फंस गई और उनकी मौत हो गई। इसी तरह की घटना में, 38 वर्षीय अश्विन प्रजापति, जो मोटरसाइकिल पर जा रहे थे, रविवार (15 जनवरी) को आणंद जिले के खंघाट तालुका के नवपुरा गांव में पतंग की डोर गले में फंसने से मर गए।

पतंग की डोर में फंस गया गला

पतंग की डोर में फंस गया गला

35 वर्षीय भारत परमार का गला, मेहसाणा जिले के वडनगर में पतंग की डोर में फंस गया। फिलहाल अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि वड़ोदरा जिले के पडरा इलाके में एक मोटरसाइकिल पर सवार दो व्यक्ति भी पतंग तारों के कारण गंभीर रूप से घायल हो गए।

 राकोजट में मौत हो गई

राकोजट में मौत हो गई

एक अन्य घटना में, अहमदाबाद के एक सरकारी अस्पताल में एक व्यक्ति का निधन हो गया, जहां मनीनगर इलाके में चार मंजिला इमारत की छत से पतंग उड़ने और गिरने के बाद उसे संतुलन खोने के बाद रविवार को भर्ती कराया गया। प्रद्युम्न नगर पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने कहा, पतंग देख रहे 40 वर्षीय शख्स की राकोजट में मौत हो गई।

दरअसल मान्यता है कि...

दरअसल मान्यता है कि...

दरअसल मान्यता है कि पतंग खुशी, उल्लास, आजादी और शुभ संदेश की वाहक है, संक्रांति के दिन से घर में सारे शुभ काम शुरू हो जाते हैं और वो शुभ काम पतंग की तरह ही सुंदर, निर्मल और उच्च कोटि के हों इसलिए पतंग उड़ाई जाती है। काम की शुभता के लिए तो कहीं-कहीं लोग तिरंगे को भी पतंग रूप में इस दिन उड़ाते हैं। पतंग उड़ाने से दिल खुश और दिमाग संतुलित रहता है, उसे ऊंचाई तक उड़ाना और कटने से बचाने के लिए हर पल सोचना इंसान को नयी सोच और शक्ति देता है इस कारण पुराने जमाने से लोग पतंग उड़ा रहे हैं।

यह भी पतंग उड़ाने का कारण

यह भी पतंग उड़ाने का कारण

सर्दी के दिनों में सूरज की रोशनी बहुत जरूरी होती है इस कारण भी लोग पतंग उड़ाते हैं। ऐसा माना जाता है मकर संक्रांति के दिन से सूरज देवता प्रसन्न होते हैं इस कारण लोग घंटो सूर्य की रोशनी में पतंग उड़ाते हैं, इस बहाने उनके शरीर में सीधे सूरज देवता की रोशनी और गर्मी पहुंचती है, जो उन्हें सीधे तौर पर विटामिन डी देती है और खांसी, जुकाम से बचाती है।

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