किसान आंदोलन से भाजपा बेफिक्र, लेकिन टेंशन में पार्टी के ये दिग्गज, दांव पर सियासी भविष्य
किसान आंदोलन की वजह से पंजाब बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं की चिंताएं बढ़ गई है। राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी वैसे इस आंदोलन को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं दिख रही है, लेकिन विशेष रूप से पिछले किसान आंदोलन के बाद भाजपा में शामिल हुए पंजाब के दिग्गज नेताओं की टेंशन बढ़ी दिख रही है।
पंजाब के इन्हीं भाजपा नेताओं में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ भी शामिल हैं। 2020-21 में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ वे काफी मुखर रहे थे। लेकिन, अबकी बार उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि यह आंदोलन आखिरकार किस करवट लेने जा रहा है।

सुनील जाखड़ जैसे नेताओं की बढ़ी टेंशन
सुनील जाखड़ मई 2022 में बीजेपी में शामिल हुए थे और बाद में उन्हें प्रदेश भाजपा की कमान भी मिल गई थी। पिछले आंदोलन में जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी किसानों के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पंजाब आए थे तो जाखड़ ने खुद ड्राइवर करके उन्हें ट्रैक्टर की सवारी भी करवाई थी। लेकिन, इस बार उनके सामने हालात ही पूरी तरह से बदल चुके हैं।
जब इस मुद्दे पर इंडियन एक्सप्रेस ने उनसे संपर्क किया तो सुनील जाखड़ बोले, 'मैं एक या दो दिन में इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दूंगा। बातचीत होने दीजिए।' जानकारी के मुताबिक प्रदेश भाजपा नेतृत्व से कहा गया है कि किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच बाचतीत चल रही है, इसलिए अभी इंतजार करें।
भाजपा नेताओं के घरों के आगे धरना देंगे आंदोलनकारी
इस बीच जानकारी है कि कुछ किसान संगठनों ने पंजाब के तीन बीजेपी नेताओं प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़, पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और केवल सिंह ढिल्लों के घरों के आगे शनिवार को धरना देने की घोषणा की है।
अमरिंदर सिंह ने अभी इस मुद्दे से बना रखी है दूरी
पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह अभी तक इस मुद्दे से फिलहाल खुद को दूर करके चल रहे हैं। पिछले आंदोलन में वह पंजाब के सीएम थे और उस आंदोलन को लेकर काफी मुखर नजर आते थे। तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ विधानसभा से प्रस्ताव भी पास करवाया गया था।
बीजेपी के अन्य नेताओं में भी बढ़ रही है असहजता
यहां तक कि पंजाब में भाजपा के अन्य नेताओं में भी इस मुद्दे पर असहजता बढ़ती दिख रही है। पार्टी के राष्ट्रीय किसान मोर्चा के पूर्व उपाध्यक्ष सतवंत सिंह पुनिया ने कहा, 'मुझे याद है कि 2020-21 में 14 महिनों तक मेरे घर के बाहर किसान धरने पर बैठे थे। कृषि कानून वापस लिए गए और सरकार ने किसानों से वादा किया था। इसलिए मैं केंद्र से अपील करता हूं कि देश में अशांति रोकने के लिए किसान संगठनों के उचित मांगों को मान लें।'
राज्य सरकार पर सवाल क्यों नहीं उठा रहे ये लोग- भाजपा नेता
हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने कहा, 'लोकसभा चुनावों के इतने नजदीक आंदोलन के समय पर सवाल पूछना चाहता हूं। इन संगठनों ने पहले कोई ऐक्शन क्यों नहीं लिया? ये भी कि ये लोग कई लंबित मामलों को लेकर राज्य सरकार पर भी सवाल क्यों नहीं उठा रहे? इन संगठनों की ई्मानदारी पर मुझे संदेह है। लेकिन, एक किसान के नाते मैं चाहता हूं कि केंद्र सरकार किसानों की मांगें पूरी करे।'
'बातचीत ही है तरीका'
लेकिन, बीजेपी नेता और पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरजीत कुमार ज्ञानी ने कहा है, 'पंजाब के किसान ज्यादातर गेहूं और चावल उगाते हैं, जिसके लिए उन्हें एमएसपी मिल रही है.....आपसी सहयोग से सबकुछ का हल हो सकता है। मुझे लगता है कि मांगें सामने रखने के लिए बातचीत ही एक तरीका होना चाहिए।'












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