वायनाड में गजराज ने संभाला मोर्चा, तीन हाथियों ने पूरी रात खड़े होकर बचाई परिवार की जान
केरल के वायनाड प्रलयकारी भूस्खलन ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली है, जबकि बड़ी संख्या में लोग इस हादसे में घायल हुए हैं और लापता हैं। इस मुश्किल समय में लोगों को अपनी जान बचाना मुश्किल हो रहा है। इस बीच केरल से ऐसी खबर सामने आई है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं है।
दरअसल मंगलवार सुबह जिस तरह से भूस्खलन में सैकड़ों परिवार फंस गए, उसमे एक परिवार ऐसा भी है जो घर ढहने के बाद भी अपनी जान बचाने में सफल रहा है। वाडनाड के चूरलमाला में सुजाता अनिंचिरा का परिवार किसी तरह से भूस्खलन में अपनी जान बचा पाया।

पूरा परिवार फंसा
भारी बारिश और भूस्खलन में घर ढहने से सुजाता, उनकी बेटी सुजिता, पति कुट्टन, पोता सूरज और मृदुला बड़ी मुश्किल से मलबे को हटाकर बाहर निकलने में सफल हुए। ईंटों को हटाकर और तेज पानी से होते हुए पास की पहाड़ी पर जाकर किसी तरह ये लोग बच निकलने में कामयाब रहे। लेकिन पहाड़ी में इन लोगों का सामना एक जंगली हाथी और दो मादा हाथियों से हुआ।
तीन हाथियों ने घेरा
भारी बारिश और दलदल के बीच जंगल में उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि कहां जाएं। उन्हें तीन हाथियों ने घेर लिया था, जिसमें एक नर और दो मादा हाथी थे। बड़े-बड़े हाथी चिंघाड़ रहे थे। सुजाता के परिवार को समझ में नहीं आ रहा था कि अब कहां जाएं। वे जिंदा बचने की उम्मीद छोड़ चुके थे। उन्होंने हाथ जोड़कर भगवान को याद किया और वहीं बैठ गए। उन्होंने हाथ जोड़कर हाथियों से शरण मांगी।
चमत्कार से कम नहीं
इस घटना को साझा करते हुए सुजाता ने बताया कि यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि चूरलामाला में उनका घर भूस्खलन में ढह गया। पूरा परिवार मलबे में तब्दील हो गया और हम सभी इस मलबे में दब गए।
घर में घुस गया था पानी
सुजाता ने बताया कि रात डेढ़ बजे घर पर मलबा गिरा। सोमवार रात को भारी बारिश हो रही थी। रात करीब डेढ़ बजे मुझे बहुत तेज आवाज सुनाई दी, जिसके बाद पानी का तेज बहाव हमारे घर में घुस आया।
इससे पहले कि हम कुछ समझ पाते भूस्खलन के कारण लकड़ियां घर की दीवारों से टकराने लगीं, हम बहुत डर गए थे। आस-पास के ध्वस्त घरों का मलबा भी हमारे घर में घुस रहा था।
जंगल में ली शरण
सुजाता ने बताया कि भगवान की कृपा थी कि वे सभी मलबे में दब गए लेकिन जिंदा बच गए। किसी तरह वे भागकर अपनी जान बचाने में कामयाब रहे। उन्होंने बताया हम अपने घर के पीछे पहाड़ी पर चढ़ गए और एक कॉफी बागान में शरण ली। यह एक जंगल वाला इलाका था। चारों तरफ सन्नाटा था। तेज बारिश हो रही थी।
रात के अंधेरे में सामने आए गजानन
अचानक से हमारी आंखों के सामने सब कुछ नष्ट हो गया। दिमाग काम नहीं कर रहा था लेकिन तभी आधे मीटर की दूरी पर तीन हाथियों का झुंड दिखाई दिया। घना अंधेरा था, पास खड़े हाथी को पहचानना मुश्किल था। परिवार वालों को समझ आ गया कि ये हाथी हैं। उन्हें लगा कि अब ये शायद ही बच पाएंगे।
हाथ जोड़कर की प्रार्थना
सुजाता ने बताया कि उन्होंने भगवान से हाथ जोड़कर प्रार्थना की, हाथियों ने हमें कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। मेप्पाडी के राहत शिविर में रह रही सुजाता ने कहा मैंने हाथी से प्रार्थना की, मैंने कहा कि हम आपदा से बच गए हैं। हमारे पास यहां रात बिताने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है।
पूरी रात खड़े रहे गजानन
हम बचाव दल के आने का इंतजार कर रहे हैं, फिर हम चले जाएंगे। हाथी सुबह तक हमारे साथ रहे। हम हाथी के पैरों के बहुत करीब थे लेकिन ऐसा लग रहा था कि हाथी हमारी परेशानी समझ गए थे।
हम सुबह छह बजे तक वहीं रहे और तीनों हाथी भी हमारे साथ तब तक खड़े रहे जब तक हमें बचा नहीं लिया गया। मैंने देखा कि जब हम सुबह वहां से जाने लगे तो हाथियों की आंखें आंसुओं से भर गईं।












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