केरल के बड़े ईसाई नेता पीसी जॉर्ज की पार्टी का बीजेपी में विलय, लोकसभा चुनाव में बदल सकता है सियासी गणित

केरल में लोकसभा चुनावों से पहले बीजेपी को बुधवार को एक बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है। प्रदेश के दिग्गज नेता पीसी जॉर्ज भाजपा में शामिल हो गए हैं और अपनी पार्टी केरल जनपक्षम (सेक्युलर) का भी भारतीय जनता पार्टी में विलय कर दिया है।

पीसी जॉर्ज के साथ ही उनके बेटे और कोट्टायम जिला पंचायत के सदस्य शॉन जॉर्ज ने भी भाजपा की सदस्यता ले ली है। दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर और वी मुरलीधरन समेत प्रदेश भाजपा के प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर और अनिल एंटनी जैसे नेताओं ने उनका स्वागत किया है।

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बीजेपी के 'अल्पसंख्यक-विरोधी' पार्टी होने की धारणा दूर- मुरलीधरन
इस मौके पर वी मुरलीधरन ने कहा कि पीसी जॉर्ज के आने से यह धारणा दूर हो जाती है कि बीजेपी 'अल्पसंख्यक-विरोधी' पार्टी है। वहीं जावड़ेकर ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में ऐसे कुछ और चौंकाने वाले राजनीतिक हलचल देखने को मिल सकती है।

चर्चों से बात करने के बाद ही भाजपा में आने का फैसला- पीसी जॉर्ज
वहीं जॉर्ज ने साफ कर दिया है कि उन्होंने केरल में चर्चों के प्रतिनिधियों से चर्चा करने के बाद ही भाजपा ज्वाइन करने का फैसला किया है।
उन्होंने कहा, 'हम बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। केरल में यूडीएफ और एलडीएफ का शासन है। वहां दोनों ही शैतानी कर रहे हैं। पूरी गरीबी है। वहां से लोग भाग रहे हैं। इस साल करीब 85,000 लोग विदेश चले गए....'

एलडीएफ-यूडीएफ के धंधे को बंद करना है- पीसी जॉर्ज
उन्होंने आगे कहा, 'बीजेपी उम्मीदवार को हराने के लिए एलडीएफ, यूडीएफ को वोट देगा और यूडीएफ, एलडीएफ को। यही धंधा चल रहा है। तिरुवनंतपुरम और कासरगोड में पिछली बार यही हुआ था। इसे खत्म करना है। केरल को सिर्फ पीएम नरेंद्र मोदी के समर्थन से ही बचाया जा सकता है।'

पीसी जॉर्ज पूंजर विधानसभा क्षेत्र से सातवीं बार के विधायक हैं। वह अपनी पार्टी बनाने से पहले केरल कांग्रेस, केरल कांग्रेस (जोसेफ), केरल कांग्रेस (सेक्युलर) और केरल कांग्रेस (एम) में भी रह चुके हैं।

केरल में ईसाई समुदाय के बीच संपर्क बढ़ाने में जुटी है बीजेपी
केरल में एक बड़े ईसाई नेता की पार्टी का ऐसे समय में भाजपा में विलय हुआ है, जब पार्टी इस अल्पसंख्यक समुदाय तक पहुंचने के लिए स्नेह यात्रा जैसे अभियान चला रही है।

केरल में ईसाइयों को यूडीएफ का समर्थक माना जाता था
केरल में क्रिश्चियन समुदाय को परंपरागत तौर पर कांग्रेस की अगुवाई वाले यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट (यूडीएफ) का समर्थक माना जाता था। लेकिन, लव जिहाद, धर्मांतरण, और गठबंधन में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के बढ़ते दबदबे की वजह से वह बीजेपी की ओर देखने को मजबूर बताए जा रहे हैं।

हाल के समय में चर्च के प्रमुखों ने बीजेपी के साथ संपर्क बढ़ाया है और क्रिसमस के मौके पर बिशपों का एक समूह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिल चुका है।

केरल में ईसाइयों का भाजपा के प्रति इस तरह के झुकाव ने कहीं न कहीं सत्ताधारी और विपक्षी गठबंधन दोनों में अपना चुनावी समीकरण बिगड़ने का डर पैदा किया है। यही वजह है कि एलडीएफ सरकार मणिपुर के मुद्दे को बार-बार उछालने की कोशिश कर रही है।

कई और ईसाई नेता बीजेपी में हो चुके हैं शामिल
जॉर्ज के भाजपा में आने के बाद राज्य में पार्टी के पास ईसाई नेताओं की संख्या और मजबूत हुई है। इससे पहले टॉम वडक्कन, अनिल एंटनी और अल्फोंस कन्ननथनम जैसे नेता भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो चुके हैं। (इनपुट-एजेंसियां)

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