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Wayanad Landslide: चीखों से कांप रहा कांग्रेस का अभेद्य किला वायनाड! क्यों ये इलाके भूस्खलन का शिकार?

Wayanad Landslide Reasons: : अपनी खूबसूरत हरियाली और पहाड़ियों के लिए मशहूर केरल का वायनाड जिला मंगलवार को लाशों के ढेर से पट गया। जब विभिन्न पहाड़ी इलाकों में भारी भूस्खलन के कारण 84 लोगों की मौत हो गई। हालांकि, केरल के मंत्री एमबी राजेश के मुताबिक, अब तक 250 से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू में बचा लिया गया है।

कांग्रेस का अभेद्य किला रहा वायनाड इस वक्त तबाही से कराह रहा है। यह क्षेत्र अक्सर भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं का शिकार होता रहा है। आइए जानते हैं क्यों हुआ वायनाड भूस्खलन का शिकार?

wayanad landslide reason

वायनाड में भूस्खलन के कारण

  • भारी बारिश: वायनाड में जुलाई-अगस्त के महीने में मानसून की बारिश बहुत तेज होती है। भारी वर्षा मिट्टी को कमजोर कर देती है और भूस्खलन का खतरा बढ़ा देती है।
  • भौगोलिक स्थिति: वायनाड की पहाड़ियों और ढलानों में ढीली मिट्टी होती है, जो भारी बारिश के बाद आसानी से धंस जाती है।
  • वनस्पति की कटाई: वन क्षेत्र में वनों की कटाई से मिट्टी की पकड़ कमजोर हो जाती है, जिससे भूस्खलन की संभावना बढ़ जाती है।
  • मानव एक्टिविटी: निर्माण कार्य, सड़कें बनाना, और अन्य विकास गतिविधियों से मिट्टी की संरचना पर प्रभाव पड़ता है।

भूस्खलन से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र

  • मुंडक्कई
  • चूरलमाला
  • अट्टामाला
  • नूलपुझा
  • मेप्पाडी

विशेष क्षेत्रीय कारण

  • मुंडक्कई और चूरलमाला: इन क्षेत्रों में पहाड़ी ढलानों पर खेती और निर्माण कार्य अधिक होते हैं, जिससे मिट्टी की स्थिरता प्रभावित होती है।
  • अट्टामाला और नूलपुझा: ये इलाके भी पहाड़ी ढलानों पर स्थित हैं और यहां पर वनों की कटाई अधिक हुई है, जिससे भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है।
  • मेप्पाडी: यह इलाका पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरा हुआ है, लेकिन हाल के सालों में यहां पर मानव गतिविधियों में वृद्धि हुई है, जिससे भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं।

टूटा कनेक्शन
अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर खूबसूरत गांव मुंडक्कई, चूरलमाला, अट्टामाला और नूलपुझा अब भूस्खलन की चपेट में है। ये इलाके दूसरी जगहों से कट गए हैं। बाढ़ के पानी में बह गए वाहन पेड़ों के तने में फंसे हुए और कई जगहों पर डूबे हुए देखे जा सकते हैं।

मॉनसून सीजन वायनाड का 'ब्लैक सीजन'!
पिछले 5 सालों में भूस्खलन और बाढ़ के कारण वायनाड में सैकड़ों लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हुए हैं। इनमें से कई घटनाएं जुलाई-अगस्त के मानसून के दौरान हुईं हैं।

वायनाड में हर साल भूस्खलन की घटनाएं इस क्षेत्र के निवासियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई हैं। सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा राहत कार्य और पुनर्वास योजनाओं के बावजूद, प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना एक बड़ी चुनौती है।

51 फीसदी जमीन पहाड़ी ढलानें
केरल का वर्तमान क्षेत्रफल 38,863 वर्ग किलोमीटर है। यह राज्य भारत के दक्षिण-पश्चिमी कोने में स्थित एक संकरी भूमि पट्टी है। हालांकि यह भारत के कुल क्षेत्रफल का केवल 1.18% है, लेकिन यह देश की कुल आबादी का लगभग 3.43% हिस्सा है। राज्य के पूरे क्षेत्रफल का 43 फीसदी हिस्सा भूस्खलन संभावित क्षेत्र है। इडुकी की 74 फीसदी और वायनाड की 51 फीसदी जमीन पहाड़ी ढलानें हैं। इससे साफ है कि भूस्खलन की संभावनाएं भी सबसे ज्यादा हैं।

कांग्रेस का अभेद्य किला, होने हैं उपचुनाव
परिसीमन के बाद 2009 में वायनाड लोकसभा सीट बनी। 2019 में कांग्रेस के राहुल गांधी पहली बार इस सीट से जीते। उसके बाद, कांग्रेस के लिए यह सुरक्षित सीट बन गई। इस साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस के राहुल गांधी ने यूपी की रायबरेली सीट के साथ दक्षिणी राज्य केरल में पड़ने वाली वायनाड सीट पर कब्जा जमाया। हालांकि, राहुल ने रायबरेली सीट को कायम रखते हुए वायनाड छोड दी। अब वायनाड के उपचुनाव के लिए प्रियंका गांधी इस सीट पर कांग्रेस की उम्मीदवार हैं।

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